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ईडी: छात्रों से जेईई की कोचिंग के नाम पर वसूले करोड़ों, बीच में बंद किए 32 सेंटर; फिटजी ने नहीं लौटाई फीस
Fri, 16 Oct 2026 04:01 PM IST
पवन पांडेय
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला,नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला,नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Fri, 16 Oct 2026 04:01 PM IST
सार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छात्रों की फीस के कथित दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फिटजी लिमिटेड और उसके निदेशकों दिनेश कुमार गोयल व मोनीला गोयल के खिलाफ अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की है। ईडी ने 71.88 करोड़ रुपये की संपत्तियां सरकार के अधीन करने की मांग की है। जांच के अनुसार, मई 2024 से फरवरी 2025 के बीच फिटजी के 32 केंद्र बंद होने से 14,411 छात्र प्रभावित हुए। छात्रों से 85.79 करोड़ रुपये की फीस वसूली को अपराध से प्राप्त आय माना गया है।
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ED ने दो ठिकानों पर मारी रेड
विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लखनऊ ज़ोनल कार्यालय ने 15 अक्तूबर को गाजियाबाद की विशेष पीएमएलए अदालत में फ़िटजी लिमिटेड और इसके निदेशकों, दिनेश कुमार गोयल और मोनीला गोयल के खिलाफ 'मनी लॉन्ड्रिंग' (धन शोधन) के अपराध के लिए एक अभियोजन शिकायत दायर की है। यह मामला छात्रों से वसूली गई फीस के दुरुपयोग से जुड़ा है। ईडी ने अदालत से मांग की है कि उन्हें दोषी ठहराया जाए और जांच के दौरान जब्त की गई या अस्थायी रूप से कुर्क की गई 71.88 करोड़ रुपये की संपत्तियों को सरकार के अधीन कर लिया जाए।
ईडी ने अपनी जांच की शुरुआत यूपी पुलिस (नोएडा और ग्रेटर नोएडा) और एमपी पुलिस (भोपाल) द्वारा दर्ज की गई चार एफ़आईआर के आधार पर की। ये एफ़आईआर, बीएनएस 2023 की धाराओं 316(2), 318(4), 61(2) और 3(5) के तहत दर्ज की गई हैं, जो आईपीसी 1860 की धाराओं 406, 420, 120B और 34 के समान हैं। एफ़आईआर में आरोप लगाया गया है कि फ़िटजी ने जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए 2 से 4 साल के कोचिंग प्रोग्राम के नाम पर, प्रत्येक छात्र से 2.8 लाख से 3.5 लाख रुपये तक की फीस एडवांस में वसूली थी।
छात्रों को यह भरोसा दिया गया था कि पूरा प्रोग्राम पूरा कराया जाएगा, लेकिन, वेतन न मिलने के कारण फैकल्टी (शिक्षक) छोड़कर चले गए और बिना किसी पूर्व सूचना के कोचिंग सेंटर अचानक बंद कर दिए गए। यह भी आरोप है कि प्रबंधन ने फीस की रकम को कहीं और इस्तेमाल कर लिया। फैकल्टी के चले जाने के बाद भी, झूठे वादे करके नए छात्रों से फीस वसूलना जारी रखा। नोएडा पुलिस ने इस मामले में एक चार्जशीट दायर की है, जिसमें दिनेश कुमार गोयल और मोनीला गोयल को आरोपी बनाया गया है। यह चार्जशीट लगभग 300 पीड़ितों, फिटजी कोचिंग सेंटर चलाने वालों और अन्य गवाहों के बयानों के साथ-साथ, जांच के दौरान मिली फीस की रसीदों और अन्य सबूतों पर आधारित है।
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जांच से पता चला है कि फिटजी ने मई 2024 और फरवरी 2025 के बीच अचानक 32 केंद्र बंद कर दिए, जिससे 14,411 छात्र बिना उस कोचिंग के रह गए, जिसके लिए उन्होंने पैसे दिए थे। कंपनी छात्रों को दाखिला देती रही, यहाँ तक कि उन प्रोग्राम्स के लिए भी जो मार्च 2029 तक चलने वाले थे, जबकि कंपनी को पता था कि वह ये सेवाएं नहीं दे पाएगी। इस तरह वसूली गई फीस को तब खर्च कर दिया गया, जब कंपनी लगातार घाटे में चल रही थी। फीस का वह हिस्सा जिसे अपने पास रखा गया और जिसका गलत इस्तेमाल किया गया - जिसकी कुल रकम 85.79 करोड़ रुपये है - उसे इस मामले में 'अपराध से प्राप्त आय' माना गया है।
