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जीवनरक्षक दवाओं का अधिकतम मूल्य निर्धारित करने लिए समिति की सरकार से सिफारिश

Sun, 27 Jan 2019 09:26 PM IST
आसिम खान भाषा, नई दिल्ली
भाषा, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Sun, 27 Jan 2019 09:26 PM IST
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determine the maximum value of life-saving drugs, committee recommendation to government

कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज में काम आने वाली पेटेंटशुदा दवाओं को बाजार में सस्ता रखने के लिये सरकार द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय समिति ने कई सिफारिश की हैं। इसमें किसी भी भारतीय दवा कंपनी को पेटेंट धारक कंपनी की सहमति के बिना इन बीमारियों की दवा बनाने के लिए "अनिवार्य लाइसेंस" व्यवस्था देने का नियम लागू करना भी शामिल है। 

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समिति ने विभिन्न देशों की क्रय शक्ति समानता (पीपीपी) के विश्लेषण के बाद जीवनरक्षक दवाओं का अधिकतम मूल्य निर्धारित करने की भी सिफारिश की है। ज्यादातर पश्चिमी देशों में इस प्रक्रिया का पालन करके दवाओं की कीमतें तय की जाती हैं। देश में अधिकांश पेटेंट दवाओं का कारोबार बहु-राष्ट्रीय दवा कंपनियों के नियंत्रण में है। वे कंपनियां दवाओं का अधिकतम मूल्य तय करने या अनिवार्य लाइसेंस के तहत उनका उत्पादन कराये जाने का विरोध करती हैं। 
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देश के फार्मास्युटिकल्स बाजार का सालाना कारोबार करीब 2.3 लाख करोड़ है। इसमें से ज्यादातर आय जेनरिक दवाओं की बिक्री से होती है। बिक्री आय में पेटेंट के तहत आने वाली दवाओं का हिस्सा 30 प्रतिशत है। समिति ने कहा है कि कैंसर-रोधी और फंगल-रोधी पेटेंट दवाओं के दाम " अधिक ऊंचे है।’’ इस संदर्भ में कैंसर के इलाज के लिए सिर्फ एक इंजेक्शन की कीमत एक लाख रुपये होने का उदाहरण दिया गया है। 
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समिति ने कहा कि मधुमेह की पेटेंट वाली दवाओं के दाम कम करने की जरूरत है। उसका सुझाव है कि पेटेंट धारक कंपनियों को दूसरी दवा कंपनियों को "स्वेच्छा से लाइसेंस" देने के लिये प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इसके अलावा सरकार को दवा कंपनियों के साथ बातचीत करके सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के लिए सस्ती दरों पर अधिक दवाएं खरीदने पर विचार करना चाहिए। अधिकारियों ने कहा कि सरकार समिति के सुझावों की समीक्षा कर रही है। समिति ने पिछले साल मार्च में इस रिपोर्ट में अंतिम रूप दिया था। 


देश में लोगों की क्रय शक्ति की तुलना में पेटेंट दवाओं की बहुत ऊंची कीमत को लेकर चिंतित औषधि विभाग ने संयुक्त सचिवों की इस अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया था। समिति को ऐसी दवाओं की कीमतें निर्धारित करने के तरीके और उपाय सुझाना था। उल्लेखनीय है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने प्रति 1,000 लोगों की आबादी में औसतन एक या उससे भी कम लोगों को जीवनपर्यंत प्रभावित करने वाली बीमारी या स्वास्य संबंधी असंतुलन को " असामान्य बीमारी" के रूप में परिभाषित किया है। हीमोफीलिया, पोम्पे डिसिज, थैलेसीमिया और सिकल सेल एनीमिया ऐसी ही बीमारियों की श्रेणी में रखी गयी हैं।

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