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Research: पहाड़ी इलाकों में उम्र के साथ नहीं हो रहा विकास, ऊंचाई में रहने वाले बच्चों में बौनेपन का खतरा

Thu, 02 May 2024 07:27 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Thu, 02 May 2024 07:27 AM IST
सार

इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ पॉपुलेशन साइंसेज मुंबई, यूनिवर्सिटी ऑफ लद्दाख, मणिपाल टाटा मेडिकल कॉलेज से जुड़े शोधकर्ताओं के ताजा अध्ययन में इसका खुलासा किया है, जिसके नतीजे अंतराष्ट्रीय जर्नल बीएमजे न्यूट्रिशन प्रिवेंशन एंड हेल्थ में प्रकाशित हुए हैं। 

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Development not with age in hilly areas children living at high altitude are risk of dwarfism
बौनेपन का खतरा। - फोटो : amarujala

विस्तार

देश के अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों में बौनेपन का खतरा बढ़ रहा है। समुद्र तल से 2,000 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई पर रहने वाले बच्चों में बौनेपन की आशंका 1,000 मीटर या उससे कम ऊंचाई पर रहने वाले बच्चों की तुलना में 40 फीसदी अधिक पाई गई। इन बच्चों का उम्र के साथ विकास नहीं हो रहा और लंबाई भी घट रही है।

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इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ पॉपुलेशन साइंसेज मुंबई, यूनिवर्सिटी ऑफ लद्दाख, मणिपाल टाटा मेडिकल कॉलेज से जुड़े शोधकर्ताओं के ताजा अध्ययन में इसका खुलासा किया है, जिसके नतीजे अंतराष्ट्रीय जर्नल बीएमजे न्यूट्रिशन प्रिवेंशन एंड हेल्थ में प्रकाशित हुए हैं।  शोधकर्ताओं के अनुसार कुपोषण की वजह से होने वाला बौनापन सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है। यह पांच वर्ष या उससे कम उम्र के एक तिहाई बच्चों को प्रभावित कर रहा है। ऊंचाई और बौनेपन के बीच यह संबंध ऊंचाई वाले इलाकों में रहने वाले बच्चों में कहीं अधिक था। ऐसे में शोधकर्ताओं ने देश के पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्रों में पोषण कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर जोर दिया है।

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अधिक ऊंचाई पर भूख हो सकती है कम
शोधकर्ताओं का कहना है कि अधिक ऊंचाई पर लंबे समय तक रहने से भूख कम हो सकती है। इससे ऊतकों तक ऑक्सीजन के पहुंचने में बाधा आ सकती है। पोषक तत्वों का अवशोषण सीमित हो जाता है। इस वजह से भी बच्चों की लंबाई बहुत कम बढ़ती है। इसी तरह ऊंचाई बढ़ने के साथ खाद्य असुरक्षा भी बढ़ जाती है। ऊंचाई पर फसलों की पैदावार कम होती है और जलवायु कहीं अधिक कठोर होती है।

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1,67,555 बच्चों में 36% बौनेपन का शिकार मिले
शोधकर्ताओं ने ऊंचाई और बौनेपन के बीच संबंधों का विश्लेषण करने के लिए पांच वर्ष से कम आयु के 1,67,555 बच्चों से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया। शोधकर्ताओं ने पाया कि 36 फीसदी बच्चे बौनेपन का शिकार थे। 18 से 59 महीनों के बच्चों में यह समस्या बेहद आम थी। इस आयु वर्ग के 41 फीसदी बच्चे बौनेपन से प्रभावित थे। वहीं 18 महीने से कम आयु के बच्चों में यह दर 27 फीसदी थी। तीसरी या उसके बाद की संतान के रूप में जन्मे बच्चों को समस्या तीसरे या उसके बाद के भाई-बहन के रूप में जन्मे बच्चें को इस समस्या ने कहीं ज्यादा प्रभावित किया था। इन बच्चों में 44 फीसदी बौनेपन का शिकार थे।

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