बीपीएल कार्डधारी, किसान और संविदा शिक्षक भी बने सांसद, एक ने तो छोड़ दी पुलिस की नौकरी
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लोकसभा चुनाव 2019 कई मायनों में खास रहा। बात चाहे मतदाताओं में युवा जोश, बुजुर्ग और महिलाओं की बढ़-चढ़ कर भागीदारी की हो या फिर प्रचंड बहुमत से मिली जीत की। इस चुनाव में एक ओर रईस से रईस और ज्यादा से ज्यादा आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार मैदान में थे, तो वहीं दूसरी ओर गरीब परिवार से स्वच्छ छवि वाले कई सामान्य व्यक्ति भी मैदान में उतारे गए थे।
दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा चर्चा आंध्रप्रदेश में टीडीपी प्रमुख चंद्र बाबू नायडू की जमीन खिसका देने वाले जगनमोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआरसीपी की हो रही है। अपनी प्रदेश यात्रा, राजनीति और साधारण परिवार और स्वच्छ छवि वाले उम्मीदवारों की बदौलत जगनमोहन रेड्डी ने आम चुनावों में लोकसभा की 22 सीटों पर जीत दर्ज की।
इस जीत के साथ वाईएसआरसीपी लोकसभा में चौथी सबसे बड़ी पार्टी बन गई। वहीं आंध्र प्रदेश के विधानसभा की 175 में से 151 सीटों पर भी वाईएसआरसीपी ने प्रचंड जीत दर्ज की और राज्य में चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी को सत्ता से बेदखल कर दिया।
आइए जानतें हैं जगनमोहन रेड्डी के कुछ ऐसे साधारण उम्मीदवारों के बारे में जो अपनी सामान्य छवि को लेकर चर्चा में हैं:
बीपीएल कार्ड धारक किसान को लोगों ने पहुंचाया संसद
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के नंदीगामा सुरेश पेशे से किसान हैं और वह केले की खेती करते हैं। जानकर आश्चर्य होगा कि सुरेश बीपीएल कार्ड धारक हैं। गांव में उनके परिवार की मात्र दो एकड़ जमीन है, जिससे संयुक्त परिवार का घर चलता है। वहीं घर चलाने के लिए सुरेश फोटोग्राफी भी करते हैं।
उन्होंने आंध्र प्रदेश की बापटला लोकसभा सीट से जीत दर्ज की है। साल 2009 में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखरन रेड्डी की मौत के बाद उनके बेटे जगनमोहन के बड़े समर्थक बने और फिर उनकी पार्टी के यूथ विंग के नेता बनाए गए।
पुलिस ने झूठे केस में टॉर्चर किया था, रेड्डी का नाम लेने को कहा था
साल 2015 में सुरेश को पुलिस ने एक झूठे केस में फंसाने की कोशिश की थी। उनपर केले के खेत में आग लगाने का आरोप लगाया गया था। खबरों के अनुसार, पुलिस ने उन्हें टॉर्चर किया था और इस मामले में पार्टी प्रमुख जगन मोहन रेड्डी का नाम लेने को मजबूर कर रहे थे। सुरेश ने न आरोप कबूला और न ही रेड्डी का नाम लिया।
पिछले साल रेड्डी ने उन्हें बापटला लोकसभा क्षेत्र का प्रभारी बनाया। सुरेश के अनुसार उसने रेड्डी से मिन्नतें भी की कि वह इस पद के काबिल नहीं। उन्हें न हिंदी आती है, न अंग्रेजी और उनके पास पैसे भी नहीं हैं। जगन ने न केवल उन्हें प्रभारी का पद दिया, बल्कि लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार भी बनाया और वह जीते भी।
संविदा पर शारीरिक शिक्षक है माधवी, पूर्व केंद्रीय मंत्री को दी मात
अरकु की नई सांसद गोद्देती माधवी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। माधवी पूर्व विधायक जी. देमुदे की बेटी हैं। वह संविदा पर बतौर शिक्षक बहाल है और शारीरिक शिक्षा पढ़ाती हैं। उसकी उम्र महज 28 साल है और वह देश के युवा सांसदों में से एक हैं।
उन्होंने तेलुगू देशम पार्टी से छह बार सांसद रहे और पूर्व केंद्रीय मंत्री किशोर चंद्र देव को 2,24,098 वोटों के अंतर से हराया है। जानकर आश्चर्य होगा कि चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे के अनुसार उनकी संपत्ति करीब डेढ़ लाख रुपये है।
पुलिस की नौकरी छोड़ राजनीति में आ गए माधव
हिंदूपुर सीट से वाईएसआरसीपी के टिकट पर चुनाव जीते गोरंतला माधव पुलिस में थे। वह पिछड़े वर्ग से आते हैं और सर्किल अधिकारी के पद पर रहे हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव से पहले पुलिस सेवा छोड़ दी थी, जिसके बाद जगन मोहन रेड्डी ने उन्हें बतौर प्रत्याशी खड़ा किया। माधव के पूर्व साथियों ने उन्हें सैल्यूट किया था तो इसकी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही थी।
माधव ने टीडीपी सांसद जेसी दिवाकर रेड्डी से क्षेत्र में कानून-व्यवस्था ध्वस्त होने के मसले पर बहस किया था और इस घटना से उनकी धाकड़ वाली पहचान बन गई थी। इसी घटना के बाद जगन मोहन रेड्डी ने उन्हें अपनी पार्टी में शामिल कर लिया। हिंदूपुर से टिकट दिया और माधव ने पार्टी के लिए जीत हासिल की।