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पर्सनल लॉ बोर्ड का दखल स्वीकार न करे केंद्र : शाइस्ता अंबर
टीम डिजिटल अमर उजाला
Updated Mon, 25 Dec 2017 04:12 AM IST
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triple talaq
ऑल इंडिया महिला मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर का कहना है कि तीन तलाक के विरोध में सरकार द्वारा बनाए जा रहे कानून व पेश किए गए ड्रॉफ्ट में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करना चाहिए।
ट्रिपल तलाक पर प्रियंका और मायावती बताएं अपना रुख
तीन तलाक की पैरवी करने वाले मुल्ला अब कानून बनने पर तीन तलाक का विरोध करने लगे हैं। इनसे सरकार को पूरी तरह होशियार रहना होगा। बनने वाले कानून में मुस्लिम महिलाओं व संगठनों के विचारों को शामिल करना चाहिए। ऑल इंडिया महिला मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पूरी तरह सरकार के बनाए कानून के साथ है।
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ट्रिपल तलाक पर प्रियंका और मायावती बताएं अपना रुख
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तीन तलाक की पैरवी करने वाले मुल्ला अब कानून बनने पर तीन तलाक का विरोध करने लगे हैं। इनसे सरकार को पूरी तरह होशियार रहना होगा। बनने वाले कानून में मुस्लिम महिलाओं व संगठनों के विचारों को शामिल करना चाहिए। ऑल इंडिया महिला मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पूरी तरह सरकार के बनाए कानून के साथ है।
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कानून बनाने की जल्दबाजी न करे सरकार
लखनऊ तीन तलाक
- फोटो : SELF
बेगम शहनाज सिदरत, अध्यक्ष बज्म-ए-ख्वातीन- तलाक के बाद महिलाओं की मदद के लिए कोई प्रावधान नहीं है। हमारी लड़ाई महिलाओं की मदद के लिए है, उनकी मुश्किलें बढ़ाने के लिए नहीं। एक साथ तीन तलाक देने पर शौहर अगर जेल चला जाएगा तो बीवी को गुजारा भत्ता कैसे मिल पाएगा। हमारी मांग है कि मुस्लिम महिलाओं के अधिकार के बारे में बनाए गए बिल को सरकार जल्दबाजी में पेश न करे। खुली बैठक बुलाकर बिल की खामियों में सुधार किया जाए। इसके बाद उसे पेश करना चाहिए।
पुरुष विरोधी नहीं, इंसाफ पसंद हो बिल
नाइश हसन, महासचिव मुस्लिम वीमेन लीग - तीन तलाक से पीड़ित महिलाओं को इंसाफ दिलाने के लिए हमने बिल की मांग की थी। कानून की नजर में महिला और पुरुष दोनों बराबर हैं। ऐसे में कोई भी कानून पुरुष विरोधी नहीं होना चाहिए। बिल में सुलह की गुंजाइश भी रखनी चाहिए ताकि परिवार टूटे नहीं। वहीं, अगर पति व पत्नी के बीच एक साथ रहने की गुंजाइश नहीं है तो उन्हें आपसी सहमति से तलाक लेने का अधिकार भी होना चाहिए। देश में बेहतरीन कानूनविद और बुद्धिजीवी मौजूद हैं। सरकार उनसे राय लेकर बिल की खामियां दूर कर कानून बनाए। जल्दबाजी में किसी तरह का कानून नहीं बनाना चाहिए।
पुरुष विरोधी नहीं, इंसाफ पसंद हो बिल
नाइश हसन, महासचिव मुस्लिम वीमेन लीग - तीन तलाक से पीड़ित महिलाओं को इंसाफ दिलाने के लिए हमने बिल की मांग की थी। कानून की नजर में महिला और पुरुष दोनों बराबर हैं। ऐसे में कोई भी कानून पुरुष विरोधी नहीं होना चाहिए। बिल में सुलह की गुंजाइश भी रखनी चाहिए ताकि परिवार टूटे नहीं। वहीं, अगर पति व पत्नी के बीच एक साथ रहने की गुंजाइश नहीं है तो उन्हें आपसी सहमति से तलाक लेने का अधिकार भी होना चाहिए। देश में बेहतरीन कानूनविद और बुद्धिजीवी मौजूद हैं। सरकार उनसे राय लेकर बिल की खामियां दूर कर कानून बनाए। जल्दबाजी में किसी तरह का कानून नहीं बनाना चाहिए।