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रिया-दीपिका के व्हाट्सएप चैट सार्वजनिक होने से खुली गोपनीयता की पोल
Sat, 26 Sep 2020 09:45 AM IST
Sneha Baluni
अमर उजाला, रिसर्च टीम, नई दिल्ली
अमर उजाला, रिसर्च टीम, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Sat, 26 Sep 2020 09:45 AM IST
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दीपिका पादुकोण-रिया चक्रवर्ती (फाइल फोटो)
- फोटो : Instagram
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अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के पीछे ड्रग एंगल को खंगाल रही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की पूछताछ के दौरान कई बॉलीवुड हस्तियों के व्हाट्सएप चैट लगातार सामने आ रहे हैं। पहले सुशांत की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती और अब जानी-मानी अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के व्हाट्सएप पर ड्रग मंगाने के संदेशों से पूरा देश रूबरू हो चुका है।
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टीवी चैनलों पर दिनभर लीक होने वाले निजी संदेश व्हाट्सएप के उस दावे की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं, जिसमें वह कहता रहा है कि उसके किसी भी यूजर के संदेश को कोई पढ़ ही नहीं सकता, खुद व्हाट्सएप भी नहीं। यानी व्हाट्सएप पर दो लोगों के बीच होने वाली बातचीत पूरी तरह से एनक्रिप्टेड होने का दावा खोखला साबित हो चुका है। साथ ही प्राइवेसी नीति का हवाला देते हुए यूजर का डाटा इकट्ठा न करने की पोल भी सुशांत सिंह प्रकरण में खुल चुकी है।
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साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, व्हाट्सएप की डाटा सुरक्षा नीति में अनेक झोल हैं। मोबाइल फोन से यदि व्हाट्सएप की चैट डिलीट हो जाए तो भी उसे साइबर तकनीक से हासिल किया जा सकता है। ऐसे में भारत में 40 करोड़ से ज्यादा व्हाट्सएप यूजर्स के दिमाग में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर उनकी बातचीत या संदेश कितने सुरक्षित हैं?
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विशेषज्ञ बोले- व्हाट्सएप की सुरक्षा नीति में कई झोल, डिलीट चैट भी हो सकते हैं रिकवर
वैसे तो ताजा घटनाक्रम में व्हाट्सएप ने अपने बचाव में कह दिया है कि उसके किसी भी ग्राहक को कोई खतरा नहीं है। उनकी चैट किसी भी तीसरे पक्ष तक नहीं पहुंच सकती। लेकिन साइबर मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि व्हाट्सएप के यह कह देने भर से नहीं माना जा सकता। व्हाट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी के अनुसार, आमतौर पर कंपनी यूजर्स के संदेश स्टोर नहीं करती। आपस में संदेश डिलीवर होते ही वह उसके सर्वर से डिलीट हो जाता है। लेकिन कुछ अंतरराष्ट्रीय साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, हकीकत में कोई भी थर्ड पार्टी व्हाट्सएप संदेशों को गैरकानूनी या कानूनी, दोनों तरीकों से हासिल कर सकती है।
मोबाइल फोन से मिल रही चैटिंग सीधे मीडिया तक
बॉलीवुड में ड्रग की खबरों के खुलासे से यह लग रहा है कि यह जानकारी जांच एजेंसियों को मोबाइल फोन से मिली, जिसे अब मीडिया में फैलाया जा रहा है। साइबर मामले के वकील विराग गुप्ता का कहना है की आपराधिक जांच के दौरान सबूतों को मीडिया को दिया जाना सीआरपीसी के साथ सुप्रीम कोर्ट के अनेक फैसलों का उल्लंघन है।
सोशल मीडिया कंपनियों पर डाटा के कारोबार का आरोप
आजकल अंग्रेजी में कहा जाता है- डाटा इज न्यू ऑयल। यानी जिसके पास डाटा वो मालामाल। कुछ जानकारों के मुताबिक, सोशल मीडिया कंपनिया किसी समाजसेवा के क्षेत्र में नहीं हैं। वे डाटा का व्यापार कर रही हैं। उनके लिए हरेक इंसान कमोडिटी है, जिससे वे कमाना चाहती हैं। जो व्हाट्सएप कह रहा है, उसके शब्दों पर आंख बंद करके भरोसा नहीं किया जा सकता। व्हाट्सएप खुद यूजर द्वारा उसके इस्तेमाल और चैटिंग परफॉर्मेंस पर नजर रखता है।