Delhi Election Results: दिल्ली वालों पर चला 'मोदी मैजिक', शराब घोटाले में डूबी 'आप'
भाजपा ने अपनी चुनावी समीकरणों में हर एक वर्ग के लिए विशेष योजना तैयार की थी। महिलाओं को लुभाने के लिए उसने ₹2500 हर महीने देने का वादा किया, युवाओं को लुभाने के लिए 50,000 सरकारी नौकरियों का वादा किया, 20 लाख स्व रोजगार देने की गारंटी दी।
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एक नया इतिहास रचते हुए भाजपा ने दिल्ली की सत्ता पर कब्जा जमा लिया है। भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड बहुमत हासिल करते हुए आम आदमी पार्टी के बड़े सुरमाओं अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को भी हरा दिया है। भारतीय जनता पार्टी की यह जीत केवल इस मायने में ऐतिहासिक नहीं है कि उसने 27 साल बाद दिल्ली में जीत हासिल किया है, बल्कि यह इस अर्थ में भी महत्वपूर्ण है कि अरविंद केजरीवाल की मुफ्त योजनाओं के कारण जिन्हें हराना लगभग नामुमकिन माना जा रहा था, भाजपा ने उन्हें भी चुनाव में हरा दिया है। यह दिल्ली की राजनीति में एक बड़े बदलाव का आगाज है। भाजपा के सामने दिल्ली में बड़ी लकीर खींचने की चुनौती रहेगी।
भाजपा ने अपनी चुनावी समीकरणों में हर एक वर्ग के लिए विशेष योजना तैयार की थी। महिलाओं को लुभाने के लिए उसने ₹2500 हर महीने देने का वादा किया, युवाओं को लुभाने के लिए 50,000 सरकारी नौकरियों का वादा किया, 20 लाख स्व रोजगार देने की गारंटी दी। झुग्गियों में रहने वाले गरीबों को अपने ही स्थान पर पक्के फ्लैट देने का वादा किया और यमुना का पानी और दिल्ली की हवा साफ करने का भी वादा किया। चुनावी परिणाम यह बता रहे हैं कि भाजपा का दांव बहुत कारगर साबित हुआ और जनता ने दिल्ली को विकसित करने की जिम्मेदारी मोदी के हाथों में सौंप दी।
भाजपा का दांव इस कारण से भी बहुत कारगर हुआ, क्योंकि अरविंद केजरीवाल उन अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पाए जिन्हें जनता के मन जगाकर वे सत्ता में पहुंचे थे। उन्होंने जिस स्वच्छ साफ नैतिकता भारी राजनीति का वादा किया था, वह उन उम्मीदों को पूरा करने में बुरी तरह असफल रहे। कट्टर ईमानदार की उनकी छवि पूरी तरह मटियामेट हो चुकी है। आज अरविंद केजरीवाल के ऊपर केवल शराब घोटाले के आरोप ही नहीं है, उनके ऊपर शीश महल का वह दाग भी है जो आम आदमी के नाम पर की गई सादगी भरी राजनीति को मुंह चिढ़ा रही थी।
कांग्रेस एक्स फैक्टर
जनता ने चुनाव में कांग्रेस को पूरी तरीके से खारिज कर दिया है। कांग्रेस एक भी सीट जीतने की स्थिति में नहीं दिखाई पड़ रही है। जनता का वह समझदारी भरा फैसला है जिसमें उसने किसी मोल भाव की राजनीति की संभावना को समाप्त कर दिया है। उसने स्पष्ट जनादेश दिया है। अब किसी के पास कोई बहाना नहीं है। लेकिन इसके बाद भी कहीं ना कहीं अरविंद केजरीवाल को परास्त करने में कांग्रेस की भूमिका बड़ी कारगर साबित हुई है उनके उम्मीदवारों ने जो वोट हासिल किया है। उनसे भाजपा को बढ़त बनाने में आसानी हुई है।
राहुल गांधी को अब यह एक बार फिर से सोचना पड़ेगा कि कांग्रेस को मजबूत करने के लिए उन्हें किन समीकरणों पर भरोसा करना चाहिए। दिल्ली में उनकी कोई भी योजना कारगर साबित नहीं हुई है। शुरुआती दौर में कांग्रेस जिस मजबूती के साथ आगे बढ़ रही थी, उस पर ब्रेक लगाने का काम भी कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने ही किया है। माना जाता है कि इंडिया गठबंधन की राजनीतिक मजबूरियों के चलते राहुल गांधी ने केजरीवाल को वॉक ओवर देने की कोशिश की, लेकिन जनता ने उनके इस दांव को स्वीकार नहीं किया। कांग्रेस लगातार तीसरी बार शून्य पर सिमट सकती है।