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Delhi high Court: चुनावी घोषणापत्र में नकद हस्तांतरण की पेशकश को भ्रष्ट चुनावी प्रैक्टिस घोषित करने संबंधी याचिका खारिज

Wed, 18 May 2022 06:26 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Wed, 18 May 2022 06:26 AM IST
सार

अदालत ने पहले नोटिस जारी किया था और याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा था, जिसमें कहा गया था कि वोट के वादे के लिए इस तरह का नोट जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 123 का उल्लंघन है जो भ्रष्ट आचरण और रिश्वतखोरी से संबंधित है।

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Delhi High Court dismisses plea to declare cash transfer offer in election manifesto as corrupt electoral practice
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

उच्च न्यायालय ने मंगलवार को राजनीतिक दलों के चुनावी घोषणापत्रों में नकद हस्तांतरण की पेशकश को भ्रष्ट चुनावी प्रेक्टिस घोषित करने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा इस मामले में चुनाव आयोग पहले ही दिशा निर्देश जारी कर चुका है ऐसे में याचिका विचारयोग्य नहीं है।

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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति नवीन चावला की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि विस्तृत आदेश बाद में दिया जाएगा। अदालत दो अधिवक्ताओं पाराशर नारायण शर्मा और कैप्टन गुरविंदर सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें वकील ने तर्क दिया कि चुनावी घोषणापत्र में बिना किसी काम के नकद की पेशकश को अवैध घोषित किया जाना चाहिए।
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उच्च न्यायालय ने पहले चुनाव आयोग से सवाल किया था कि वह उन राजनीतिक दलों के खिलाफ कार्रवाई करने से क्यों कतरा रहा है जो भ्रष्ट आचरण पर उसके दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर रहे थे और एक जनहित याचिका पर जवाब मांगा था। पीठ ने यह आदेश चुनाव आयोग के वकील के तर्क पर दिया कि आयोग पहले ही भ्रष्ट आचरण के संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर चुका है और उसे राजनीतिक दलों को भेजे का चुके हैं।
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अदालत ने पहले नोटिस जारी किया था और याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा था, जिसमें कहा गया था कि वोट के वादे के लिए इस तरह का नोट जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 123 का उल्लंघन है जो भ्रष्ट आचरण और रिश्वतखोरी से संबंधित है।


पीठ ने दो राजनीतिक दलों भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और तेलुगु देशम पार्टी से भी जवाब मांगा था क्योंकि याचिका में कहा गया था कि 2019 के आम चुनाव में कांग्रेस व टीडीपी ने कुछ वर्गों को नकद की पेशकश की थी। कांग्रेस ने न्यूनतम आर्य योजना और 72,000 रुपये (वार्षिक) देने की पेशकश की। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा था, कोविड में लोगों के खातों में पैसा डाला गया। लेकिन यह एक असाधारण स्थिति थी। अगर राजनीतिक दल किसी काम के खिलाफ नहीं पैसा देने का चलन शुरू करेंगे तो हमारे उद्योग, कृषि खत्म हो जाएंगे।

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