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महिला पुलिसकर्मियों ने संभाल रखा है मोर्चा, बोलीं- हमें भी आत्मरक्षा का अधिकार

Tue, 05 Nov 2019 06:32 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 05 Nov 2019 06:32 PM IST
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Delhi police women police officers also participation in the protest demanding for justice
Delhi Police Protest - फोटो : AmarUjala

दिल्ली पुलिस के जवान मंगलवार सुबह से दिल्ली पुलिस के हेडक्वार्टर पर डटे हुए हैं। तीस हजारी कोर्ट में हुई भिड़ंत के बाद वकीलों के खिलाफ उनका प्रदर्शन अभी भी जारी है। उनकी मांग है कि पुलिस के जवानों पर हमला करने वाले दोषी वकीलों पर कार्रवाई हो और उनका वकालत का लाइसेंस रद्द किया जाए। इस प्रदर्शन में महिला पुलिसकर्मियों ने सबसे आगे मोर्चा संभाल रखा है। वे पोस्टर बनाने से लेकर नारेबाजी में सबसे आगे हैं और उनकी एक टुकड़ी पुलिस मुख्यालय के ठीक सामने डटी हुई है। महिला पुलिसकर्मियों का कहना है कि मांगें पूरी होने के पहले वे यहां से नहीं हटेंगी।

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हाईकोर्ट के फैसले के बाद बिगड़े हालात

दिल्ली पुलिस के जवानों और वकीलों के बीच तीस हजारी कोर्ट में शनिवार को हुई भिड़ंत के बाद हाईकोर्ट ने इस मामले पर संज्ञान लिया था। हाईकोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई की और घटना के दोषी पुलिस जवानों पर कार्रवाई करने का आदेश दिया। पुलिसकर्मियों को लग रहा है कि हाईकोर्ट का यह फैसला एक तरफा है और उनकी बात नहीं सुनी गई। अगर दोषी पुलिसकर्मयों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया गया था, तो उन वकीलों को भी सजा मिलनी चाहिए थी, जिन्होंने पुलिस वालों पर हमला किया।

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हमारा भी परिवार, हमें भी सुरक्षा का अधिकार

महिला पुलिसकर्मियों का कहना है कि किसी भी दूसरे नागरिक की तरह उनका भी परिवार है और उन्हें भी अपने परिवार के लिए काम करना पड़ता है। उन्हें भी कानून के तहत आत्म रक्षा का अधिकार मिला हुआ है। तीस हजारी कोर्ट में गोली चलने की घटना दुर्भाग्यपूर्ण थी, लेकिन पुलिस के जवानों को वह गोली भीड़ को हटाने के लिए चलानी पड़ी थी। अगर हवाई फायर न किया गया होता, तो हो सकता था कि इस घटना में कई शीर्ष अधिकारियों को अपनी जान गंवानी पड़ती।

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पुलिस कार्रवाई को गलत नजरिये से देखा

पुलिसकर्मियों के मुताबिक हिंसा के समय कई न्यायिक अधिकारियों ने भी स्वयं को अपराधियों के कमरे में कैद कर लिया था। अगर पुलिस घटना पर काबू न करती, तो इन न्यायिक अधिकारियों की जान के साथ भी खिलवाड़ हो सकता था। ऐसे में पुलिस कार्रवाई को गलत नजरिये से देखा गया। प्रदर्शन में जवानों की मांग है कि पुलिसकर्मियों के खिलाफ लिया गया आदेश वापस लिया जाना चाहिए।

क्या वकील कानून से ऊपर हैं?

पुलिसकर्मियों का कहना है कि किसी भी प्रकार की घटना होने पर पुलिस को तत्काल कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है। पुलिसकर्मियों को निलंबित और बर्खास्त कर दिया जाता है। लेकिन सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि वकील निर्दोष पुलिस जवानों पर हमले कर रहे हैं। ये हमले पूरे देश में हो रहे हैं। क्या वकील कानून से ऊपर हो गए हैं। पुलिसकर्मियों का कहना है कि दोषी वकीलों पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। 

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