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Delhi HC: राज ठाकरे को राहत, हेट स्पीच मामले में समन खारिज, कोर्ट ने कहा- धार्मिक भावनाएं इतनी नाजुक नहीं
Thu, 27 Apr 2023 09:37 PM IST
देव कश्यप
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Thu, 27 Apr 2023 09:37 PM IST
सार
न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने कहा कि भारत की एकता इसके विभिन्न धर्मों, आस्थाओं और भाषाओं के "सह-अस्तित्व" में निहित है और वह धर्म और आस्था, जो सदियों से जीवित है और रहेगी, मनुष्य की तरह नाजुक नहीं हैं।
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दिल्ली हाईकोर्ट।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट से महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे को राहत मिली। हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे को बोकारो की एक अदालत द्वारा कथित अभद्र भाषा (Hate Speech) के मामले में जारी किए गए समन को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि आस्था और धर्म का पालन करना अधिक लचीला है और इसे किसी व्यक्ति के विचारों से आहत या उकसाया नहीं जा सकता है। अदालत ने यह आदेश 13 मार्च को दिया था, जिसे गुरुवार को जारी किया गया।
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हाईकोर्ट ने बोकारो अदालत द्वारा जारी समन को किया रद्द
न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने कहा कि भारत की एकता इसके विभिन्न धर्मों, आस्थाओं और भाषाओं के "सह-अस्तित्व" में निहित है और वह धर्म और आस्था, जो सदियों से जीवित है और रहेगी, मनुष्य की तरह नाजुक नहीं हैं। एक अलग आदेश में न्यायाधीश ने भारतीय दंड संहिता के तहत हत्या, दंगा और अभद्र भाषा के कथित अपराधों के लिए ठाकरे को धनबाद की एक अदालत द्वारा जारी किए गए समन को भी रद्द कर दिया।
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आपराधिक शिकायत खारिज करने से इनकार
हाईकोर्ट ने कहा कि बोकारो अदालत द्वारा 2008 में पारित समन आदेश केंद्र या झारखंड सरकार की पूर्व मंजूरी की कमी के कारण बरकरार नहीं रखा जा सकता है। लेकिन IPC की धारा 153A (विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना आदि) और 153B (आरोप, राष्ट्रीय-एकीकरण के प्रतिकूल दावे) के तहत कथित अपराधों के लिए ठाकरे के खिलाफ दायर आपराधिक शिकायत को खारिज करने से इनकार कर दिया।
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यह मामला ठाकरे के 2008 के एक भाषण से जुड़ा हुआ है जब उन्होंने कथित तौर पर 'छठ पूजा' को एक "नाटक" और "संख्यात्मक शक्ति का प्रदर्शन" की संज्ञा दी थी। छठ पूजा हिंदुओं का एक त्योहार है और यह बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में विशेष तौर पर मनाया जाता है।
हाईकोर्ट में ठाकरे का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता अरुणाभ चौधरी और अनुपम लाल दास ने किया। कथित बयान के संबंध में कई मामले बाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा विभिन्न राज्यों से दिल्ली स्थानांतरित कर दिए गए थे। अलग-अलग आदेशों में अदालत ने त्योहार को लेकर किए गए टिप्पणी पर छह अन्य लंबित आपराधिक शिकायतों में ठाकरे को जारी किए गए समन को भी रद्द कर दिया, लेकिन शिकायतों में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
धनबाद अदालत में की गई शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अक्टूबर 2008 में ठाकरे के भाषण के बाद कई लोग जबरन हावड़ा-बॉम्बे मेल में घुस गए थे और हंगामा किया था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। अदालत ने 2008 और 2009 में पारित समन आदेशों को दंड प्रक्रिया संहिता के उल्लंघन और केंद्र या राज्य सरकार द्वारा मंजूरी की कमी के आधार पर रद्द कर दिया।