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तेजी से खिसक रहा है धरती का चुंबकीय क्षेत्र, वर्ल्ड मैग्नेटिक मॉडल में आई खराबी
Sat, 19 Jan 2019 06:41 AM IST
Gaurav Pandey
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Gaurav Pandey
Updated Sat, 19 Jan 2019 06:41 AM IST
सार
- धरती के भौगोलिक व चुंबकीय ध्रुवों के अंतर की गणना के आधार पर कार्य करता है जीपीएस
- वैज्ञानिकों ने वर्ल्ड मैग्नेटिक मॉडल के नए अपडेट की तैयारी की, 30 जनवरी को होगा अपडेट
- हर पांच साल पर अपडेट किया जाता है डब्ल्यूएमएम, पिछला अपडेट 2015 में हुआ था
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विस्तार
धरती के भौगोलिक और चुंबकीय ध्रुवों के अंतर की सटीक गणना से जीपीएस काम करता है लेकिन पृथ्वी का चुंबकीय उत्तरी ध्रुव बड़ी तेजी से खिसक रहा है। इसीलिए वैज्ञानिकों ने वर्ल्ड मैग्नेटिक मॉडल (डब्ल्यूएमएम) के नए अपडेट की तैयारी कर ली है। यह अपडेट 15 जनवरी को होना था लेकिन अमेरिका में कामबंदी के चलते इसमें देरी हो रही है। अब यह अपडेट 30 जनवरी को होना तय हुआ है।
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वैज्ञानिक पत्रिका ‘नेचर’ में वैज्ञानिकों ने डब्ल्यूएमएम के अपडेट की सबसे बड़ी वजह पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में तेजी से आ रहे बदलाव को ही बताया है। दरअसल भौगोलिक उत्तरी ध्रुव और चुंबकीय उत्तरी ध्रुव में अंतर होता है। भौगोलिक ध्रुव हमेशा अपनी जगह पर बना रहता है जबकि चुंबकीय ध्रुव लगातार खिसकता रहता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक पृथ्वी के गर्भ में होने वाली हलचलों का असर चुंबकीय क्षेत्रों पर पड़ता है।
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धरती के भीतर लोहे के बहाव का इस पर सीधा असर पड़ता है। वैज्ञानिकों को फिलहाल यह नहीं पता है कि चुंबकीय क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलाव का सही कारण क्या है। समुद्र की जलधाराएं और धरती के गर्भ का पिघला लोहा भी इस पर असर डालते हैं, लेकिन इतनी तेज रफ्तार से यह परिवर्तन क्यों हो रहा है इस पर अब भी रहस्य बरकरार है।
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डब्ल्यूएमएम में त्रुटियों के कारण नेविगेशन की गलतियां अस्वीकार्य
वर्ल्ड मैग्नेटिक मॉडल यानी डब्ल्यूएमएम को हर पांच साल में अपडेट किया जाता है, जो आखिरी बार यह 2015 में अपडेट हुआ था। लेकिन 2016 में पता चला कि चुंबकीय उत्तरी ध्रुव अनुमान से ज्यादा तेजी से जगह बदल रहा है। 2018 में यूएस नेशनल ओशनिक एंड एटमोस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन और ब्रिटिश जियोलॉजिकल सर्वे के वैज्ञानिकों ने दावा किया कि जल्द ही इसे अपडेट करने की जरूरत है क्योंकि डब्ल्यूएमएम की बढ़ चुकी मौजूदा त्रुटियों के चलते नेविगेशन में आने वाली गलतियां अस्वीकार्य हैं।
जीपीएस तकनीकी पर असर
रोजमर्रा की जिंदगी में हम अक्सर नेविगेशन के लिए जीपीएस तकनीकी का इस्तेमाल करते हैं। हवाई जहाज, समुद्री जहाज और स्मार्टफोन डब्ल्यूएमएम के जरिए ही नेविगेशन को सटीक बनाते हैं। अमेरिकी भू-अंतरिक्ष खुफिया एजेंसी के वैज्ञानिक जेम्स फ्रीडरिष ने बताया कि डब्ल्यूएमएम में तेजी से आने वाला बदलाव जीपीएम तकनीकी पर सीधा असर डालेगा। इससे युद्ध क्षेत्र में सेना, वायुसेना और आम आदमी के मोबाइल का कैमरा व कई एप्स बुरी तरह से प्रभावित हो जाएंगे।
जीपीएस तकनीकी पर असर
रोजमर्रा की जिंदगी में हम अक्सर नेविगेशन के लिए जीपीएस तकनीकी का इस्तेमाल करते हैं। हवाई जहाज, समुद्री जहाज और स्मार्टफोन डब्ल्यूएमएम के जरिए ही नेविगेशन को सटीक बनाते हैं। अमेरिकी भू-अंतरिक्ष खुफिया एजेंसी के वैज्ञानिक जेम्स फ्रीडरिष ने बताया कि डब्ल्यूएमएम में तेजी से आने वाला बदलाव जीपीएम तकनीकी पर सीधा असर डालेगा। इससे युद्ध क्षेत्र में सेना, वायुसेना और आम आदमी के मोबाइल का कैमरा व कई एप्स बुरी तरह से प्रभावित हो जाएंगे।