देखो अपना देश: युवाओं को देसी टूरिज्म की तरफ खींचने की तैयारी, बौद्ध सर्किट पर बढ़ा सरकार का फोकस
रक्षा एवं पर्यटन राज्य मंत्री अजय भट्ट ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम की रूपरेखा हम पहली बार बना रहे हैं। हम चाहते हैं कि पहले हम अपने देश को अच्छी तरह से देखें। हमारे देश में काफी अच्छे डेस्टिनेशन और धार्मिक स्थल हैं। जब हमने अपना देश ही नहीं देखा तो हमने क्या देखा।
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भारत सदियों से दूसरे देशों के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। जिक्र कश्मीर की खूबसूरत वादियों का हो, दार्जिलिंग-असम के मशहूर चाय बागानों का, हर विदेशी यहां के दिलकश नजारों को देखने का तलबगार होता है। इनके अलावा धार्मिक स्थलों के प्रति भी विदेशियों का काफी रुझान रहता है, जिनमें बौद्ध धर्म से संबंधित कई स्थान बेहद अहम हैं। दरअसल, केंद्र सरकार अब इन्हीं धार्मिक स्थलों के प्रति विदेशियों के साथ-साथ भारतीय नागरिकों की रुचि बढ़ाने की कोशिश कर रही है और सबसे ज्यादा फोकस युवाओं पर है। ऐसे में सरकार ने 'देखो अपना देश' अभियान की शुरुआत की है, जिसके तहत स्पेशल टूरिस्ट ट्रेनें चलाकर लोगों को धार्मिक स्थलों से जोड़ने की मुहिम शुरू की गई है। इसके चलते बौद्ध धर्म से संबंधित स्थलों पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है।
यूपी-बिहार में कई बौद्ध स्थल
वैसे तो उत्तर प्रदेश और बिहार में कई समानताएं हैं, जिसकी वजह से दोनों प्रदेशों का आपस में जुड़ाव रहता है, लेकिन इस रिश्तों को दोनों राज्यों में मौजूद बौद्ध स्थल और ज्यादा मजबूत करते हैं। बोधगया, नालंदा, राजगीर, वैशाली, सारनाथ, श्रावस्ती, कुशीनगर, कौशांबी, सनकिसा और कपिलवस्तु आदि बिहार व उत्तर प्रदेश के ऐसे मशहूर बौद्ध स्थल हैं, जिन पर केंद्र सरकार ने अब फोकस बढ़ा दिया है। इसके तहत इन सभी धार्मिक स्थलों को लगातार विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है और पर्यटकों को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं देने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए सरकार अब तक काफी बजट भी जारी कर चुकी है। उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट में आने वाले श्रावस्ती, कुशीनगर और कपिलवस्तु में इंफ्रास्ट्रक्चर काफी तेजी से तैयार किया जा रहा है। वहीं, बिहार के बोधगया में कल्चरल सेंटर का काम जोर-शोर से जारी है।
बौद्ध स्थलों की कनेक्टिविटी सुधारने पर भी जोर
सरकार का फोकस बौद्ध पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी सुधारने पर भी है। ऐसे में हवाई, सड़क और रेल तीनों मार्गों को दुरुस्त करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। दरअसल, उत्तर प्रदेश और बिहार के बौद्ध पर्यटन स्थल फिलहाल सड़क और रेल मार्ग से जुड़े हुए हैं, लेकिन इन्हें और बेहतर किया जा रहा है। इसके अलावा बौद्ध सर्किट स्पेशल ट्रेन के अलावा गया से नई दिल्ली, कोलकाता और वाराणसी आदि के लिए 88 जोड़ी ट्रेनें शुरू की गई हैं। इनके अलावा प्रयागराज, वाराणसी, पटना, लखनऊ, गोरखपुर और गया रेलवे स्टेशनों पर विशेष सुविधाएं भी बढ़ाई जा रही हैं।
बौद्ध सर्किट पर अब तक इतना खर्च
| राज्य | प्रोजेक्ट | प्रस्तावित राशि | जारी फंड | कार्य की प्रगति |
| मध्यप्रदेश | सांची-सतना-रीवा-मंदसौर-धार का विकास | 74.02 करोड़ | 69.08 करोड़ | 100 फीसदी |
| उत्तर प्रदेश | श्रावस्ती-कुशीनगर और कपिलवस्तु का विकास | 99.97 करोड़ | 72.56 करोड़ | 71 फीसदी |
| बिहार | बोधगया में कंवेंशन सेंटर का निर्माण | 98.73 करोड़ | 78.91 करोड़ | 90 फीसदी |
| गुजरात | जूनागढ़-गिर सोमनाथ-भरूच-कच्छ-भावनगर-राजकोट-मेहसाणा का विकास | 28.67 करोड़ | 19.21 करोड़ | 94 फीसदी |
| आंध्र प्रदेश | शालीहुंदम-थोतलाकोंडा-बावीकोंडा-बोज्जनकोंडा-अमरावती-अनुपु का विकास | 24.14 करोड़ | 26.17 करोड़ | 86 फीसदी |
| उत्तर प्रदेश | अन्य सुविधाएं | 17.93 करोड़ | 12.29 करोड़ | 73 फीसदी |
| कुल | 343.46 करोड़ | 278.22 करोड़ |
युवाओं पर इस वजह से फोकस
कोरोना काल के दौरान अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर रोक के मद्देनजर पर्यटन क्षेत्र को काफी नुकसान हुआ है। ऐसे में सरकार का फोकस देश के लोगों को स्वदेश दर्शन के प्रति आकर्षित करने पर है। इस संबंध में रक्षा एवं पर्यटन राज्य मंत्री अजय भट्ट ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम की रूपरेखा हम पहली बार बना रहे हैं। हम चाहते हैं कि पहले हम अपने देश को अच्छी तरह से देखें। हमारे देश में काफी अच्छे डेस्टिनेशन और धार्मिक स्थल हैं। जब हमने अपना देश ही नहीं देखा तो हमने क्या देखा। इसके तहत स्वदेश दर्शन यानी देखो अपना देश कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इसके तहत युवाओं का रुझान देसी पर्यटन के प्रति बढ़ाना है।
यह है सरकार की तैयारी
गौरतलब है कि बौद्ध सर्किट की बात करें तो हर साल सिर्फ बिहार के बोधगया में ही करीब साढ़े छह लाख पर्यटक पहुंचते हैं, जबकि देशभर के बौद्ध स्थलों में आने वालों का आंकड़ा 40 से 50 लाख के आसपास है। कोरोना काल में इस आंकड़े में काफी गिरावट जरूर आई है, लेकिन अब सरकार का फोकस इस संख्या को और ज्यादा बढ़ाने पर है। ऐसे में केंद्र सरकार लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलप कर रही है और सुविधाओं पर अपना ध्यान बढ़ा रही है।