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NCERT- UGC: 'नए नियमों को लेकर हुए विवाद से बचा जा सकता था', धर्मेंद्र प्रधान बोले- कमेटी सुधारेगी पाठ्यक्रम

Sat, 28 Mar 2026 01:50 PM IST
राकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राकेश कुमार Updated Sat, 28 Mar 2026 01:50 PM IST
सार

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने माना है कि NCERT किताबों में 'न्यायिक भ्रष्टाचार' और UGC के नए नियमों को लेकर हुए विवाद से बचा जा सकता था। उन्होंने कहा कि सरकार किसी के खिलाफ भेदभाव नहीं चाहती। अब इन मामलों में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सुधार किया जा रहा है।
 

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान - फोटो : @अमर उजाला

विस्तार

देश की शिक्षा व्यवस्था और पाठ्यक्रम को लेकर चल रहे घमासान पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने स्वीकार किया कि UGC के नए नियमों और NCERT की किताबों में 'न्यायिक भ्रष्टाचार' जैसे विषयों को शामिल करने से जो विवाद पैदा हुए, उन्हें टाला जा सकता था। उन्होंने माना कि इन मुद्दों को जिस तरह से समाज के सामने पेश किया गया, उसमें कमी रह गई।
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"हम भेदभाव के खिलाफ हैं"
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार की मंशा किसी को भी प्रताड़ित करने की नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारा संवैधानिक कर्तव्य है कि समाज के किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव न हो। चाहे वह अनुसूचित जाति (SC), जनजाति (ST) हो या अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), हम समानता के पक्षधर हैं।"
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सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में तैयार हो रहा नया सिलेबस
NCERT विवाद पर शिक्षा मंत्री ने बताया कि अब चीजें अदालती दिशा-निर्देशों के तहत आगे बढ़ रही हैं। दरअसल, कक्षा 8 की सोशल साइंस की किताब में 'न्यायिक भ्रष्टाचार' और जजों की कमी जैसे मुद्दों को जिस तरह से लिखा गया था, उस पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई थी। इसके बाद NCERT ने माफी मांगते हुए उस किताब को वापस ले लिया था।
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शिक्षा मंत्री ने जानकारी दी है कि अब इस अध्याय को फिर से लिखने के लिए जस्टिस इंदु मल्होत्रा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में पूर्व अटार्नी जनरल और एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद भी शामिल हैं। यह कमेटी भोपाल लॉ एकेडमी के सुझावों को भी शामिल करेगी। इतना ही नहीं, नया अध्याय तैयार कर कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा।


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UGC नियमों पर सस्पेंस बरकरार
जनवरी 2026 में लागू हुए 'UGC इक्विटी रेगुलेशन' को लेकर भी मंत्री ने अपनी बात रखी। इन नियमों का मकसद कैंपस में भेदभाव रोकना था, लेकिन सामान्य वर्ग के छात्रों की ओर से इसे कोर्ट में चुनौती दी गई थी। फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत का जो भी फैसला होगा, सरकार उसे पूरी निष्ठा से लागू करेगी। धर्मेंद्र प्रधान के इस बयान से साफ है कि आने वाले समय में शिक्षा और न्यायपालिका के बीच समन्वय को लेकर ज्यादा संवेदनशीलता बरती जाएगी।


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