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अमरनाथ गुफा में श्रद्धालु अब लगा सकेंगे जयकारे, अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने NGT के आदेश को दी थी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Mon, 16 Apr 2018 08:43 PM IST
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अमरनाथ गुफा
- फोटो : Amar Ujala
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अमरनाथ गुफा में श्रद्धालु अब बाबा बर्फानी के जयकारे लगा सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के उस आदेश को दरकिनार कर दिया जिसमें बाबा बर्फानी परिसर को ‘साइलेंस जोन’ घोषित किया गया था। एनजीटी के 13 दिसंबर के आदेश को अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने चुनौती दी थी।
न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ के समक्ष बोर्ड ने यह कहकर ट्रिब्यूनल के फैसले को चुनौती दी कि एनजीटी ने स्वत: यह आदेश पारित कर दिया जबकि वादी ने यह मसला उठाया ही नहीं था। बोर्ड की ओर से वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि एनजीटी के समक्ष मामला वैष्णो देवी मंदिर परिसर में घोड़े और खच्चरों पर प्रतिबंध लगाने तक सीमित था लेकिन एनजीटी ने अमरनाथ मामले पर संज्ञान लेकर आदेश पारित कर दिया।
रोहतगी ने कहा कि एनजीटी ने बाबा बर्फानी के समक्ष घंटी बजाने, प्रसाद चढ़ाने और जयकारे लगाने पर रोक लगा दी थी। इस पर पीठ ने सवाल किया कि आखिर एनजीटी क्या कहना चाहती है? रोहतगी ने दलील दी कि आखिर श्रद्धालुओं को प्रसाद ले जाने से मना कैसे किया जा सकता है। इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं। इस पर पीठ ने सुझाव दिया कि बोर्ड द्वारा प्रसाद मुहैया कराया जा सकता है।
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मालूम हो कि गत 13 दिसंबर को एनजीटी ने अमरनाथ गुफा को 'साइलेंस जोन’ घोषित कर दिया था और हिमस्खलन से रोकने के मद्देनजर बाबी बर्फानी के समक्ष श्रद्धालुओं को शांति बनाए रखने के लिए कहा था।
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न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ के समक्ष बोर्ड ने यह कहकर ट्रिब्यूनल के फैसले को चुनौती दी कि एनजीटी ने स्वत: यह आदेश पारित कर दिया जबकि वादी ने यह मसला उठाया ही नहीं था। बोर्ड की ओर से वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि एनजीटी के समक्ष मामला वैष्णो देवी मंदिर परिसर में घोड़े और खच्चरों पर प्रतिबंध लगाने तक सीमित था लेकिन एनजीटी ने अमरनाथ मामले पर संज्ञान लेकर आदेश पारित कर दिया।
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रोहतगी ने कहा कि एनजीटी ने बाबा बर्फानी के समक्ष घंटी बजाने, प्रसाद चढ़ाने और जयकारे लगाने पर रोक लगा दी थी। इस पर पीठ ने सवाल किया कि आखिर एनजीटी क्या कहना चाहती है? रोहतगी ने दलील दी कि आखिर श्रद्धालुओं को प्रसाद ले जाने से मना कैसे किया जा सकता है। इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं। इस पर पीठ ने सुझाव दिया कि बोर्ड द्वारा प्रसाद मुहैया कराया जा सकता है।
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मालूम हो कि गत 13 दिसंबर को एनजीटी ने अमरनाथ गुफा को 'साइलेंस जोन’ घोषित कर दिया था और हिमस्खलन से रोकने के मद्देनजर बाबी बर्फानी के समक्ष श्रद्धालुओं को शांति बनाए रखने के लिए कहा था।
जम्मू एवं कश्मीर सरकार पर लगे 50 लाख के जुर्माने के आदेश पर लगाई रोक
supreme court
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एनजीटी के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें कटरा से वैष्णो देवी मंदिर के रास्ते में घोड़ों और खच्चरों पर रोक के बाद उनके लिए पुनर्वास योजना को अंतिम रूप न देने के कारण जम्मू एवं कश्मीर सरकार पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।
जम्मू एवं कश्मीर सरकार की ओर से सोमवार को न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ को जानकारी दी गई कि पुनर्वास योजना को अंतिम रूप दिया जा चुका है और अप्रूवल के लिए इसे कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा।
जम्मू एवं कश्मीर सरकार की ओर से सोमवार को न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ को जानकारी दी गई कि पुनर्वास योजना को अंतिम रूप दिया जा चुका है और अप्रूवल के लिए इसे कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा।