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जम्मू-कश्मीर: कहीं पत्थरबाज तो नहीं कर रहे टारगेट किलिंग, अब रसूखदार भी हैं जांच एजेंसी के निशाने पर 

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 20 Oct 2021 10:25 PM IST
सार

घाटी में पत्थरबाजी के चलते जिन युवाओं के खिलाफ केस दर्ज हुए थे, अब उनकी फाइलें दोबारा से खोली जा रही हैं। कश्मीर में 'पिस्टल' की मदद से जिस तरह सिविलियन को मारा गया है, उससे जांच एजेंसियों के सामने कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं। क्या 'टारगेट किलिंग' का टास्क लोकल युवाओं को दिया गया है, जांच एजेंसियां इस प्वाइंट को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रही हैं। 

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Doubts On stone pelters in Jammu and Kashmir target killing case investigation agency Search Operations Are On Latest News Update
फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में एनआईए द्वारा बड़े पैमाने पर छापेमारी की जा रही है। जांच एजेंसी के निशाने पर आतंकी संगठन और उनके मददगार हैं। खासतौर पर वे आतंकी संगठन, जिन्हें हाल ही के दिनों में नया नाम दिया गया है। ये आतंकी संगठन कश्मीर में हुई 'टारगेट किलिंग' के अलावा सुरक्षा बलों के साथ हो रही मुठभेड़ की जिम्मेदारी भी ले रहे हैं। जांच एजेंसी से जुड़े सूत्र बताते हैं कि इस बार 'रसूखदार' नहीं बचेंगे। 

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घाटी में पत्थरबाजी के चलते जिन युवाओं के खिलाफ केस दर्ज हुए थे, अब उनकी फाइलें दोबारा से खोली जा रही हैं। कश्मीर में 'पिस्टल' की मदद से जिस तरह सिविलियन को मारा गया है, उससे जांच एजेंसियों के सामने कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं। क्या 'टारगेट किलिंग' का टास्क लोकल युवाओं को दिया गया है, जांच एजेंसियां इस प्वाइंट को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रही हैं। 
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आतंकियों द्वारा कश्मीर के विभिन्न इलाकों में निर्दोष लोगों की हत्या किए जाने के बाद सीआरपीएफ के डीजी एवं एनआईए महानिदेशक का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे कुलदीप सिंह घाटी में मौजूद हैं। एनआईए ने बुधवार को घाटी में 11 जगहों पर छापेमारी की है। श्रीनगर, बारामुला, सोपोर, पुलवामा व कुलगाम आदि इलाकों में कई लोगों से पूछताछ की जा रही है। एनआईए, आतंकियों से जुड़े विभिन्न मामलों की जांच पहले से ही कर रही है, अब उसे सिविलियन की हत्या वाले केस भी दे दिए गए हैं। जांच एजेंसी का फोकस आतंकियों के मददगारों को ढूंढ निकालना है। जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक शीर्ष अधिकारी ने यह बात स्वीकार की है कि सिविलियन और नॉन लोकल को मारने के लिए बड़े एवं प्रोफेशनल आतंकी संगठनों ने खुद सामने आने की बजाए अपने ओवरग्राउंड वर्कर को आगे कर दिया है। 
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जांच एजेंसी के अनुसार, पिछले कुछ माह में एकाएक आधा दर्जन नए आतंकी संगठन, घाटी में देखे गए हैं। पीपुल्स एंटी फासिस्ट फ्रंट ने तो सेना के साथ मुठभेड़ होने का दावा किया है। इसी तरह के आतंकी समूह 'हरकत 313' को उरी क्षेत्र के जल विद्युत संयंत्रों और दूसरे प्रतिष्ठानों पर हमला करने का टास्क सौंपा गया है। बिहार के दो श्रमिकों को मारने की जिम्मेदारी 'यूनाइटेड लिब्रेशन फ्रंट-जम्मू एंड कश्मीर' ने ली है। 

'गिलानी फोर्स' व 'द रजिस्टेंस फ्रंट ने भी कई हमलों की जिम्मेदारी ली है। सुरक्षा एजेंसियां के मुताबिक, पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए 'लश्कर-ए-तैयबा' और 'जैश-ए-मुहम्मद' जैसे संगठनों के बचे खुचे सदस्यों की अगुवाई में ये छोटे संगठन खड़े कर दिए हैं। इनका कंट्रोल खुफिया एजेंसी, आईएसआई के हाथ में ही रहता है। 

जांच एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, घाटी में आतंकियों को मदद देने वालों की कई परतें हैं। पहली परत में कुछ राजनीतिक लोग भी बताए जा रहे हैं, लेकिन उन पर हाथ डालना आसान नहीं है। यह अलग बात है कि ऐसे नेता सार्वजनिक तौर पर पाकिस्तान के समर्थन में बयानबाजी करते रहते हैं। इस बार जांच एजेंसी ऐसे कई रसूखदारों पर हाथ डाल सकती है। 


दिवंगत सैयद अली गिलानी के संगठन से जुड़े कई लोग जांच एजेंसी के रडार पर हैं। अभी हाल ही में उनके पोते अनीस-उल-इस्लाम को सरकारी सेवा से बर्खास्त किया गया है। घाटी में एकाएक खड़े हुए नए आतंकी संगठनों में कौन लोग शामिल हैं, इस बात का पता लगाने के लिए पूर्व में पत्थरबाजी करने वाले युवाओं की फाइलें दोबारा से खोली जा रही हैं। ये संभावित है कि उन्हें सीमा पार से लोकल रसूखदारों की मदद से 'टारगेट किलिंग' का टास्क सौंपा गया हो। एनआईए के अलावा जम्मू कश्मीर पुलिस भी इस थ्योरी पर काम कर रही है। 

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