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EC: देश में एक साथ चुनाव हुए तो ईवीएम-वीवीपीएटी की खरीद में खर्च होंगे 9300 करोड़ रुपये, चुनाव आयोग आंकी कीमत

Sat, 02 Sep 2023 10:55 PM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 02 Sep 2023 10:55 PM IST
सार

चुनाव आयोग ने एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराने के लिए अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें और पेपर-ट्रेल मशीनें खरीदने की लागत लगभग 9,300 करोड़ रुपये आंकी।

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EC had once pegged cost for procuring additional EVMs VVPATs for simultaneous polls at nearly Rs 9300 cr
ईवीएम-वीवीपैट (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

इन दिनों देश में एक राष्ट्र, एक चुनाव को लेकर बहस छिड़ी हुई है। कई पार्टियां इसके समर्थन में है तो कई पार्टियां इसके विरोध में हैं। लेकिन इससे इतर सोचा जाए तो एक साथ चुनाव होते हैं तो सुरक्षा संबंधी चीजों को देखना होगा साथ ही इतनी बड़ी संख्या में ईवीएम-वीवीपीएटी की खरीद भी होगी, जिसको लेकर कई विशेषज्ञ इस पर अपनी राय जाहिर कर चुके हैं। वहीं, चुनाव आयोग ने एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराने के लिए अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें और पेपर-ट्रेल मशीनें खरीदने की लागत लगभग 9,300 करोड़ रुपये आंकी थी।

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पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के नेतृत्व में गठित उच्च स्तरीय समिति के समक्ष एजेंडे में से एक लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के एक साथ चुनाव कराने के लिए आवश्यक साजो-सामान की जांच करना है। इस अभ्यास के तहत आवश्यक अतिरिक्त ईवीएम और कर्मियों की जांच की जाएगी। 
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कानून और कार्मिक विभाग से संबंधित स्थायी समिति दिसंबर 2015 में "लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव कराने की व्यवहार्यता" पर एक रिपोर्ट लेकर आई थी। समिति ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग द्वारा दिए गए सुझावों का हवाला दिया था। 
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रिपोर्ट में कहा गया था कि चुनाव आयोग ने एक साथ चुनाव कराने में आने वाली कई कठिनाइयों की ओर इशारा किया है। इसमें मुख्य मुद्दा यह था कि एक साथ चुनाव कराने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) मशीनों की बड़े पैमाने पर खरीद की आवश्यकता होगी। 

रिपोर्ट में कहा गया था कि एक साथ चुनाव कराने के लिए आयोग को उम्मीद है कि ईवीएम और वीवीपैट की खरीद के लिए कुल 9284.15 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। एक ईवीएम का जीवन 15 वर्ष है और मशीनों को उस अवधि के भीतर बदलने की आवश्यकता होगी जिसके लिए फिर से व्यय करना होगा।

स्थायी समिति ने ईसी के इनपुट का हवाला देते हुए कहा कि इसके अलावा, इन मशीनों के भंडारण से भंडारण लागत में वृद्धि होगी। दो सार्वजनिक उपक्रम - भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड- आरवीएम और वीवीपीएटी का निर्माण करते हैं।


जबकि चुनाव आयोग को संसदीय और विधानसभा चुनाव कराने का अधिकार है, राज्य चुनाव आयोग को स्थानीय निकाय चुनाव कराने का अधिकार है। ईसी और एसईसी संविधान के तहत एक निर्धारित अधिदेश के साथ अलग-अलग निकाय हैं।

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