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इस दीवाली सपनों में रंग और कुछ रौशनी भरी इस अंदाज में अमर उजाला ने

Mon, 05 Nov 2018 02:33 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 05 Nov 2018 02:33 PM IST
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diwali celebration with underprivileged children in amar ujala
amar-ujala-ngo - फोटो : amar ujala
नेहा अब 13 साल की हैं। बड़ी होकर वह टीचर बनना चाहती हैं लेकिन पांच साल की उम्र से वह अपने सपनों में रंग भरने के लिए अपनी झुग्गी के आस-पास बनी कोठियों में काम किया करती थीं। नेहा की आंखों में अब अलग सी चमक है...उसके सपनों को अब पंख लग चुके हैं। नेहा पिछले एक साल से न केवल रंग-बिरंगी कलाकृतियां बनानी सीख रही हैं वहीं उसमें रंग भी भरने लगी हैं। नेहा फिलहाल एमीटी स्कूल में तीसरी कक्षा में पढ़ रहे हैं।
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नेहा ही नहीं मुस्कान, सुनीता, पूजा जैसी कई हजारों लड़कियों के सपनों में अब रंग भरने लगे हैं। नेहा मुस्कान और पूजा के सपनों को साकार करने में लगी है वॉयस ऑफ स्लम। इस गैर सरकारी संस्था की खासियत है कि यह स्लम बच्चों द्वारा ही बनाई गई संस्था है।
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अमर उजाला दीवाली उत्सव समारोह में दिल्ली और नोएडा के कई एनजीओ ने भाग लिया। कम्यूनिटी एड एंड स्पांसरशिप प्रोग्राम संस्था की रेणु ने बताया कि उनकी संस्था स्लम में रह रही महिलाओं और बच्चियों को सशक्त करने में जुटी है। संस्था न केवल महिलाओं को कानूनी सलाह देती है बल्कि उन्हें सशक्त बनाने के लिए तरह तरह की ट्रेनिंग भी देती है। अमर उजाला परिसर में आयोजित दीवाली महोत्सव में इन्हीं महिलाओं और बच्चों द्वारा बनाए गए दीये, कैंडल, वॉल हैंगिग, लिफाफे, हटरी, पेंटिंग और डायरी के साथ  स्टॉल लगाया। स्टॉल पर लगातार भीड़ लगी रही। वंचित बच्चों और महिलाओं द्वारा बनाए गए सामानों को खूब पसंद किया गया।
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diwali celebration with underprivileged children in amar ujala
amar-ujala-ngo - फोटो : amar ujala
वॉयस ऑफ स्लम की प्रेसिडेंट चांदनी ने बताया कि वह खुद भी स्लम में ही पली बढ़ी हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल उनकी संस्था 10,000 बच्चों के साथ काम कर चुकी है जिसमें वंचित बच्चों को कंप्यूटर की ट्रेनिंग के साथ साथ, सिलाई, फैशन डिजाइनिंग, डॉक्यूमेंट्री के साथ-साथ कैंडल मेकिंग, वॉल हैंगिग सहित कई तरह की क्राफ्ट की चीजें बनाना सिकाया जाता है।

विजन फॉर ओएसिस वेव्स सोसाइटी संस्था गरीब बच्चों को सिलाई कढ़ाई और फैशन डिजाइनिंग का कोर्स कराया जाता है। संस्था ने माहिरी नाम से प्रोडक्ट लांच किया है। जहां स्लम की बच्चियों को सिलाई सिखाई जाती है और उनके द्वारा बनाए गए कपड़ों को संस्था बेचता है और उससे होने वाली कमाई को दूसरे बच्चों की मदद की जाती है। वॉव्स के मुनीर ने बताया कि संस्था न केवल महिलाओं को स्वाबलंबी बनाने में जुटी है, संस्था उन्हें घरेलू हिंसा से निपटने के लिए कई तरह की कानूनी सलाह भी देता है। 

इन संस्थाओं द्वारा अमर उजाला परिसर में लगाए गए स्टॉल पर लोगों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया। दीयों का सेट खरीद रहे अनंत ने बताया कि दीये और कैंडल उन बच्चों से खरीदना जिन्होंने इसे बनाया है वह अलग अनुभव दे रहा है। वहीं आरती गुप्ता  ने  कहा कि आज तक हम बाजार से दीये खरीदते थे हमें पता नहीं होता था इसे कौन इतना खूबसूरत बना रहा है लेकिन आज जब हम उन बच्चों और उनके लिए काम कर रही संस्था से दीये ले रहे हैं तो लग रहा है इसबार की दिवाली कुछ अलग होने वाली है। 

वहीं स्टॉल पर दियों के सेट खरीद रहे अनिल पांडेय ने कहा कि ये दीये थोड़े अलग हैं।इनमें उन बच्चों की मासूमियत दिखाई दे रही है साथ ही उनके सपनों को रंग भरने में हम थोड़ी सी मदद कर रहे हैं।  
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