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लोकसभा, विधानसभा चुनावों में उम्मीदवारों के लिए खर्च सीमा के लिए राजनीतिक दलों से चुनाव आयोग ने मांगा सुझाव

Sun, 13 Dec 2020 03:12 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 13 Dec 2020 03:12 AM IST
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EC panel asks political parties about poll expenditure limit for candidates in Loksabha and assembly polls
Election commission - फोटो : Facebook

चुनाव आयोग ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उम्मीदवारों के लिए खर्च की सीमा को लेकर मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पार्टियों से सुझाव मांगा है।

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आयोग ने सात दिसंबर को भेजे पत्र में विभिन्न पार्टियों से कहा है कि वे भविष्य में होने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उम्मीदवारों के लिए चुनाव खर्च की सीमा के बारे में अपने विचार और सुझाव भेजें।
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आयोग ने दलों से कहा कि वे खर्च सीमा में संशोधन के लिए अक्तूबर में गठित समिति के नोडल अधिकारी को अपने विचार भेजें। उम्मीदवारों के लिए चुनाव अभियान में खर्च करने की सीमा होती है लेकिन राजनीतिक दलों पर ऐसी कोई पाबंदी नहीं होती है।
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समिति को मतदाताओं की संख्या में वृद्धि और खर्च मुद्रास्फीति सूचकांक बढ़ने के मद्देनजर लोकसभा और विधानसभा चुनावों के उम्मीदवारों के लिए खर्च की सीमा में संशोधन के विषय पर गौर करने का जिम्मा सौंपा गया है।

उम्मीदवारों के लिए खर्च सीमा आखिरी बार 2014 में संशोधित की गई थी। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लिए यह सीमा 2018 में बढ़ाई गई थी। आयोग ने समिति के गठन की घोषणा करते हुए अक्तूबर में कहा था कि पिछले छह वर्षों में खर्च की सीमा में बढ़ोतरी नहीं की गई जबकि मतदाताओं की संख्या 83.4 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2019 में 91 करोड़ हो गई और अब यह 92.1 करोड़ हो गई है।

हालांकि इस दौरान खर्च मुद्रास्फीति सूचकांक 220 से बढ़कर 2019 में 280 हो गया और अब यह 301 हो गया है। समिति के अगले साल अपनी रिपोर्ट सौंपने की उम्मीद है। कोरोना वायरस महामारी के बीच चुनाव प्रचार में आने वाली मुश्किलों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अक्तूबर में चुनाव आयोग की सिफारिशों के आधार पर मौजूदा खर्च सीमा को 10 प्रतिशत बढ़ा दिया था। दस प्रतिशत की यह वृद्धि बिहार विधानसभा चुनाव और विभिन्न उपचुनावों में लागू थी।

उम्मीदवारों के लिए अधिकतम खर्च सीमा अलग-अलग राज्य में अलग-अलग है यानी बड़े राज्यों में अधिक और छोटे में कम। कानून मंत्रालय के अक्तूबर में जारी अधिसूचना के अनुसार, आंध्र प्रदेश, गुजरात, बिहार और हरियाणा जैसे बड़े राज्यों में लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए उम्मीदवार 77 लाख रुपये खर्च कर सकता है।

अभी तक यह सीमा 70 लाख थी। वहीं विधानसभा चुनाव के लिए अधिकतम खर्च सीमा 28 लाख से बढ़ाकर 30.8 लाख रुपये कर दी गई। आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, झारखंड, तेलंगाना और दिल्ली में लोकसभा चुनाव में प्रचार खर्च की सीमा 77 लाख और विधानसभा चुनाव के लिए 30.8 लाख रुपये है।


मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड और त्रिपुरा में उम्मीदवार लोकसभा चुनाव के लिए 77 लाख रुपये और विधानसभा चुनाव के लिए 22 लाख रुपये खर्च कर सकते हैं। अरुणाचल प्रदेश, गोवा, सिक्किम, अंडमान निकोबार, चंडीगढ़, दादर और नगर हवेली, दमन एवं दीव, लक्षद्वीप, पुडुचेरी और लद्दाख में प्रत्याशी लोकसभा चुनाव में 59.4 लाख रुपये और विधानसभा चुनाव के लिए 22 लाख रुपये खर्च कर सकते हैं। 

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