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'बापू की हत्या मामले के भगोड़ों को पकड़ने के लिए क्या किया?'
एजेंसी/ नई दिल्ली
Updated Mon, 20 Feb 2017 04:22 AM IST
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केंद्रीय सूचना आयोग ने दिल्ली पुलिस से पूछा है कि महात्मा गांधी हत्याकांड के तीन भगोड़े आरोपियों को पकड़ने के लिए क्या कोशिश की गई। ओडिशा के एक शोधकर्ता हेमंत पांडा की याचिका पर आयोग ने दिल्ली पुलिस से यह जानकारी देने को कहा है। हत्याकांड के तीन आरोपी गंगाधर दहावते, सूर्य देव शर्मा और गंगाधर यादव फरार हो गए थे। इनके बारे में मौजूदा रिकार्ड में कोई जानकारी नहीं है।
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पांडा ने आयोग से कहा कि वह एक शोधकर्ता हैं और वह महात्मा गांधी की हत्या से जुड़े दस्तावेजों का अध्ययन करना चाहते हैं। राष्ट्रीय अभिलेखागार में उन्होंने इस हत्याकांड से जुड़े तमाम दस्तावेजों का अध्ययन किया, लेकिन वहां पर दो अहम दस्तावेज, दिल्ली पुलिस की ओर से दाखिल अंतिम आरोप पत्र और महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को फांसी देने वाले आदेश नहीं थे।
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पांडा ने तीन बिंदुओं पर स्पष्टीकरण की मांग की है। पहला, मामले के तीन आरोपी फरार हैं और उनको पकड़ने के लिए क्या कोशिश की गई। दूसरा, अपील में दो अन्य आरोपियों को बरी करने के पीछे क्या कारण था और तीसरा, अंतिम आरोप पत्र और गोडसे को सजा देने वाले आदेश की प्रति कहां है।
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इस मामले की जानकारी हासिल करने के लिए स्वयं राष्ट्रीय अभिलेखागार का दौरा करने वाले सूचना आयुक्त श्रीधर अचार्युलु ने अपने फैसले में कहा कि आरोप पत्र से जुड़े रिकॉर्ड से पता चलता है कि मामले के तीन आरोपी फरार हैं। उनको क्यों नहीं गिरफ्तार किया गया, इस बारे में कोई सूचना नहीं है। राष्ट्रीय अभिलेखागार और एएसआई के अधिकारी इस बारे में कोई जानकारी नहीं दे सकते, क्योंकि उनका काम केवल रिकॉर्ड को संभालकर रखना है। उन्होंने अपने 33 पेज से फैसले में दिल्ली पुलिस को आदेश दिया है कि वह तमाम मूल रिकॉर्ड दिखाए जिससे पता चले कि फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए क्या कोशिश की गई।