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Hindi News ›   India News ›   Delhi Lieutenant Governor moves Gujarat court to keep in abeyance trial in 2002 attack on Medha Patkar

Gujarat: गुजरात की अदालत पहुंचे दिल्ली के उपराज्यपाल, सामाजिक कार्यकर्ता मेघा पाटकर से जुड़ा है मामला

Mon, 06 Mar 2023 11:20 PM IST
Jeet Kumar पीटीआई, अहमदाबाद
पीटीआई, अहमदाबाद Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 06 Mar 2023 11:20 PM IST
सार

वीके सक्सेना ने अपने आवेदन में अदालत से आग्रह किया है कि जब तक वह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के एलजी हैं, तब तक उनके खिलाफ कार्रवाई न की जाए।

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Delhi Lieutenant Governor moves Gujarat court to keep in abeyance trial in 2002 attack on Medha Patkar
एलजी वीके सक्सेना - फोटो : ANI

विस्तार

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सोमवार को गुजरात की एक अदालत से अनुरोध किया कि 2002 में नर्मदा बचाओ आंदोलन (एनबीए) की कार्यकर्ता मेधा पाटकर पर हमला करने के मामले में उनके खिलाफ चल रहे आपराधिक मुकदमे को उनके संवैधानिक पद पर बने रहने तक स्थगित रखा जाए।

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साथ ही वीके सक्सेना ने अपने आवेदन में आपराधिक कार्यवाही के खिलाफ प्रतिरक्षा की मांग करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 361 के उप-खंड 2 के प्रावधान का हवाला दिया है और अदालत से आग्रह किया है कि जब तक वह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के एलजी हैं, तब तक उनके खिलाफ कार्रवाई न की जाए।
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मामले की सुनवाई अहमदाबाद में अतिरिक्त मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट पीएन गोस्वामी की अदालत में चल रही है और मामले की अगली सुनवाई नौ मार्च को होगी। वहीं वीके सक्सेना मई 2022 में दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) बने थे। मामला 21 साल पुराना है जब गुजरात भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक अमित पी शाह सहित तीन अन्य पर दंगा, हमला, गलत तरीके से रोकना, आपराधिक धमकी और जानबूझकर अपमान के संबंध में मामला दर्ज किया गया था।
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एलजी के वकील अजय चोकसी ने कहा कि अर्जी एक मार्च को दायर की गई थी। सक्सेना ने कहा कि वह अभियोजन पक्ष के खिलाफ अपना बचाव कर रहे हैं। याचिका में कहा गया है कि आवेदक (लेफ्टिनेंट गवर्नर) 2005 के बाद से सुश्री मेधा पाटकर द्वारा दायर की गई शिकायत पर प्रेरित, तुच्छ, परेशान करने वाले और प्रतिशोधी अभियोजन के खिलाफ सख्ती से बचाव कर रहा है।


पीटीआई के मुताबिक, 7 मार्च 2002 को लोगों के एक समूह ने अहमदाबाद के गांधी आश्रम में आयोजित एक शांति बैठक में मेधा पाटकर की मौजूदगी का विरोध किया था। यह बैठक गोधरा दंगों के बाद आयोजित की गई थी। वीके सक्सेना पर कथित तौर पर नर्मदा बचाओ आंदोलन (एनबीए) की नेता मेधा पाटकर एवं अन्य पर हमला करने का आरोप लगाया गया था। इसको लेकर साबरमती पुलिस थाने में सक्सेना समेत चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अधिवक्ता चोकसी का कहना है कि मेधा पाटकर के खिलाफ आवाज उठाने के कारण वीके सक्सेना को गलत तरीके से फंसाया गया था।

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