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Corbevax: बायोलॉजिकल ई के कोर्बेवैक्स टीके के विकास में डॉ. डैंग्स लैब ने निभाई अहम भूमिका, अनुमति का किया स्वागत

Wed, 29 Dec 2021 07:04 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 29 Dec 2021 07:04 PM IST
सार

डॉ. डैंग्स लैब के सीईओ डॉ. अर्जुन डैंग ने कहा है कि बायोलॉजिकल ई के मेड इन इंडिया कोरोना रोधी टीके के परीक्षण के तीनों चरणों के ट्रायल के दौरान लैब ने केंद्रीय लैब की भूमिका निभाई।

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Dr Dangs Lab conducted tests in all three trial phases of Corbevax Corona vaccine of Biologiocal E
बायोलॉजिकल ई का कोर्बेवैक्स टीका - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने मंगलवार को कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ दो और टीकों और एक एंटी वायरल दवा को आपातकालीन उपयोग की अनुमति दे दी थी। इनमें एक भारतीय कंपनी बायोलॉजिकल ई का कोर्बेवैक्स और दूसरा अमेरिकी कंपनी नोवावैक्स का कोवोवैक्स शामिल है।

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डॉ. डैंग्स लैब के सीईओ डॉ. अर्जुन डैंग ने बुधवार को इस निर्णय का स्वागत किया और कहा कि कोर्बेवैक्स टीके को लेकर सेंट्रल लैब के तौर पर हम इस यात्रा का हिस्सा बन कर गर्व महसूस कर रहे हैं। डॉ. अर्जुन ने कहा, 'डॉ. डैंग्स लैब में कोर्बेवैक्स टीके के तीनों चरणों के ट्रायल में स्क्रीनिंग और सुरक्षा व इम्यूनोजेनेसिटी टेस्ट हुए।'
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कोर्बोवैक्स है तीसरी मेड इन इंडिया कोविड वैक्सीन
उन्होंने कहा कि हमारी लैब में हर क्षेत्र के प्रख्यात विशेषज्ञ हैं जिन्होंने सुरक्षित और प्रभावी कोविड-19 वैक्सीन के लिए गुणवत्तापूर्ण और समय से काम किया। बता दें कि कोर्बेवैक्स तीसरी मेड इन इंडिया वैक्सीन है। इससे पहले देश में भारत बायोटेक के कोवाक्सिन टीके और जायडस कैडिला के जायकोव-डी कोरोना रोधी टीके को अनुमति दी जा चुकी है। 
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स्वदेश में विकसित पहला प्रोटीन आधारित टीका
कोर्बेवैक्स पहला स्वदेश में विकसित प्रोटीन आधारित टीका है। यानी कि इसे बनाने के लिए कोरोना वायरस पर मौजूद स्पाइक प्रोटीन के चुनिंदा अंशों का इस्तेमाल किया गया है। खास बात यह है कि बायोलॉजिकल ई ने अब तक कोर्बेवैक्स कोरोना वैक्सीन की प्रभाविता से जुड़ा कोई डाटा जारी नहीं किया है।


दो से आठ डिग्री तापमान के बीच रखा जा सकता है
बता दें कि प्रोटीन आधारित टीकों को दो से आठ डिग्री सेल्सियस तक तापमान पर रखा जा सकता है। जिससे इन्हें भारत और अफ्रीका जैसे देशों में दूर-दराज के स्थानों तक पहुंचाना काफी आसान होगा। यह टीका भारत में पूर्ण टीकाकरण के साथ बूस्टर डोज की जरूरतों को पूरा करने में अहम साबित हो सकती है।

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