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कोरोना संकट 2.0: देश का एक ऐसा राज्य जहां कोरोना मरीजों के लिए अस्पतालों में खूब बेड हैं खाली

Tue, 13 Apr 2021 01:19 PM IST
Harendra Chaudhary आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली
आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 13 Apr 2021 01:19 PM IST
सार

  • देश की राजधानी दिल्ली में अभी भी सरकारी अस्पतालों के 50 फीसदी बेड खाली।
  • साढ़े पांच हजार बेड की क्षमता वाले कोविड केयर केंद्र में 5200 बेड खाली
  • देश के कई राज्यों में कोविड मरीजों को नहीं मिल पा रहे अस्पताल में बेड

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Delhi government hospitals have 50 percent of the beds are still vacant for Corona patients due to the strict action of the government
कोरोना संक्रमितों के लिए बेड्स - फोटो : PTI (फाइल फोटो)

विस्तार

जब पूरे देश में कोरोना मरीजों के लिए अस्पतालों में बेड के लिए हाहाकार मची हुई है। वही देश में एक ऐसा राज्य भी है जहां के अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए हजारों की संख्या में बेड खाली हैं। देश की राजधानी दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में 50 फ़ीसदी बेड कोरोना के मरीजों के लिए अभी भी खाली हैं। सरकार के सख्त रवैये के चलते न सिर्फ सरकारी बल्कि निजी अस्पतालों में भी मरीजों के लिए बेड की उपलब्धता बढ़ाई गयी है। वहीं दिल्ली के पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश समेत मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब और महाराष्ट्र में बेड न मिल पाने के चलते मरीज बीच राह में ही अपना दम तोड़ रहे हैं। अब सवाल ये उठता है अगर दिल्ली में सरकारी अस्पतालों में बेहतर मैनेजमेंट के चलते मरीजों के लिए बेड उपलब्ध हैं, तो देश के अन्य राज्यों में सरकारें मरीजों के लिए बेड की उपलब्धता क्यों नहीं करा पा रही हैं।

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दिल्ली में संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने 14 निजी अस्पतालों को कोविड विशेष घोषित किया। जबकि 19 निजी अस्पतालों में 80 फीसदी और 82 अस्पतालों में 60 फीसदी आईसीयू बेड कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित किए। इस समय कुल 12692 बेड हैं। इनमे से 7778 भरे हुए हैं। जबकि पांच हजार से ज्यादा बेड अभी भी सरकारी अस्पताल में कोविड के मरीजों के लिए खाली हैं।

सिर्फ सरकारी अस्पतालों में ही नहीं बल्कि दिल्ली सरकार ने जो कोविड केयर केंद्र बनाए हैं वहां भी 90 फीसदी बेड मरीजों के लिए खाली है। दिल्ली के कोविड केयर केंद्रों में इस वक़्त 5500 बेड हैं। जबकि इन केंद्रों में महज 310 मरीज ही दाखिल हैं।

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दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन कहते हैं कि उनकी सरकार ने पिछले सप्ताह पांच हजार बेड बढ़ाए हैं। 50 फीसदी बेड अभी भी मरीजों के लिए उपलब्ध हैं। जबकि सरकार कोविड मरीजों के लिए और बेड बढ़ाने की तैयारी कर रही है। दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार से भी उसके अस्पतालों में बेड बढ़ाने के लिए संपर्क किया है। स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन कहते हैं कि उनकी सरकार दिल्ली में और भी कई कोविड केयर केंद्र बनाने की तैयारी कर रही है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के महाराष्ट्र चैप्टर के डॉक्टर छगन भाऊराव देशमुख कहते हैं कि महाराष्ट्र के सरकारी अस्पतालों में बेहतर कोविड मैनेजमेंट नहीं दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि यहां के अस्पतालों तक पहुंचने से पहले ही मरीज दम तोड़ रहे हैं। डॉ. देशमुख का कहना है सरकार को बेहतर मैनेजमेंट अस्पतालों में करना चाहिए ताकि मरीजों को इलाज मिल सके और उनको बचाया जा सके।

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उत्तर प्रदेश के प्रांतीय चिकित्सा संवर्ग के डॉक्टर अशोक यादव कहते हैं सरकार का मैनेजमेंट इतना फेल है कि वह अस्पताल होने के बाद भी मरीजों को बेड मुहैया नहीं करा पा रहे हैं। डॉक्टर यादव का आरोप है कि सरकार कोरोना के मरीजों के इलाज में पूरी तरीके से फेल हो चुकी है। सरकार के मैनेजमेंट का असर मध्यप्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में भी दिख रहा है। इन राज्यों में भी मरीजों को वक्त पर अस्पताल में इलाज नहीं मिल पाता है जबकि इन राज्यों में अस्पतालों की संख्या और बेड की संख्या अच्छी खासी है।

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