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पश्चिम बंगाल में ड्रोन रखेगा अफीम के खेती पर नजर

Sat, 15 Oct 2016 04:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कोलकाता
ब्यूरो/अमर उजाला, कोलकाता Updated Sat, 15 Oct 2016 04:05 AM IST
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 Drone will monitor afeem farms
Xiaomi drone
अफीम के खेती के लिए कुख्यात मालदा में अब पुलिस व प्रशासन ड्रोन की सहायता से अफीम की पैदावार वाले इलाकों पर निगाह रखने की योजना बना रहा है। इसके जरिए इस साल अफीम के उत्पादन का सीजन शुरू होने से पहले ही ऐसे इलाकों की पहचान की जाएगी जहां इसकी ज्यादा पैदावार होती है। सरकारी सूत्रों ने यहां इसकी जानकारी दी।
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सूत्रों का कहना है कि अफीम का उत्पादन अगले पखवाड़े से शुरू हो जाएगा। मालदा पुलिस का कहना है कि ड्रोन के बिना अफीम के उत्पादन वाले इलाकों की शिनाख्त करना संभव नहीं है। बीते कुछ वर्षों के दौरान मालदा जिले के कालियाचक व बैष्णव नगर थाना इलाकों में खसखस की खेती तेजी से बढ़ी है। लेकिन स्थानीय लोगों की ओर से कोई सहायता नहीं मिलने की वजह से पुलिस के इस पर अंकुश लगाना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। इसलिए अब पुलिस ऐसे इलाकों के हवाई सर्वेक्षण की योजना बना रही है। इसी को सुखा कर अफीम बनाई जाती है। हेरोइन भी इसी से बनती है। इलाके में अवैध पोस्ता उत्पादन सरकार के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि खसखस की खेती और नशीली दवाओं की तस्करी से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल अक्सर आतंकी गतिविधियों को सहायता देने के लिए किया जाता है।
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इस साल जनवरी में कालियाचक थाने पर हुए हमले के पीछे अफीम ही मुख्य वजह थी। खसखस के पौधों को छिपाने के लिए स्थानीय लोग उसके आसपास मक्के या गन्ने की खेती करते हैं। ऐसे में खसखस के पौधों की तलाश करना कठिन है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि ड्रोन की सहायता से मिलने वाली तस्वीरों से ऐसे इलाकों की आसानी से शिनाख्त की जा सकती है। इस साल पुलिस और दूसरी एजेंसियों ने इलाके में लगभग दो हजार हेक्टेयर अफीम के खेतों को नष्ट कर दिया था। बावजूद इसके नशीली दवाओं के धंधे पर कोई अंकुश नहीं लग सका है।
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पुलिस अधीक्षक अर्णब घोष ने बताया कि नवंबर के आखिर से अफीम का उत्पादन शुरू होता है। इसलिए सरकार को ड्रोन कैमरे भेजने का प्रस्ताव दिया गया है ताकि ऐसे इलाकों की पहचान कर अफीम के खेती पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।
 
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