सांसद अपने इलाके का ऐसे कर सकते हैं कायाकल्प, पूर्व महिला आईएएस ने किताब लिख बताया तरीका
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'सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास' लोकसभा चुनाव जीतने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह नया नारा दिया है। हालांकि इसमें 'सबका साथ-सबका विकास' नारा मोदी पहले दे चुके हैं। इस बार उन्होंने इसमें 'सबका विश्वास' शब्द जोड़ दिया है। यह नारा जमीनी स्तर पर तभी चरितार्थ हो सकेगा, जब सभी सांसद अपने क्षेत्र के लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरें। बहुत से ऐसे सांसद भी हैं जो पहली बार चुनकर आए हैं। ये सभी जनप्रतिनिधि अपने निर्वाचन क्षेत्र का कायाकल्प किस तरह कर सकते हैं, इस विषय पर पूर्व महिला आईएएस अधिकारी डॉ. अरुणा (लिमये) शर्मा ने एक किताब लिख दी है। इस किताब में बहुत ही सरल भाषा एवं सामान्य भाव से यह बताया गया कि जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्र की तस्वीर बदल सकते हैं। इसके लिए न तो अतिरिक्त बजट चाहिए और न ही संसाधन। मौजूदा व्यवस्था में यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
बता दें कि डॉ. अरुणा, मध्यप्रदेश काडर की 1982 बैच की आईएएस अधिकारी रही हैं। वे पिछले साल भारत सरकार के स्टील महकमे में बतौर सचिव पद से रिटायर हुई हैं। इससे पहले वे इलेक्ट्रॉनिक एंड इंफॉरमेशन टेक्नालॉजी विभाग की सचिव रही थीं। उन्होंने मध्यप्रदेश में भी कई उच्च पदों पर काम किया है। जन प्रतिनिधियों के लिए उन्होंने जो किताब लिखी है, उसका नाम ‘आप अपने निर्वाचन क्षेत्र का किस तरह कर सकते हैं कायाकल्प, है।
दो महीने में समझ सकते हैं विकास प्रक्रिया
मंगलवार को उन्होंने अमर उजाला डॉट कॉम के साथ खास बातचीत की। डॉ. अरुणा कहती हैं, यह देखने में आया है कि जनप्रतिनिधियों को अपने निर्वाचन क्षेत्र के विकास और प्रगति के लिए विभिन्न स्तरों पर योजना बनाने, उसे अमल में लाने व उसकी प्रगति पर नजर रखने में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। चुनाव जीतने के बाद उनके सामने सबसे पहली चुनौती यह होती है कि अपने निर्वाचन क्षेत्र के लिए उन्होंने जो वादे किए हैं, उन्हें कैसे पूरा किया जाए।
कई बार जनप्रतिनिधियों को यह असमंजस रहता है कि शुरुआत कहां से हो। यह भी ध्यान रखना है कि सभी जगहों पर समान रूप से विकास हो और वह भी तय समय में। आपने देखा होगा, मीडिया में कई बार ये रिपोर्ट छपती है कि फलां इलाके के एमपी अपनी सांसद विकास निधि का इस्तेमाल नहीं कर पाए। इतने सांसदों की विकास निधि का पैसा वापस चला गया। सांसद, विधायक, पार्षद और सरपंच, इस किताब की मदद से केवल दो माह में अपने क्षेत्र की विकास प्रक्रिया को समझ सकते हैं।
सांसद और विधायक बना सकते हैं अपने क्षेत्र का विकास चार्ट
डॉ. अरुणा के मुताबिक, इस किताब में बहुत ही सामान्य भाव से यह बताया गया है कि कोई भी सांसद या विधायक खुद ही अपने क्षेत्र का विकास चार्ट तैयार कर सकता है। जनप्रतिनिधि प्राथमिकता के आधार पर अपने लक्ष्य निर्धारित कर सकते हैं। 127 पन्नों वाली इस किताब में कुल सात अध्याय हैं।
पहले अध्याय में स्मार्ट गांव या मोहल्ला बनाने का प्रयास, दूसरे अध्याय में 'अभाव को कम करने के लिए नई विधि, हमें परिणाम चाहिए'; तीसरे अध्याय में 'अभिसरण विधि, दुष्चक्र से सु-चक्र तक', चौथे में समग्र परिवार डाटाबेस का निर्माण, पांचवें में 'कायम रहने वाली आजीविका-न्यूनतम वेतन से आधिक्य तक', छठे अध्याय में समृद्धि कार्यप्रणाली, समृद्धि के लिए गतिशील चक्र और सातवें अध्याय में 'आप समावेशी विकास के लिए, एक गेम चेंजर हैं', शामिल हैं।
इन अध्यायों में सभी विषयों को समेटा गया है। स्वास्थ्य और शिक्षा से लेकर खेती किसानी व और सड़क परिवहन, सब पर कैसे काम होगा, यह जानकारी विस्तृत रूप से दी गई है। डॉ अरुणा बताती है कि किताब को लेकर जल्द ही वे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मिलेंगी।