दिग्विजय सिंह ने सिंधिया और भाजपा पर साधा निशाना, दलबदल कानून में की बदलाव की मांग
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने दलबदल कानून में बदलाव की मांग की है। उन्होंने रविवार को इस कानून में सख्त नियमों लागू करने की पैरवी की। देश में विधायकों के दल बदलने से सरकारें गिरने पर चिंता जाहिर करते हुए कांग्रेस नेता कहा कि देश में दल बदल कानून में बदलाव कर उसे और सख्त बनाया जाना चाहिए।
दिग्विजय ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए एक सवाल के जवाब में संवाददाताओं को बताया, 'पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने वर्ष 1985 में देश में सख्त दल बदल कानून लागू किया था। इस दल बदल कानून में बदलाव होना चाहिए।'
उन्होंने कहा, 'इस कानून में बंदिश होनी चाहिए कि दल बदलने वाला विधायक या सांसद छह साल तक कोई चुनाव न लड़ सके और न ही कोई पद ले सके।' दिग्विजय ने कहा कि आज मतदाताओं द्वारा देश में आए जनमत के साथ खरीद-फरोख्त हो रहा है। इसलिए इस दल बदल कानून को और सख्त बनाया जाना चाहिए।
उनसे सवाल किया गया था कि गुजरात में 19 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस विधायक पार्टी छोड़कर भाजपा में जा रहे हैं। क्या मध्यप्रदेश में कांग्रेस के और विधायक भी भाजपा में जा सकते हैं? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, 'भाजपा ने बहुत सारा पैसा कमाया है और वह विधायकों की खरीद-फरोख्त की राजनीति कर रही है।'
दिग्विजय ने कहा, ‘मध्यप्रदेश में अब कोई कांग्रेस विधायक भाजपा में नहीं जाएगा। जिनको जाना था, वे 22 बागी विधायक पहले ही मार्च में चले गए हैं। जिन्होंने कांग्रेस में रहने का निर्णय लिया है, उन्होंने कठिन परीक्षा पास कर ली है। इसलिए अब ऐसी स्थिति मध्यप्रदेश में नहीं होगी।’
पैसा लेकर जनमत को धोखा देने वालों वालों को उपचुनाव में मिलनी चाहिए हार
दिग्विजय सिंह ने जनता से अपील की है कि जनमत को धोखा देने वाले नेताओं को उपचुनाव में हराएं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में 24 सीटों पर होने वाले आगामी उपचुनाव में मतदाताओं को पैसा लेकर जनमत को धोखा करने वाले उन 22 नेताओं को सबक सिखाना चाहिए, जो विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर कांग्रेस छोड़ भाजपा में चले गए हैं।
दिग्विजय ने संवाददाता सम्मेलन के दौरान आगामी उपचुनाव पर पूछे गए सवाल के जवाब में कांग्रेस के इन 22 विधायकों की ओर इशारा करते हुए कहा, 'मतदाताओं को उनके खिलाफ आगामी उपचुनाव में मतदान करना चाहिए जिन्होंने पैसा लेकर गद्दारी की है।' उन्होंने कहा कि मार्च में जब ये 22 विधायक बागी हुए थे और अन्य स्थानों में रह रहे थे, तब इनमें से 10-12 उनके संपर्क में थे लेकिन इनकी मांग इतनी बड़ी हो गई थी कि पार्टी इनकी मांग पूरी करने में सक्षम नहीं थी और न ही पार्टी उनकी मांग पूरी करना चाहती थी।
दिग्विजय ने उनपर भाजपा का दामन थामने के लिए 35-35 करोड़ रूपये लेने का आरोप लगाते हुए कहा, 'जनमत पर भारी पड़ा 35 करोड़ रुपये।' सिंधिया पर निशाना साधते हुए सिंह ने कहा, 'गुना सीट से लोकसभा चुनाव हारने के बाद आपने (सिंधिया) दुश्मन भाजपा के साथ दोस्ती की। जिसने हराया, उसके साथ उन्होंने दोस्ती की। पार्टी छोड़कर जो काम किया है, जनता सिंधिया को माफ नहीं करेगी।'
दिग्विजय ने कहा, 'हमने आपको श्रीमंत एवं महाराज की पदवी दी। अब भाजपा ने आपको विभीषण की पदवी दे दी है।' उन्होंने कहा, 'यहां भाजपा में कोई राजनेता नहीं होता है। जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कह देता है, वही होता है। आपको संघ के रहते भाजपा में कोई सम्मान नहीं मिलेगा।'
दिग्विजय ने कहा, 'मुझे उम्मीद नहीं थी कि सिंधिया जी पार्टी छोड़कर चले जाएंगे।' उन्होंने कहा कि यदि सिंधिया को लग रहा था कि उनकी पार्टी में अनदेखी हो रही थी तो वह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से बात करते, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसके अलावा, राहुल गांधी के भी वह करीबी थे, उनसे सामने अपनी समस्या रखते।
भारत के पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों में गिरावट आई
देश की विदेश नीति पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में दिग्विजय ने कहा, 'पाकिस्तान, अफगानिस्तान, भूटान, नेपाल, चीन, वर्मा एवं श्रीलंका के साथ आज हमारे कैसे रिश्ते हैं, आकलन कीजिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने कई देशों की विदेश यात्राएं की है, लेकिन पड़ोसी देशों के साथ हमारे रिश्तों में गिरावट आई है।'
मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, 'पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध कायम करने के लिए काम करना चाहिए।' दिग्विजय ने बताया कि चीन भी हमारे देश के तीन स्थानों पर प्रवेश कर चुका है। यह अपने आप में बहुत बड़ा विषय है। सरकार को विशेषज्ञों के साथ चर्चा कर इसका हल जल्द निकालना चाहिए।
देश में फैले कोरोना वायरस का जिक्र करते हुए मोदी सरकार पर हमला करते हुए उन्होंने कहा, 'मोदीजी ने एक दिन में पूरे देश में लॉकडाउन चार घंटे में कर दिया। यह उचित नहीं था। सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से चर्चा कर निर्णय लेते तो बेहतर होता। राज्य सरकारों को विश्वास में नहीं लेने से मजदूरों एवं लोगों को लॉकडाउन में दिक्कत हुई।' उन्होंने कहा, 'हवाई जहाज से कोरोना वायरस देश में आया। केन्द्र सरकार को जो नियंत्रण रखना चाहिए था, वह नहीं रखा। इसलिए कोरोना वायरस हमारे यहां फैला। यदि विदेशों से आने वालों को पृथक-वास में रख देते तो यहां कोरोना वायरस नहीं फैलता।'