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त्योहारों में मिठाइयां खाना हो सकता है सेहत के लिए घातक, ट्रांस फैट पैदा कर सकता है मुसीबत

Tue, 15 Oct 2019 06:41 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 15 Oct 2019 06:41 PM IST
सार

  • भारत में प्रति वर्ष 60 हजार लोगों की मौत हार्ट अटैक और रक्तवाहिकाओं संबंधी बीमारियों से होती है
  • वर्ष 2022 तक ट्रांस फैट का स्तर दो फीसदी से कम करना लक्ष्य

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During festival season Trans fat food could be dangerous for your health, be cautious
इंदौरी खाना (फाइल) - फोटो : Social Media

विस्तार

नवरात्र और दशहरा के बाद अब दीपावली सबसे बड़ा त्यौहार है। इस मौसम में न चाहते हुए भी हम ज्यादा मिठाई और तैलीय चीजें खा जाते हैं, जो वजन बढ़ने का कारण बनते हैं। लेकिन सबसे बड़ी समस्या इन खाद्य पदार्थों को बनाने में इस्तेमाल होने वाले तेलों में पाए जाने वाले ट्रांस फैट से होती है, जो रक्त नलिकाओं में वसा जमने के कारण बनते हैं। इसकी वजह से लोगों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक की जानलेवा समस्या होती है।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक अकेले भारत में प्रति वर्ष 60 हजार लोगों की मौत हार्ट अटैक या रक्तवाहिकाओं संबंधी बीमारियों के कारण हो जाती है। विश्व स्तर पर यह आंकड़ा 5.40 लाख है। इन मौतों के पीछे ट्रांस फैट को सबसे बड़ा कारण माना जाता है।

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वर्ष 2022 तक सुरक्षित स्तर पर लाने का लक्ष्य

एफएसएसएआई (FSSAI) के माध्यम से केंद्र सरकार देश में ट्रांस फैट का इस्तेमाल घटाने पर लगातार काम कर रही है। लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि वर्ष 2022 तक औद्योगिक उत्पादों में ट्रांस फैट के इस्तेमाल का स्तर दो फीसदी से कम किया जाए। इसके लिए अनेक कार्यक्रम चलाकर लोगों को जागरुक भी किया जा रहा है। देश में केरल अकेला ऐसा राज्य है जिसने अपने स्तर पर ट्रांसफैट का उपयोग सबसे कम करने का लक्ष्य तय किया है।

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वहीं घरेलू स्तर पर लोगों को जागरुक करके ट्रांस फैट के खतरों के प्रति जागरुक किया जा रहा है। महिलाओं की जागरुकता इस लक्ष्य को प्राप्त करने में सबसे ज्यादा सहायक हो सकती है, इसलिए महिला केंद्रित मुहिम चलाने का लक्ष्य भी रखा गया है।
 
जो कंपनियां ट्रांस फैट रहित तेल का उपयोग करके खाद्य पदार्थ बनाती हैं और औद्योगिक ट्रांस फैट का उत्पादन 0.2 ग्राम प्रति सौ ग्राम से अधिक नहीं होता है, उन्हें अपने उत्पादों पर 'ट्रांस फैट' फ्री लिखने और इसका लोगो इस्तेमाल करने की छूट दी गई है। अभी यह स्वैच्छिक स्तर पर है। लेकिन जिन कंपनियों के उत्पाद पर 'ट्रांस फैट' लिखा होगा, उनके उत्पादों की गुणवत्ता की निगरानी करने पर विचार किया जा रहा है।    

क्या होता है ट्रांसफैट?

वनस्पति तेलों में उच्च तापमान पर हाइड्रोजन गैस प्रवाहित करने के बाद तेलों में रासायनिक परिवर्तन होता है। इस विधि के कारण तेलों में ज्यादा ठोस गुण पैदा होता है, जो इसके रखरखाव को आसान बनाता है। दावा किया जाता है कि इन ट्रांसफैट से बने खाद्य पदार्थ अपेक्षाकृत ज्यादा समय तक सुरक्षित रखे जा सकते हैं। लेकिन इसी प्रक्रिया में तेलों में ट्रांसफैट के गुण भी उत्पन्न होते हैं, जो शरीर को ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं।

ये है ज्यादा नुकसानदेह

मेट्रो अस्पताल के कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टर पुनीत गुप्ता ने कहा कि ट्रांसफैट स्वयं ही स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होते हैं, लेकिन जब किचन में एक ही तेल को बार-बार गर्म करके इस्तेमाल किया जाता है, तो इसमें रासायनिक परिवर्तन होते हैं, जो तेल को ज्यादा नुकसानदेह बनाते हैं। बाजार के समोसे इत्यादि खाना इसी वजह से ज्यादा नुकसानदेह होता है क्योंकि बाजार में एक ही तेल में बार-बार गर्म करके उन्हें बनाया जाता है। 

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