आगे की जांच से पता चला है कि दिनेश कुमार गोयल और मोनीला गोयल, जिनका कंपनी पर नियंत्रण था, ने वित्त वर्ष 2022-23 से खुद के लिए 24.92 करोड़ रुपये की सैलरी निकाली। चूंकि गोयल परिवार के पास कंपनी के 86.31% शेयर हैं, इसलिए यह साफ है कि डायरेक्टर्स ने बिना किसी स्वतंत्र जांच के अपनी सैलरी खुद ही मंजूर कर ली। उन्होंने सबसे पहले खुद को भुगतान किया, जबकि अन्य कर्मचारियों की सैलरी में देरी हुई या उन्हें भुगतान नहीं मिला। दिनेश कुमार गोयल हर महीने लगभग 56 लाख रुपये लेते थे। मोनीला गोयल हर महीने 25 लाख रुपये से ज्यादा लेती थीं, जबकि उन्होंने खुद माना कि वह नियमित रूप से ऑफिस नहीं जाती थीं और घर से ही चेक पर साइन करती थीं। केंद्र बंद होने के दौरान भी उन्हें भुगतान किया जाता रहा।
यह बताना जरूरी है कि ईडी ने इससे पहले 24.04.2025 को 7 जगहों पर तलाशी ली थी, जिसमें 10 लाख रुपये नकद और 4.86 करोड़ रुपये की कीमत के गहने जब्त किए गए थे। इसके अलावा, पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत 9 अक्तूबर को 66.92 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच (कुर्क) कर दिया गया था। मामले में आगे की जांच जारी है।
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ईडी ने अपनी जांच की शुरुआत यूपी पुलिस (नोएडा और ग्रेटर नोएडा) और एमपी पुलिस (भोपाल) द्वारा दर्ज की गई चार एफ़आईआर के आधार पर की। ये एफ़आईआर, बीएनएस 2023 की धाराओं 316(2), 318(4), 61(2) और 3(5) के तहत दर्ज की गई हैं, जो आईपीसी 1860 की धाराओं 406, 420, 120B और 34 के समान हैं। एफ़आईआर में आरोप लगाया गया है कि फ़िटजी ने जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए 2 से 4 साल के कोचिंग प्रोग्राम के नाम पर, प्रत्येक छात्र से 2.8 लाख से 3.5 लाख रुपये तक की फीस एडवांस में वसूली थी।
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छात्रों को यह भरोसा दिया गया था कि पूरा प्रोग्राम पूरा कराया जाएगा, लेकिन, वेतन न मिलने के कारण फैकल्टी (शिक्षक) छोड़कर चले गए और बिना किसी पूर्व सूचना के कोचिंग सेंटर अचानक बंद कर दिए गए। यह भी आरोप है कि प्रबंधन ने फीस की रकम को कहीं और इस्तेमाल कर लिया। फैकल्टी के चले जाने के बाद भी, झूठे वादे करके नए छात्रों से फीस वसूलना जारी रखा। नोएडा पुलिस ने इस मामले में एक चार्जशीट दायर की है, जिसमें दिनेश कुमार गोयल और मोनीला गोयल को आरोपी बनाया गया है। यह चार्जशीट लगभग 300 पीड़ितों, फिटजी कोचिंग सेंटर चलाने वालों और अन्य गवाहों के बयानों के साथ-साथ, जांच के दौरान मिली फीस की रसीदों और अन्य सबूतों पर आधारित है।
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जांच से पता चला है कि फिटजी ने मई 2024 और फरवरी 2025 के बीच अचानक 32 केंद्र बंद कर दिए, जिससे 14,411 छात्र बिना उस कोचिंग के रह गए, जिसके लिए उन्होंने पैसे दिए थे। कंपनी छात्रों को दाखिला देती रही, यहाँ तक कि उन प्रोग्राम्स के लिए भी जो मार्च 2029 तक चलने वाले थे, जबकि कंपनी को पता था कि वह ये सेवाएं नहीं दे पाएगी। इस तरह वसूली गई फीस को तब खर्च कर दिया गया, जब कंपनी लगातार घाटे में चल रही थी। फीस का वह हिस्सा जिसे अपने पास रखा गया और जिसका गलत इस्तेमाल किया गया - जिसकी कुल रकम 85.79 करोड़ रुपये है - उसे इस मामले में 'अपराध से प्राप्त आय' माना गया है।
आगे की जांच से पता चला है कि दिनेश कुमार गोयल और मोनीला गोयल, जिनका कंपनी पर नियंत्रण था, ने वित्त वर्ष 2022-23 से खुद के लिए 24.92 करोड़ रुपये की सैलरी निकाली। चूंकि गोयल परिवार के पास कंपनी के 86.31% शेयर हैं, इसलिए यह साफ है कि डायरेक्टर्स ने बिना किसी स्वतंत्र जांच के अपनी सैलरी खुद ही मंजूर कर ली। उन्होंने सबसे पहले खुद को भुगतान किया, जबकि अन्य कर्मचारियों की सैलरी में देरी हुई या उन्हें भुगतान नहीं मिला। दिनेश कुमार गोयल हर महीने लगभग 56 लाख रुपये लेते थे। मोनीला गोयल हर महीने 25 लाख रुपये से ज्यादा लेती थीं, जबकि उन्होंने खुद माना कि वह नियमित रूप से ऑफिस नहीं जाती थीं और घर से ही चेक पर साइन करती थीं। केंद्र बंद होने के दौरान भी उन्हें भुगतान किया जाता रहा।
यह बताना जरूरी है कि ईडी ने इससे पहले 24.04.2025 को 7 जगहों पर तलाशी ली थी, जिसमें 10 लाख रुपये नकद और 4.86 करोड़ रुपये की कीमत के गहने जब्त किए गए थे। इसके अलावा, पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत 9 अक्तूबर को 66.92 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच (कुर्क) कर दिया गया था। मामले में आगे की जांच जारी है।