{"_id":"5b65d1b14f1c1b75568b5415","slug":"delhi-high-court-rejects-aap-government-order-for-amendment-in-minimum-wages","type":"story","status":"publish","title_hn":"केजरीवाल सरकार को झटका, हाईकोर्ट ने न्यूनतम वेतन में संशोधन के आदेश को खारिज किया","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
केजरीवाल सरकार को झटका, हाईकोर्ट ने न्यूनतम वेतन में संशोधन के आदेश को खारिज किया
भाषा, नई दिल्ली
Updated Sat, 04 Aug 2018 09:47 PM IST
विज्ञापन
दिल्ली हाई कोर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली में रोजगार की सभी अनुसूचित श्रेणियों में सभी वर्गों के श्रमिकों के न्यूनतम वेतन में संशोधन की दिल्ली सरकार की मार्च, 2017 की अधिसूचना को रद्द कर दिया है। यह आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार के लिए झटका है।
न्यायालय ने कहा कि संविधान के तहत दिल्ली सरकार को इसका अधिकार नहीं है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर ने दिल्ली सरकार की न्यूनतम वेतन पर सलाहकार समिति बनाने की सरकार की अधिसूचना को भी रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि दोनों ही फैसले प्राकृतिक न्याय के सिद्धान्तों तथा बिना उचित आधार लिए गए थे लिहाजा यह दोनों ही फैसले अवैध हैं।
अधिसूचना के अनुसार अकुशल, अर्द्धकुशल और कुल श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन क्रमश: 13,500 रुपये, 14,698 रुपये और 16,182 रुपये तय किया गया था।
उच्च न्यायालय का यह फैसला विभिन्न औद्योगिक इकाइयों तथा कंपनियों की ओर से दायर याचिकाओं पर आया है, जो श्रमिकों को न्यूनतम वेतन पर काम देती हैं।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि दिल्ली सरकार ने यह फैसला लेने से पहले उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया।
विज्ञापन
न्यायालय ने कहा कि संविधान के तहत दिल्ली सरकार को इसका अधिकार नहीं है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर ने दिल्ली सरकार की न्यूनतम वेतन पर सलाहकार समिति बनाने की सरकार की अधिसूचना को भी रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि दोनों ही फैसले प्राकृतिक न्याय के सिद्धान्तों तथा बिना उचित आधार लिए गए थे लिहाजा यह दोनों ही फैसले अवैध हैं।
विज्ञापन
अधिसूचना के अनुसार अकुशल, अर्द्धकुशल और कुल श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन क्रमश: 13,500 रुपये, 14,698 रुपये और 16,182 रुपये तय किया गया था।
उच्च न्यायालय का यह फैसला विभिन्न औद्योगिक इकाइयों तथा कंपनियों की ओर से दायर याचिकाओं पर आया है, जो श्रमिकों को न्यूनतम वेतन पर काम देती हैं।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि दिल्ली सरकार ने यह फैसला लेने से पहले उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया।