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फडणवीस ने उद्धव ठाकरे को दी चुनौती, कहा-अगर इतना ही भरोसा है तो दोबारा लड़ लीजिए चुनाव

Sun, 16 Feb 2020 07:30 PM IST
संदीप भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: संदीप भट्ट Updated Sun, 16 Feb 2020 07:30 PM IST
सार

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने सत्तारूढ़ दल शिवसेना को फिर से चुनाव लड़ने की चुनौती दी है। रविवार को देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना,एनसीपी और कांग्रेस तीनों के गठबंधन को चुनौती दी और चुनाव हराने का दावा किया। 
 

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devendra fadnavis challenge to cm uddhav thackeray said contest again in election
देवेंद्र फडणवीस (फाइल फोटो)

विस्तार

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने सत्तारूढ़ दल शिवसेना को फिर से चुनाव लड़ने की चुनौती दी है। रविवार को देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना,एनसीपी और कांग्रेस तीनों के गठबंधन को चुनौती दी और चुनाव हराने का दावा किया। 
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फडणवीस ने कहा, 'अगर शिवसेना को इतना ही भरोसा है तो मैं उन्हें फिर से चुनाव लड़ने की चुनौती देता हूं। शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी गठबंधन को बीजेपी अकेले चुनाव में हराएगी।'
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इसके अलावा उन्होंने भीमा कोरेगांव की जांच एनआईए को सौंपने पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि मैं इसके लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को धन्यवाद देता हूं।  साथ ही उन्होंने कहा कि शरद पवार इस फैसले का विरोध कर रहे थे, उन्हें इस बात का डर लग रहा था कि कहीं सच सामने ना आ जाए।
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भीमा कोरेगांव: पवार ने कहा फडणवीस सरकार कुछ छिपाना चाहती थी

राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार ने रविवार को आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र ने यलगार परिषद मामले की जांच को राष्ट्रीय जांच एजेंसी को इसलिए सौंपा है क्योंकि महाराष्ट्र की पूर्ववर्ती भाजपा सरकार कुछ छिपाना चाहती थी।

पवार इस मामले में विशेष जांच दल एसआईटी से पड़ताल करवाने की मांग कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र को यह कदम उठाने से पहले महाराष्ट्र सरकार को भरोसे में लेना चाहिए था। इस मामले में कुछ सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को माओवादियों से कथित संपर्क रखने के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है। 

इस पूर्व केंद्रीय मंत्री ने सवाल करते हुए कहा कि क्या सरकार के विरोध में बोलना राष्ट्र विरोधी गतिविधि है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि पहले सत्ता में रही भाजपा सरकार कुछ बातों को सामने लाने नहीं लाना चाहती थी। उन्होंने जलगांव में पत्रकारों से कहा कि यह केंद्र का विशेषाधिकार है कि वह यलगार परिषद मामले की जांच करे लेकिन इसके लिए राज्य को विश्वास में लिया जाना चाहिए।

पवार ने कहा कि कोरेगांव-भीमा और यलगार परिषद हिंसा के एक दिन पहले हुए और ये दोनों अलग अलग मुद्दे हैं। क्या क्रांतिकारी साहित्य लिखना और सरकार के खिलाफ बोलना राष्ट्र विरोधी कार्यों में गिना जाएगा।

हर साल कोरेगांव भीमा में लोग जमा होते हैं लेकिन कुछ लोग आस पास के गांवों में गए और नियमित तौर पर जाने वालों से मिलकर इसका विरोध किया। पुलिस ने संभाजी भिडे और मिलिंद एकबोटे सहित इन लोगों पर कार्रवाई की। गौरतलब है कि यह मामला 31 दिसंबर, 2017 का है और पुलिस ने 11 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और इनमें से नौ अभी जेल में हैं।
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