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डीजीएएफएमएस की सलाह: डेल्टा, बीटा संक्रमण से कम खतरनाक ओमिक्रॉन, क्वारंटीन उचित नहीं
Tue, 11 Jan 2022 04:28 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 11 Jan 2022 04:28 AM IST
सार
डीजीएएफएमएस के वाइस एडमिरल रजत दत्ता के नेतृत्व में जारी नीति के अनुसार, ओमिक्रॉन से शरीर का ऊपरी हिस्सा (गले के ऊपरी भाग) ही प्रभावित होता है।
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ओमिक्रॉन वैरिएंट (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : iStock
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विस्तार
देश में कोविड के बढ़ते मामलों के बीच शीर्ष चिकित्सीय प्राधिकरण महानिदेशक सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाएं (डीजीएएफएमएस) ने नीति जारी की है। इसमें कहा गया है कि डेल्टा व बीटा संक्रमण की अपेक्षा ओमिक्रान कम खतरनाक है, लिहाजा क्वारंटीन उचित नहीं है।
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डीजीएएफएमएस के वाइस एडमिरल रजत दत्ता के नेतृत्व में जारी नीति के अनुसार, ओमिक्रॉन से शरीर का ऊपरी हिस्सा (गले के ऊपरी भाग) ही प्रभावित होता है। यह लोगों में बड़ी संख्या में बिना लक्षण के और कम संख्या में लक्षण के साथ दिख रहा है। डेल्टा और बीटा वैरिएंट की तुलना में यह वायरस कम घातक है। इम्यूनिटी बनने से अतिरिक्त सुरक्षा भी मिल रही है। ऐसे में बड़ी संख्या में सैन्य बलों को क्वारंटीन करना उचित नहीं होगा।
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उनके मुताबिक यदि ओमिक्रॉन से प्रभावित व्यक्ति को क्वारंटीन किया गया तो केंद्रों पर एक बड़ी संख्या में समूह एकत्रित हो जाएगा। इस नियम से अचानक से लोगों की कमी हो जाएगी, जिससे ऑपरेशनल स्वरूप प्रभावित होगा। उनके मुताबिक, महामारी के पहले और दूसरे लहर में भी ऐसी स्थिति देखने को मिली थी।
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नीति में कहा गया है कि इस वायरस से गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों का ही टेस्ट किया जाए। बिना लक्षण वाले या कम लक्षण वाले लोगों का टेस्ट करने की जरूरत नहीं है। बता दें कि यह नीति रक्षा बलों और भारतीय तट गार्ड पर लागू होती है। सैन्य बलों में कोविड से लड़ाई में डीजीएएफएमएस की मुख्य भूमिका है।