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Defsat 2026: 'आधुनिक सैन्य अभियान पूरी तरह अंतरिक्ष आधारित', डिफेंस स्पेस एजेंसी के प्रमुख ने दी यह चेतावनी
Thu, 26 Feb 2026 05:32 AM IST
पवन पांडेय
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Thu, 26 Feb 2026 05:32 AM IST
सार
मानेकशॉ सेंटर में आयोजित 'डेफसैट-2026' सम्मेलन का विषय 'राष्ट्रीय सुरक्षा के केंद्र में अंतरिक्ष' रखा गया है। सैटकॉम इंडस्ट्री एसोसिएशन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में सशस्त्र बलों, इसरो, रक्षा मंत्रालय और वैश्विक अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन में रक्षा-अंतरिक्ष पारितंत्र को मजबूत बनाने और भविष्य की रणनीति पर व्यापक चर्चा की जा रही है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : FreePik
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विस्तार
डिफेंस स्पेस एजेंसी के महानिदेशक एयर वाइस मार्शल मनु मिधा ने देश की अंतरिक्ष सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि भारत का अंतरिक्ष बुनियादी ढांचा कमजोर हुआ या बाधित हुआ, तो देश की सुरक्षा व्यवस्था ठप हो सकती है। सामरिक अंधापन का सामना करना पड़ सकता है।
यह भी पढ़ें - सुरक्षा में सेंध की आशंका: बीएसएफ के ऑफिसर्स मेस से वाईफाई हटेगा, स्मार्ट टीवी भी किए जाएंगे बंद; मांगे विकल्प
मिधा रक्षा-अंतरिक्ष सम्मेलन 'डेफसैट-2026' को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक सैन्य अभियान पूरी तरह अंतरिक्ष आधारित संचार, नेविगेशन और खुफिया सूचनाओं पर निर्भर हैं। उपग्रह प्रणाली में किसी भी तरह की बाधा से सेनाओं की देखने, समझने और समय पर निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
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उनका कहना था कि युद्ध के समय सूचना और संचार की गति ही जीत और हार तय करती है। यदि यह तंत्र ठप हुआ तो सैन्य कार्रवाई गंभीर रूप से प्रभावित होगी। एयर वाइस मार्शल मिधा ने कहा कि अंतरिक्ष अब केवल थल, जल और वायु सेनाओं की सहायता करने वाला क्षेत्र नहीं रह गया है, बल्कि यह स्वयं एक प्रमुख युद्ध क्षेत्र बन चुका है। आने वाले समय में युद्ध अंतरिक्ष में भी लड़े और जीते जाएंगे। उन्होंने अंतरिक्ष को राष्ट्रीय सुरक्षा का केंद्रीय स्तंभ बताते हुए एक मजबूत रक्षा-अंतरिक्ष सिद्धांत तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विरोधी देश अपनी अंतरिक्ष क्षमताओं को तेजी से बढ़ा रहे
मिधा ने आगाह किया कि कई विरोधी देश अपनी अंतरिक्ष क्षमताओं को तेजी से बढ़ा रहे हैं और अंतरिक्ष में हमला करने वाली तकनीक भी विकसित कर रहे हैं। भारत को भविष्य के अंतरिक्ष युद्ध क्षेत्र में स्वयं को उनके बराबर या बेहतर साबित करना होगा। मिधा ने भारतीय उद्योग जगत से अपील की कि वे स्वदेशी और सुरक्षित अंतरिक्ष समाधान विकसित करें, ताकि किसी भी हमले की स्थिति में देश की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
यह भी पढ़ें - Andhra Pradesh: आंध्र प्रदेश में दूषित पानी से हाहाकार, श्रीकाकुलम में एक की मौत; 70 से अधिक अस्पताल में भर्ती
अंतरिक्ष राष्ट्रीय शक्ति का आधार स्तंभ
सेना में रणनीतिक योजना के अतिरिक्त महानिदेशक मेजर जनरल नीरज शुक्ला ने कहा कि भविष्य का युद्ध भले अंतरिक्ष या साइबर क्षेत्र से शुरू हो, लेकिन उसका सीधा प्रभाव जमीन की संप्रभुता पर पड़ेगा। इसलिए अंतरिक्ष राष्ट्रीय शक्ति का आधार स्तंभ है। आज उपग्रह और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से दुश्मन की गतिविधियों को समझना आसान हुआ है। ऐसे में जीत इस बात पर निर्भर करेगी कि कौन अधिक तेज और सटीक निर्णय लेता है। संख्या बल से अधिक अब निर्णय क्षमता की श्रेष्ठता मायने रखती है।
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मिधा रक्षा-अंतरिक्ष सम्मेलन 'डेफसैट-2026' को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक सैन्य अभियान पूरी तरह अंतरिक्ष आधारित संचार, नेविगेशन और खुफिया सूचनाओं पर निर्भर हैं। उपग्रह प्रणाली में किसी भी तरह की बाधा से सेनाओं की देखने, समझने और समय पर निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
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उनका कहना था कि युद्ध के समय सूचना और संचार की गति ही जीत और हार तय करती है। यदि यह तंत्र ठप हुआ तो सैन्य कार्रवाई गंभीर रूप से प्रभावित होगी। एयर वाइस मार्शल मिधा ने कहा कि अंतरिक्ष अब केवल थल, जल और वायु सेनाओं की सहायता करने वाला क्षेत्र नहीं रह गया है, बल्कि यह स्वयं एक प्रमुख युद्ध क्षेत्र बन चुका है। आने वाले समय में युद्ध अंतरिक्ष में भी लड़े और जीते जाएंगे। उन्होंने अंतरिक्ष को राष्ट्रीय सुरक्षा का केंद्रीय स्तंभ बताते हुए एक मजबूत रक्षा-अंतरिक्ष सिद्धांत तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विरोधी देश अपनी अंतरिक्ष क्षमताओं को तेजी से बढ़ा रहे
मिधा ने आगाह किया कि कई विरोधी देश अपनी अंतरिक्ष क्षमताओं को तेजी से बढ़ा रहे हैं और अंतरिक्ष में हमला करने वाली तकनीक भी विकसित कर रहे हैं। भारत को भविष्य के अंतरिक्ष युद्ध क्षेत्र में स्वयं को उनके बराबर या बेहतर साबित करना होगा। मिधा ने भारतीय उद्योग जगत से अपील की कि वे स्वदेशी और सुरक्षित अंतरिक्ष समाधान विकसित करें, ताकि किसी भी हमले की स्थिति में देश की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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अंतरिक्ष राष्ट्रीय शक्ति का आधार स्तंभ
सेना में रणनीतिक योजना के अतिरिक्त महानिदेशक मेजर जनरल नीरज शुक्ला ने कहा कि भविष्य का युद्ध भले अंतरिक्ष या साइबर क्षेत्र से शुरू हो, लेकिन उसका सीधा प्रभाव जमीन की संप्रभुता पर पड़ेगा। इसलिए अंतरिक्ष राष्ट्रीय शक्ति का आधार स्तंभ है। आज उपग्रह और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से दुश्मन की गतिविधियों को समझना आसान हुआ है। ऐसे में जीत इस बात पर निर्भर करेगी कि कौन अधिक तेज और सटीक निर्णय लेता है। संख्या बल से अधिक अब निर्णय क्षमता की श्रेष्ठता मायने रखती है।