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UPI: घरेलू यूपीआई बाजार में खत्म हो सकता है विदेशी फिनटेक कंपनियों का वर्चस्व, संसदीय समिति ने सौंपी रिपोर्ट
Sat, 10 Feb 2024 06:50 AM IST
यशोधन शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Sat, 10 Feb 2024 06:50 AM IST
सार
समिति ने कहा है कि विदेशी फिनटेक कंपनियां, एप, फोनपे और गूगल पे जैसे प्लेटफॉर्म भारतीय यूपीआई क्षेत्र पर हावी हैं। साथ ही, कई फिनटेक कंपनियों का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए भी हो रहा है, जो चिंताजनक है।
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विस्तार
यूपीआई बाजार में घरेलू फिनटेक कंपनियों को बढ़ावा देने व फोनपे और गूगल पे जैसे विदेशी एप का वर्चस्व खत्म हो सकता है। संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी संसदीय समिति ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट में विदेशी फिनटेक एप की अधिक हिस्सेदारी पर चिंता जताई है। घरेलू एप को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है।
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समिति ने कहा है कि विदेशी फिनटेक कंपनियां, एप, फोनपे और गूगल पे जैसे प्लेटफॉर्म भारतीय यूपीआई क्षेत्र पर हावी हैं। साथ ही, कई फिनटेक कंपनियों का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए भी हो रहा है, जो चिंताजनक है। उधर, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम ने अगले साल से यूपीआई लेनदेन की संख्या के आधार पर घरेलू बाजार में फिनटेक एप की हिस्सेदारी अधिकतम 30 फीसदी करने का प्रस्ताव दिया है।
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मनी लॉिन् ड्रंग के लिए इस्तेमाल पर जताई चिंता
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा, कई फिनटेक कंपनियों का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए भी किया जा रहा है। इसे रोकने के लिहाज से विदेशी कंपनियों की तुलना में भारतीय फिनटेक एप पर नियामकीय निगरानी रखना आरबीआई और एनपीसीआई के लिए अधिक व्यवहार्य होगा।
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यूपीआई अच्छा उदाहरण, पर हिस्सेदारी कम
रिपोर्ट में समिति की सिफारिश है कि फिनटेक जगत में घरेलू कंपनियों को बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। स्वदेशी विकसित भीम यूपीआई इसका अच्छा उदाहरण है। हालांकि, यूपीआई बाजार में इसकी हिस्सेदारी बहुत कम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत मेक इन इंडिया पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसलिए, समिति की राय है कि फिनटेक क्षेत्र में घरेलू संस्थाओं को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।