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DOLO-650: दवा का कंपोजिशन बदलने का वह आरोप, जिस पर घिरी ड्रग निर्माता कंपनी, क्या आप की सेहत पर भी पड़ा फर्क?

Mon, 22 Aug 2022 12:47 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 22 Aug 2022 12:47 AM IST
सार

फार्मा एक्सपर्ट्स का मानना है कि कोरोना के दौर में बढ़ती मांग के बीच पैरासिटामॉल बनाने वाली अधिकतर कंपनियां दवा की आपूर्ति करने में सक्षम नहीं हो पाईं। जबकि डोलो-650 सभी जगह उपलब्ध रही और इसका प्रिस्क्रिप्शन तय कराने के लिए डॉक्टरों को 1,000 करोड़ रुपये के गिफ्ट दिए गए।

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DOLO-650 controversy overpricing Tax evasion and Drug Price Control sale jump and bribery allegations during C
डोलो की बिक्री कोरोनाकाल में 289.6 फीसदी बढ़ गई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत में कोरोनावायरस महामारी की पहली और दूसरी लहर के दौरान लोगों को घंटो लाइन में लगकर दवा खरीदते देखा गया। संक्रमण फैलने के डर के बावजूद भीड़ के बीच जिस एक दवा को लेने की होड़ मची थी, वह थी डोलो-650 एमजी की टैबलेट। भारत में तो यह दवा कोरोनावायरस के इलाज का पर्याय बन गई थी। डोलो की लोकप्रियता का आलम यह था कि सोशल मीडिया तक पर इस दवा को लेकर मीम्स बन गए। डोलो की निर्माता कंपनी माइक्रो लैब्स को भी इसकी बिक्री से जबरदस्त फायदा हुआ। 
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हालांकि, 2022 की शुरुआत में कोरोना लहरों के छंटने के बाद जब जांच एजेंसियां फिर से सक्रिय हुईं तो डोलो बनाने वाली कंपनी भी टैक्स में हेराफेरी के मामलों में घिर गई। और अब फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FMRAI) ने आरोप लगाया है कि माइक्रोलैब्स ने डॉक्टरों को एक हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा के मुफ्त उपहार बांटे, ताकि वे मरीजों को डोलो-650 एमजी दवा लेने की सलाह दें। डोलो की निर्माता कंपनी पर लगे इन आरोपों से मामले की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ खुद भी चौंक गए। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि उन्होंने खुद भी यह दवा ली है। 
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर डोलो-650 एमजी दवा है क्या? आखिर क्यों पैरासिटामॉल के अन्य ब्रांड्स के मुकाबले डोलो और ज्यादा लोकप्रिय हो गई? डोलो निर्माताओं पर जो आरोप लगे हैं, उसके आम ग्राहकों पर किस तरह फर्क पड़ा? आखिर कंपनी ने दवा की कंपोजिशन (संयोजन) बदलकर किस तरह फायदा उठाया? 
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डोलो-650 एमजी है क्या?

डोलो 650 एमजी अलग-अलग औषधियों के कॉम्बिनेशन से तैयार दवा है। सीधे शब्दों में यह पैरासिटामॉल की ही 650 मिलिग्राम की डोज है। यह एक एंटीपायरेटिक और एनलजेसिक है। सीधे शब्दों में कहें तो यह दवा पेनकिलर और बुखार को दूर करने का काम करती है। यह एक ओवर द काउंटर (ओटीसी) ड्रग है, जिसे दुकान से बिना किसी डॉक्टर की सलाह के लिया जा सकता है। हालांकि, भारत में बिकने वाली ज्यादातर ब्रांड्स की पैरासिटामॉल 500 मिलीग्राम सॉल्ट फॉर्मूले के साथ बिकती हैं। 

पैरासिटामॉल बनाने वाली बाकि ब्रांड्स से लोकप्रिय कैसे हो गई डोलो-650?

