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मलेरिया से बचना है तो पालिए गंबूसिया मछली, कर देती है रोग के कारणों का सफाया
अमित शर्मा, नई दिल्ली
Updated Thu, 26 Jul 2018 08:12 PM IST
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गंबूसिया मछली
मछली खाने से सेहत बनती है, यह तो सभी जानते हैं, लेकिन मछली पालने से बीमारी दूर रहती है, यह जानकारी कई लोगों को चौंकाने वाली हो सकती है। लेकिन यह सच है और स्वयं सरकार भी इसके प्रयोग को बढ़ावा दे रही है।
दरअसल, गंबूसिया नाम की इस मछली की खासियत होती है कि यह पानी में पैदा होने वाले मच्छर के लार्वा को खा जाती है। इससे मच्छर पैदा नहीं होते और आसपास के लोगों को मच्छरों से पैदा होने वाली बीमारियों मलेरिया, डेंगू और चिकुनगुनिया होने का खतरा कम हो जाता है।
सरकार कर रही इस्तेमाल
दिल्ली में मच्छरों से पैदा होने वाली बीमारी बहुत ज्यादा होती है। डेंगू और चिकुनगुनिया कभी-कभी महामारी जैसा रुप ले लेते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस वर्ष भी राजधानी में मच्छरों की बीमारी का प्रकोप हो सकता है। यही कारण है कि सरकार मच्छरों के ब्रीडिंग को हर स्तर पर रोकने की कोशिश कर रही है। इसके लिए जगह-जगह पर दवाइयों का छिड़काव किया जा रहा है।
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लेकिन रसायनों के बहुत ज्यादा उपयोग से भी नुकसान होने की आशंका बनी रहती है। यही कारण है कि सरकार जैवीय तरीके से मच्छरों की ब्रीडिंग रोकने की कोशिश कर रही है। इसी कोशिश के मद्देनजर दिल्ली सरकार गंबूसिया मछली को हर उस जगह पर डालने की कोशिश कर रही है जहां मच्छर पैदा हो सकते हैं।
गंबूसिया की खासियत
गंबूसिया मछली साफ पानी में रहती है। यह जल की ऊपरी सतह पर रहती है जहां मच्छर के लार्वा रहते हैं। गंबूसिया को मच्छरों के लार्वा विशेषकर पसंद होते हैं, इसलिए ऐसे पानी में लार्वा पैदा होते ही यह उनको खा जाती है।
एक गंबूसिया मछली रोज 100 से 300 लार्वा तक खा सकती है, इसलिए अपने लगभग पांच साल के जीवनकाल में यह लाखों लार्वा का खात्मा कर देती है। इसकी छोटी साइज (4.5cm-6.8cm) के कारण इसे एक्वेरियम में भी पाला जा सकता है।
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दरअसल, गंबूसिया नाम की इस मछली की खासियत होती है कि यह पानी में पैदा होने वाले मच्छर के लार्वा को खा जाती है। इससे मच्छर पैदा नहीं होते और आसपास के लोगों को मच्छरों से पैदा होने वाली बीमारियों मलेरिया, डेंगू और चिकुनगुनिया होने का खतरा कम हो जाता है।
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सरकार कर रही इस्तेमाल
दिल्ली में मच्छरों से पैदा होने वाली बीमारी बहुत ज्यादा होती है। डेंगू और चिकुनगुनिया कभी-कभी महामारी जैसा रुप ले लेते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस वर्ष भी राजधानी में मच्छरों की बीमारी का प्रकोप हो सकता है। यही कारण है कि सरकार मच्छरों के ब्रीडिंग को हर स्तर पर रोकने की कोशिश कर रही है। इसके लिए जगह-जगह पर दवाइयों का छिड़काव किया जा रहा है।
