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अविवाहित महिलाओं को गर्भपात के अधिकार पर कोर्ट ने केंद्र सरकार को भेजा नोटिस
Wed, 29 May 2019 12:11 AM IST
संदीप भट्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संदीप भट्ट
Updated Wed, 29 May 2019 12:11 AM IST
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हाईकोर्ट ने गर्भपात संबंधी कानून में संशोधन और अविवाहित महिलाओं को कानूनी रूप से गर्भपात की अनुमति प्रदान करने के मुद्दे पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में आपात स्थिति में गर्भपात की सीमा 20 से बढ़ाकर 24 या 26 सप्ताह करने की भी मांग की गई है। मौजूदा कानून के तहत 20 हफ्ते से अधिक के भ्रूण का गर्भपात नहीं किया जा सकता।
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मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति बृजेश सेठी की खंडपीठ ने अधिवक्ता अमित साहनी की याचिका पर केंद्र सरकार व राष्ट्रीय महिला आयोग को नोटिस जारी किया है। याचिका पर अगली सुनवाई 6 अगस्त को होगी।
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जनहित याचिका में कहा गया है कि स्वास्थ्य मंत्रालय, कानून व विधि मंत्रालय से पूछा जाए कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेनेंसी एक्ट 1971 के उस प्रावधान में संशोधन कब किया जाएगा, जो 20 हफ्ते से अधिक का गर्भपात कराने की अनुमति नहीं देता। इस प्रावधान में संशोधन का प्रस्ताव वर्ष 2014 में किया गया था।
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कानून केवल दुष्कर्म या गर्भ निरोधकों के नाकाम होने पर गर्भ के मामलों का निबटारा करता है। यह अविवाहित युवतियों व विधवाओं के गर्भपात के मुद्दे पर खामोश है। इन महिलाओं को भी गर्भपात कराने का अधिकार दिया जाए।