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नोट मामले में सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का कैविएट, याचिका पर 15 को सुनवाई संभव

Thu, 10 Nov 2016 09:52 PM IST
एजेंसी/ नई दिल्ली
एजेंसी/ नई दिल्ली Updated Thu, 10 Nov 2016 09:52 PM IST
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Demonetisation: Centre files caveat, SC may hear plea on November 15
केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में एक कैविएट दाखिल किया कि यदि 500 एवं 1000 रुपये के नोट अमान्य करने के फैसले को लेकर अदालत किसी याचिका पर सुनवाई करती है तो सरकार की बात भी सुनी जाए। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली एक याचिका पर 15 नवंबर को सुनवाई कर सकती है।
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एडवोकेट संगम लाल पांडे ने अपनी व्यक्तिगत क्षमता में जनहित याचिका दाखिल की है। उन्होंने इस आधार पर अपनी याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की है कि मुद्रा को अमान्य किए जाने से आम लोगों को ढेर सारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस पर जस्टिस एआर दवे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि यदि रजिस्ट्री याचिका को मंगलवार के लिए सूचीबद्ध कर सके तो इसे तब के लिए सूचीबद्ध किया जाए। इस बीच, मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में एक कैविएट दाखिल कर कहा है कि यदि अदालत इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करती है और कुछ निर्देश पारित करती है तो उसकी भी बात सुनी जाए। 
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पांडे ने इस आधार वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) की 8 नवंबर की अधिसूचना रद्द करने की मांग की है कि आम लोगों को पर्याप्त समय नहीं दिया गया और इस वजह उन्हें बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जनहित याचिका में केंद्र को यह निर्देश देने को कहा गया है कि जिन नोटों को अमान्य किया गया है उन्हें बदलने के लिए लोगों को पर्याप्त समय दिया जाए।
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इस याचिका के अलावा सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को दाखिल एक अन्य याचिका में कहा गया है कि नोटों को अमान्य करने के सरकार के फैसले से नागरिकों के जीवन जीने और व्यापार के अधिकार के साथ ही अन्य अधिकारों का उल्लंघन होता है। ऐसे में सरकार के इस फैसले को खारिज किया जाए। यह याचिका दिल्ली के वकील विवेक नारायण शर्मा की ओर से दाखिल की गई है। इसे इस सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है। इस याचिका में वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग की अधिसूचना को ‘तानाशाही’ करार दिया गया है।

याचिका में दावा किया गया कि नागरिकों को 500 और 1000 रुपये के नोटों को बदलने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया है, जिससे कि बड़े पैमाने पर होने वाली मारामारी और जिंदगी को खतरा पैदा करने वाली मुश्किलों से बचा जा सके। याचिका में नोटों को अमान्य करने संबंधी अधिसूचना को रद्द करने अथवा केंद्र सरकार को नोट बदलने के लिए लोगों को पर्याप्त समय देने का निर्देश देने की मांग की गई है। 
 

मद्रास हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

Demonetisation: Centre files caveat, SC may hear plea on November 15
एजेंसी/ मदुरै। मद्रास हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया जिसमें केंद्र सरकार की ओर से 500 और 1000 रुपये के नोटों को अमान्य करने की जारी अधिसूचना को रद्द करने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि वह सरकार की मुद्रा प्रणाली से जुड़ी नीतियों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।  

याचिका इंडियन नेशनल लीग के राज्य महासचिव एम. सेनी अहमद ने दायर की थी। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया था कि वह केंद्र सरकार को 500 और 1000 रुपये के नोटों को 31 दिसंबर तक वैद्य घोषित करने का निर्देश दे। 

मुंबई हाईकोर्ट में 15 के बाद हो सकती है सुनवाई

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एजेंसी/ मुंबई। हाईकोर्ट की एक अवकाशकालीन पीठ ने 500 और 1000 रुपये के नोटों को अमान्य घोषित करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा है कि चूंकि यह कानून से जुड़ा मामला है इसलिए उन्हें 15 नवंबर के बाद नियमित पीठ का दरवाजा खटखटाना चाहिए।

याचिका वकील जमशेद मिस्त्री और जब्बार सिंह की ओर से बुधवार को दायर की गई थी। इसमें अदालत से अनुरोध किया गया था कि वह नोटों को अमान्य घोषित करने के फैसले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए याचिका पर सुनवाई करे, क्योंकि इस फैसले से लोगों को भारी परेशानी हो रही है। साथ ही याचिका में आरोप लगाया गया था कि सरकार ने यह फैसला काफी हड़बड़ी में किया है। 
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