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ED: बैंक के अफसर ने डीयू कैंपस में 46 सावधि जमा खाते तोड़े, घपला कर गेमिंग प्लेटफॉर्म में लगाए 52.99 करोड़

Sat, 31 May 2025 02:37 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sat, 31 May 2025 02:37 PM IST
सार

प्रवर्तन निदेशालय के मुताबिक, 29 मई को दिल्ली, मुंबई और बंगलूरू में सात स्थानों पर छापेमारी की गई थी। इस दौरान विभिन्न आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई है।

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ED: Bank officer broke 46 fixed deposit accounts in DU campus, fraudulently invested Rs 53 crore in gaming
ED (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

पंजाब एंड सिंध बैंक के तत्कालीन अधिकारी बेदानशु शेखर मिश्रा, उनके सहयोगियों और गेमिंग प्लेटफॉर्म GOA247.LIVE के प्रमुख प्रबंधन व्यक्तियों के खिलाफ ईडी द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत जांच की जा रही है। इस मामले में हैरान करने वाला खुलासा हुआ है। डीयू कैंपस में कार्यरत, पंजाब एंड सिंध बैंक के अफसर ने 46 सावधि जमा खाते तोड़ डाले या उन्हें समाप्त कर किया। उसके बाद पैसे को घुमाना शुरु किया। बैंक अधिकारी ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर गेमिंग प्लेटफॉर्म में 52.99 करोड़ रुपये लगा दिए। ईडी ने कई जगहों पर रेड की है। गेमिंग प्लेटफॉर्म द्वारा उपयोग किए जा रहे 48 खच्चर खातों में कुल 1.5 करोड़ रुपये की राशि फ्रीज कर दी है।  

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) दिल्ली जोनल कार्यालय के मुताबिक, 29 मई को दिल्ली, मुंबई और बंगलूरू में सात स्थानों पर दबिश दी गई थी। इस मुहिम के दौरान परिणामस्वरूप, ईडी ने 39 लाख रुपये की नकद राशि के साथ-साथ डिजिटल साक्ष्य, कई मोबाइल फोन और ऑनलाइन गेमिंग के लिए इस्तेमाल किए जा रहे सिम कार्ड आदि सहित विभिन्न आपत्तिजनक सामग्री जब्त की है। इसके अलावा, तलाशी की कार्यवाही के दौरान, ईडी ने गेमिंग प्लेटफॉर्म द्वारा उपयोग किए जा रहे 48 खच्चर खातों 'म्यूल अकाउंट' में जमा कुल 1.5 करोड़ रुपये की राशि फ्रीज कर दी है। 
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ईडी की जांच में पता चला है कि बेदानशु शेखर मिश्रा ने पंजाब एंड सिंध बैंक, खालसा कॉलेज शाखा, नॉर्थ कैंपस, दिल्ली विश्वविद्यालय में अधिकारी के रूप में तैनात रहते हुए कई ग्राहकों के 46 सावधि जमा खातों को तोड़कर/समाप्त करके अनधिकृत लेनदेन करके धोखाधड़ी करने के लिए अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया है। मुख्य रूप से एसजीटीबी खालसा कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के नाम पर सावधि जमा खाते हैं। इस प्रकार, उन्होंने बैंक के साथ-साथ बैंक के कई खाताधारकों के साथ धोखाधड़ी और जालसाजी की और बैंक को सौंपे गए 52.99 करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन का गबन/घपला किया। 
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ईडी की जांच के दौरान पता चला है कि उन्होंने अपराध की आय (पीओसी) 24 करोड़ रुपये (लगभग) ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म जैसे गोवा 247.live को हस्तांतरित कर दी है। पीओसी को आरोपी ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म मालिकों द्वारा व्यवस्थित विभिन्न खच्चर खातों के माध्यम से इन ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को हस्तांतरित कर दिया। पीएमएलए की धारा 5 के तहत बेदानशु शेखर मिश्रा और अन्य सहयोगियों की 2.56 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई।  म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक अकाउंट होते हैं जिनका इस्तेमाल जालसाज अपराध से मिले पैसे को ठिकाने लगाने के लिए करते हैं। आमतौर पर साइबर अपराधी, 'म्यूल' बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं। 


म्यूल अकाउंट वह खाता होता है, जो किसी निर्दोष व्यक्ति के नाम पर खोला जाता है। इसमें चालू और बचत खाते, दोनों शामिल हैं। ऐसे बैंक खातों से पैसा कहां और कितनी बार ट्रांसफर हुआ है, यह जानकारी आसानी से नहीं जुटाई जा सकती। जैसे ही जालसाजी की रकम, इन खातों में आती है, तुरंत साइबर अपराधी यूपीआई के माध्यम से दूसरे खातों में ट्रांसफर कर लेते हैं। ये खाते मनी लांन्ड्रिग के लिए भी उपयोग में लाए जाते हैं। 

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