चूंकि कोरोनावायरस के अधिकतर केसों में शुरुआती लक्षण बुखार और बदनदर्द से ही जुड़े थे, इसलिए कोरोनाकाल में बुखार से जुड़ी सभी दवाओं की सेल काफी ज्यादा हो गई थीं। मार्केट रिसर्च फर्म AIOCD-AWACS की रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून 2020) और 2021 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून 2021) के बीच पैरासिटामॉल बनाने वाली कंपनियों का राजस्व कुल 138.42 फीसदी बढ़ गया था। इस दौरान जहां ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन की क्रोसिन की सेल 53 फीसदी बढ़ी, वहीं इसी कंपनी की कैलपोल दवा ने 158.9 प्रतिशत ज्यादा बिक्री की। चौंकाने वाली बात यह है कि इसी दौरान डोलो-650 की सेल 289.6 फीसदी ज्यादा हो गई। 

फार्मा एक्सपर्ट्स का मानना है कि कोरोना के दौर में बढ़ती मांग के बीच पैरासिटामॉल बनाने वाली अधिकतर कंपनियां दवा की आपूर्ति करने में सक्षम नहीं हो पाईं। जबकि डोलो-650 सभी जगह उपलब्ध रही। सीबीडीटी ने इसी कड़ी में  आरोप लगाए हैं कि डोलो के निर्माताओं की तरफ से अपनी दवा की जबरदस्त मार्केटिंग और इसका प्रिस्क्रिप्शन तय कराने के लिए डॉक्टरों को 1,000 करोड़ रुपये के गिफ्ट दिए गए। इसी वजह से डोलो-650 पूरे कोरोनाकाल और इसके बाद भी लोगों के बीच लोकप्रिय रही। 

डोलो पर क्यों लग रहे ग्राहकों को धोखा देने का आरोप?

भारत में औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ) के तहत एक फिक्स फॉर्मूले से बनी आवश्यक दवाओं की कीमतें 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' के तहत तय कर दी जाती हैं। यानी कोई भी कंपनी इस कानून के तहत तय की गईं दवाओं की कीमतों को अपनी तरफ से नहीं बढ़ा सकतीं। आवश्यक दवाओं की कीमतें तय करने वाले राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने पैरासिटामॉल की कीमत 2.88 रुपये प्रति टैबलैट तय की है। 

हालांकि, यहां एक पेंच है। पैरासिटामॉल की 500 मिलीग्राम की टैबलेट की कीमतें औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश के तहत सीमित रखी गई हैं। लेकिन इसी दवा की 650 मिलीग्राम की टैबलेट पर डीपीसीओ का नियंत्रण नहीं है। बल्कि दवा कंपनियां 500 एमजी से ऊपर की दवाओं की कीमत खुद ही तय कर सकती हैं। यहीं पर माइक्रोलैब्स जैसी कंपनियों को अपनी डोलो-650 एमजी की कीमत ज्यादा तय करने का मौका मिल गया। जाहिर तौर पर यह एक बड़ी समस्या है। अनुमानों के आधार पर भारत में मौजूदा समय में 80 फीसदी से ज्यादा दवाएं प्राइस कंट्रोल (डीपीसीओ) से बाहर हैं। 

क्या पैरासिटामॉल की ज्यादा डोज वाली दवा लेने से कोई समस्या?

इस बीच एक सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या पैरासिटामॉल की ज्यादा डोज वाली टैबलेट लेने से आम व्यक्ति पर कोई फर्क पड़ सकता है? इस पर डॉक्टरों का कहना है कि एक वयस्क के लिए हर दिन दो ग्राम पैरासिटामॉल की डोज मान्य है। यानी बुखार के दौरान हर दिन 2-3 डोलो खाने से कोई खास नुकसान नहीं होगा। लेकिन पैरासिटामॉल के ज्यादा इस्तेमाल से लिवर खराब होने तक का खतरा रहता है। डोलो-650 को भी लिवर की बीमारियों, गुर्दे की बीमारियों और लगातार शराब पीने वालों को न लेने की सलाह दी जाती है।
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