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CAA Impementation: सीएए पर रोक लगाने के लिए अब डीवाईएफआई आया आगे, सुप्रीम में दायर की याचिका

Wed, 13 Mar 2024 04:35 AM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम Published by: यशोधन शर्मा Updated Wed, 13 Mar 2024 04:35 AM IST
सार

डीवाईएफआई ने तर्क दिया कि अप्रवासियों के धर्म के आधार पर नागरिकता देना धर्मनिरपेक्षता के मूल सिद्धांत का उल्लंघन है, जो संविधान की मूल संरचना के रूप में स्थापित है।

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Democratic Youth Federation India moves SC seeking stay CAA implementation
dyfi - फोटो : ANI

विस्तार

नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) लागू होने के बाद से कहीं जश्न तो कहीं विरोध शुरू हो गया है। इसी कड़ी में मंगलवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी की युवा शाखा डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 

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याचिका में दिया ये तर्क
डीवाईएफआई ने तर्क दिया कि अप्रवासियों के धर्म के आधार पर नागरिकता देना धर्मनिरपेक्षता के मूल सिद्धांत का उल्लंघन है, जो संविधान की मूल संरचना के रूप में स्थापित है। गौरतलब है कि सीएए को लागू किए जाने के बाद अब पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत आने वाले गैर-मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता दी जा सकेगी। सीएए के नियम जारी हो जाने के साथ ही मोदी सरकार इन तीन देशों के प्रताड़ित गैर-मुस्लिम प्रवासियों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई) को भारतीय नागरिकता देना शुरू कर देगी।
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वहीं, दायर याचिका के मुताबिक याचिकाकर्ता ने सीएए को असंवैधानिक करार दिया है और कहा है कि धर्म के आधार पर इस तरह का वर्गीकरण संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करता है। इतना ही नहीं याचिका में इसे भेदभावपूर्ण, मनमाना, अनुचित और तर्कहीन कहा गया है। इसके अलावा शीर्ष अदालत से अनुरोध किया गया है कि कोई अन्य या आगे का आदेश पारित किया जाए जो मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के तहत उचित लगे।
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आखिर क्या है नागरिकता संशोधन कानून?
नागरिकता संशोधन विधेयक से अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई अवैध प्रवासियों को नागरिकता के लिए पात्र बनाने के लिए नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन किया गया है। 


नागरिकता संशोधन विधेयक 9 दिसंबर 2019 को लोकसभा में प्रस्तावित किया गया था। 9 दिसंबर 2019 को ही विधेयक सदन से पारित हो गया। 11 दिसंबर 2019 को यह विधेयक राज्यसभा से पारित हुआ था।


 
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