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पर्यावरणविद् माधव गाडगिल ने चेताया, केरल की तरह महाराष्ट्र और गोवा भी झेल सकते हैं भयानक त्रासदी

Wed, 22 Aug 2018 02:24 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 22 Aug 2018 02:24 AM IST
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Ecologist madhav gadgil warns maharashtra and goa may also face kerala type situation

केरल इस वक्त पिछले 100 साल के इतिहास में सबसे बड़ी बाढ़ की विभीषिका झेल रहा है। इस बीच देश के मशहूर पर्यावरणविद् माधव गाडगिल का कहना है कि अगर 2011 में उनके द्वारा सौंपी गई वेस्टर्न घाट इकोलॉजी एक्सपर्ट पैनल रिपोर्ट में उठाई गई पर्यावरण की चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो महाराष्ट्र और गोवा को भी केरल की तरह की भयानक कुदरती आफत का सामना करना पड़ सकता है। 

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एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में उन्होंने बताया कि केरल, महाराष्ट्र और गोवा में बारिश की तीव्रता भले ही अलग-अलग है, लेकिन इन इलाकों की पर्यावरणीय चिंताएं समान हैं, क्योंकि यहां बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य हो रहे हैं। 
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उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और गोवा दोनों राज्यों में हालांकि केरल जैसी मूसलाधार बारिश नहीं हुई है लेकिन पुणे के मलिन में साल 2014 में हुई त्रासदी की तरह बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बरकरार है। 
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गाडगिल ने कहा कि इसका प्रभाव प्रतिकूल हो सकता है। यह केवल अचानक आई बाढ़ से संबंधित नहीं है। यह कोई गंभीर पर्यावरणीय चिंता हो सकती है, जिसके बारे में रिपोर्ट में बताया गया है। अब यह राज्यों के ऊपर निर्भर करता है कि वह सिफारिशों पर अमल करें। 

उनका कहना है कि महाराष्ट्र के रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों में कई पर्यावरणीय चिंताओं हैं जिन पर ग्राम सभा में स्थानीय स्तर पर चर्चा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा 'केरल में इस मानसून के दौरान आई आपदा इंसानों की ही देन है और इसके पीछे वजह अवैध निर्माण और अधिक खनन है। 


उन्होंने कहा कि अगर लोग झूठे प्रचार का शिकार नहीं होते और रिपोर्ट पर सही से ध्यान दिया गया होता तो आज केरल इस त्रासदी का शिकार नहीं होता। लेकिन अब आगे का रास्ता बिल्कुल साफ है। लोगों को अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए पर्यावरण के खिलाफ होने वाली गतिविधियों का विरोध करना होगा, जिससे राज्य विकास के रास्ते पर आग बढ़ सके।

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