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दुबई में कालाधन ठिकाने लगाने वाले हो जाएं सावधान

Tue, 14 Mar 2017 06:14 PM IST
amarujala.com- Presented by : अजय कुमार सिंह
amarujala.com- Presented by : अजय कुमार सिंह Updated Tue, 14 Mar 2017 06:14 PM IST
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dubai prepares to change tax laws indians scramble to hide undeclared wealth

पीएम नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार कालेधन पर सख्ती तो दिखाई रही है, अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी पीएम मोदी की इस मुहिम में साथ देने जुट गया है। इसलिए कई भारतीय अपनी अघोषित संपत्ति को लेकर बेचैन हैं और उसे ठिकाने लगाने में जुट गए हैं।

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कालेधन वालों में इसलिए बेचैनी हैं, क्योंकि जनवरी 2018 तक यूएई अपने बैंकों में इंडियन के अकाउंट्स के जानकारी भारत सरकार को साझा करने लगेगा। गौरतलब है कि खाड़ी देश में भारतीयों के लिए अपनी अघोषित संपत्ति ठिकाने लगाने के लिए मुफीद जगह मानी जाती है।
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इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, विदेशी बैंक अकाउंट की सूचना नहीं देनेवाले कई भारतीय कार्रवाई से बचने के लिए 'इंश्योरेंस रैपर्स' की मदद ले रहे हैं। वैसे भी अब यूएई के बैंक ज्यादा छानबीन करने लगे हैं। ऐसे में अघोषित संपत्ति वालों में डर पैदा हो गया है।  कंपनियों के लिए अकाउंट्स खोलने के लिए दुबई के बैंक भारत की टैक्स आईडी, पासपोर्ट की कॉपियां और कभी-कभार इन कंपनियों में भारतीय शेयरहोल्डरों की मौजूदगी के प्रमाण मांगने लगे हैं। 
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इकोनॉमिक टाइम्स ने विदेशी मुद्रा विनियमों के विशेषज्ञ के हवाले से बताया है कि बैंक अकाउंट्स खोलने के लिए पहले 3-4 दिन का समय लिया जाता था। वहीं अब एक महीने से भी ज्यादा का वक्त बैंक वाले ले रहे हैं।

अघोषित आय को छिपाने की कार्यप्रणाली में आरबीआई से स्वीकृत उस उदार प्रेषण मार्ग (लिबरलाइज्ड रेमिटैंस रूट) का इस्तेमाल कर मौजूदा शेल कंपनियों के शेयर खरीदना शामिल है जिसमें भारतीयों को विदेश की संपत्ति और सिक्यॉरिटीज में सालाना 2,50,000 डॉलर (करीब 1.65 करोड़ रुपये) निवेश कर बाद में कंपनी के बैंक अकाउंट पर टैक्स छूट पाने की व्यवस्था है।

इकनॉमिक टाइम्स ने तीन सीनियर फाइनैंस प्रफेशनल्स से बातचीत के हवाले से लिखा है कि ऐसी कंपनियों के असली स्वामित्व को छिपाने के लिए ज्यादा-से-ज्यादा नॉमिनी डायरेक्टरों का इस्तेमाल किए जाते हैं।  काला धन छिपाने के जिन अन्य रास्तों का सहारा लिया जाता है, उनमें इंश्योरेंस भी शामिल हैं। ऐसे ट्रस्टों की तरह ही लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी ली जाती है जिन्हें आसानी से बनाया और खत्म किया जा सकता है।

इसकी प्रक्रिया भी बहुत आसान है। नॉमिनी या टेक्निकल ऑनर बीमा पॉलिसियों में निवेश करते हैं, लेकिन फायदा वास्तविक मालिक को होता है। असली मालिक तय अवधि के बाद रकम प्राप्त कर लेता है या मृत्यु अथवा अप्रत्याशित परिस्थितियों की आशंका में उसके परिवार को इसका फायदा मिलता है।'

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