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देसी 'एयर फोर्स वन' में जल्द उड़ान भरेंगे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री, अगले सप्ताह पहुंचेगा भारत

Sat, 22 Aug 2020 10:59 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Sat, 22 Aug 2020 10:59 AM IST
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Desi Air Force One for President and Prime Minister set to touch down next week in India
देसी 'एयर फोर्स वन' - फोटो : Amar Ujala

अमेरिका के राष्ट्रपति की तरह जल्द ही भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री देसी 'एयर फोर्स वन' विमान में सफर करेंगे। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के लिए खरीदे गए दो बोइंग-777-300 ईआर विमान अब लगभग तैयार हो गए हैं और इनमें से एक अगले सप्ताह भारत पहुंच सकता है जबकि दूसरा इस साल के अंत तक पहुंच जाएगा।

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सूत्रों के मुताबिक, दो बोइंग 777-300 एक्सटेंडेड रेंज (ईआर) एयरक्राफ्ट में से पहला, उन्नत सुरक्षा प्रणाली के साथ रेट्रोफिटेड है ताकि आने वाली मिसाइलों और एन्क्रिप्टेड संचार सुविधाओं को जाम और पराजित किया जा सके, जो अगले सप्ताह की शुरुआत में भारत आएगी जबकि दूसरा वर्ष के अंत तक पहुंचा दिया जाएगा।
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कुछ महीने पहले भारत के पहले 'एयर फोर्स वन' विमान की एक तस्वीर भी सामने आई थी। हल्के सफेद रंग के इस आधुनिक तकनीक वाले विमान पर देश के राजचिह्न के साथ हिंदी में भारत और अंग्रेजी में इंडिया लिखा हुआ है।
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अमेरिका के राष्ट्रपति के लिए इस्तेमाल होने वाले 'एयर फोर्स वन' की तर्ज पर ये विमान लार्ज एयरक्राफ्ट इन्फ्रारेड काउंटर्मेशर (LAIRCM) यानी ऐसी तकनीक जिससे इन विमानों पर मिसाइलों से हमला संभव नहीं होगा, से लैस होंगे। इन सुरक्षा प्रणालियों में अकेले अमेरिका के साथ शामिल विदेशी सैन्य बिक्री सौदे में 1,365 करोड़ की लागत आई है। इसके अलावा इन विमानों में सेल्फ प्रटेक्शन स्वीट भी होगा। इन विमानों को 'एयर इंडिया वन' या 'इंडियन एयर फोर्स वन' का नाम दिया जा सकता है।

इन दो बोइंग-777 विमानों को दुनियाभर के एडवांस्ड सिक्योरिटी सिस्टम जैसे- मिसाइल वॉर्निंग, काउंटर मेजर डिस्पेंसिंग सिस्टम और इनक्रिप्टेड सैटलाइट कम्यूनिकेशन जैसी सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। अगर इन विमानों में प्राइवेट आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया जाता है तो ये भी अमेरिकी राष्ट्रपति के चर्चित 'फ्लाइंग ओवल ऑफिस' जैसे ही हाइटेक होंगे। 

LAIRCM तकनीक क्या है?
इस तकनीक के जरिए मिसाइल हमले के डर को पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है। इसके जरिए एक ऐसी लेजर बीम निकलती है जो मिसाइल गाइडेंस सिस्टम को मात दे सकती है। इसके जरिए एडवांस्ड मिसाइल सिस्टम को भी चकमा दिया जा सकता है और इसके लिए क्रू को किसी प्रकार की हरकत करने की भी जरूरत नहीं होती है। इसका इस्तेमाल अमेरिकी नेवी ने अपने पेट्रोल जेट और CH-53 सुपर हेलिकॉप्टर के लिए शुरू किया था।


क्या है  LAIRCM की खासियत?
LAIRCM-SPS बड़े विमानों को कंधे के ऊपर से दागी जाने वाली और मध्यवर्ती श्रेणी की मिसाइलों से बचाता है। यह चालक दल के चेतावनी समय को बढ़ाता है, झूठी अलार्म दरों को कम करता है और स्वचालित रूप से शत्रुतापूर्ण मिसाइलों की गिनती करता है। विमान 17 घंटे से अधिक समय तक बिना रुके उड़ान भर सकता है। इसे एक मिनी अस्पताल और सम्मेलन कक्ष के अलावा, बेडरूम के साथ बड़े केबिनों के लिए अनुकूलित किया गया है।

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