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लेकिन रसायनों के बहुत ज्यादा उपयोग से भी नुकसान होने की आशंका बनी रहती है। यही कारण है कि सरकार जैवीय तरीके से मच्छरों की ब्रीडिंग रोकने की कोशिश कर रही है। इसी कोशिश के मद्देनजर दिल्ली सरकार गंबूसिया मछली को हर उस जगह पर डालने की कोशिश कर रही है जहां मच्छर पैदा हो सकते हैं।
गंबूसिया की खासियत
गंबूसिया मछली साफ पानी में रहती है। यह जल की ऊपरी सतह पर रहती है जहां मच्छर के लार्वा रहते हैं। गंबूसिया को मच्छरों के लार्वा विशेषकर पसंद होते हैं, इसलिए ऐसे पानी में लार्वा पैदा होते ही यह उनको खा जाती है।
एक गंबूसिया मछली रोज 100 से 300 लार्वा तक खा सकती है, इसलिए अपने लगभग पांच साल के जीवनकाल में यह लाखों लार्वा का खात्मा कर देती है। इसकी छोटी साइज (4.5cm-6.8cm) के कारण इसे एक्वेरियम में भी पाला जा सकता है।
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गंबूसिया के बारे में क्या कहते हैं एक्सपर्ट
गंबूसिया मछली
दिल्ली में बनी हैं हैचरीज
गंबूसिया मछली की इसी उपयोगिता को देखते हुए दिल्ली सरकार ने इसे बढ़ावा देने का फैसला किया। सरकार कई जगहों (बेला रोड, कुदेशिया बाग, सुभद्रा कॉलोनी, जेएलएन मार्ग के टूरिस्ट कैंप और गुलाबी बाग) पर गंबूसिया मछली की ब्रीडिंग कराई जा रही है। इन्हीं जगहों से लाकर दिल्ली की सभी बड़ी इमारतों, फव्वारों, जल रखने के बड़े स्थानों पर डाली जा रही है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
नॉर्थ एमसीडी के साथ काम कर रही प्रसिद्ध कीट विज्ञानी बबिता बिष्ट ने बताया कि गंबूसिया मलेरिया को खत्म करने में बड़ी मदद कर सकती है। सरकार का लक्ष्य है कि 2020 तक दिल्ली से और 2030 तक भारत से मलेरिया को पूरी तरह खत्म कर दिया जाए। हलांकि यह डेंगू को खत्म करने में उतना कारगर नहीं है क्योंकि डेंगू का मच्छर छोटी, साफ जगहों पर रहना पसंद करता है जैसे कूलर, एसी, बड़े पानी के बर्तन जहां गंबूसिया को पालना व्यावहारिक नहीं है।
गंबूसिया मछली की इसी उपयोगिता को देखते हुए दिल्ली सरकार ने इसे बढ़ावा देने का फैसला किया। सरकार कई जगहों (बेला रोड, कुदेशिया बाग, सुभद्रा कॉलोनी, जेएलएन मार्ग के टूरिस्ट कैंप और गुलाबी बाग) पर गंबूसिया मछली की ब्रीडिंग कराई जा रही है। इन्हीं जगहों से लाकर दिल्ली की सभी बड़ी इमारतों, फव्वारों, जल रखने के बड़े स्थानों पर डाली जा रही है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
नॉर्थ एमसीडी के साथ काम कर रही प्रसिद्ध कीट विज्ञानी बबिता बिष्ट ने बताया कि गंबूसिया मलेरिया को खत्म करने में बड़ी मदद कर सकती है। सरकार का लक्ष्य है कि 2020 तक दिल्ली से और 2030 तक भारत से मलेरिया को पूरी तरह खत्म कर दिया जाए। हलांकि यह डेंगू को खत्म करने में उतना कारगर नहीं है क्योंकि डेंगू का मच्छर छोटी, साफ जगहों पर रहना पसंद करता है जैसे कूलर, एसी, बड़े पानी के बर्तन जहां गंबूसिया को पालना व्यावहारिक नहीं है।