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India-US: राजनाथ के अमेरिका दौरे से तेजस को मिलेंगे पंख, पीएम मोदी की यात्रा से पहले दुरुस्त करेंगे कील-कांटे!
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का अमेरिका दौरा बेहद महत्वपूर्ण
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अमर उजाला
विस्तार
भारत के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस एमके1ए (LCA MK1A) को जल्द ही अपना इंजन मिलने की उम्मीद है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जल्द ही अमेरिका के दौरे पर रवाना होने वाले हैं। सूत्रों का कहना है कि अपने इस पांच दिवसीय दौरे में रक्षा मंत्री अमेरिकी फर्म जनरल इलेक्ट्रिक की तरफ से हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को जीई-एफ404 टर्बोफैन इंजन की आपूर्ति में हो रही देरी के मुद्दे को अमेरिकी अधिकारियों के समक्ष उठाएंगे। भारतीय वायुसेना को तेजस एमके1ए की डिलीवरी इंजनों की सप्लाई में देरी के चलते लटक रही है। भारतीय वायु सेना को 31 मार्च 2024 तक पहले तेजस एमके1ए की डिलीवरी होनी थी, लेकिन इसमें लगभग 10 महीने की देरी हो रही है।सितंबर में पीएम मोदी जाएंगे अमेरिका
सूत्रों मे बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 23-26 अगस्त तक अमेरिका की चार दिवसीय यात्रा पर रवाना होंगे। रक्षा मंत्री 23 अगस्त को पेंटागन में अपने अमेरिकी समकक्ष डिफेंस सेक्रेटरी लॉयड ऑस्टिन के साथ रक्षा सहयोग को और मजबूत करेंगे। राजनाथ सिंह 23 से 26 अगस्त तक अमेरिका में रहेंगे। रक्षा मंत्री की यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सितंबर को अमेरिका की यात्रा पर रवाना होने वाले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्त राष्ट्र के भविष्य शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए 22 सितंबर को न्यूयॉर्क के लॉन्ग आइसलैंड पर भारतीय-अमेरिकी समुदाय को संबोधित करें। इसके बाद वे 26 सितंबर को उच्च स्तरीय संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र को संबोधित करेंगे। इस साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा 5 नवंबर को होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से कुछ समय पहले हो रही है।
10 माह लेट है तेजस के इंजनों की डिलीवरी
रक्षा मंत्री के इस दौरे में महत्वपूर्ण रक्षा सौदों में हो रही देरी पर भी चर्चा होगी। इनमें एलसीए तेजस एमके1ए को इंजन सप्लाई में हो रही देरी का मामला भी उठाया जाएगा। तेजस लड़ाकू विमानों के निर्माण के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) की तरफ से जीई-एफ404 टर्बोफैन इंजन की सप्लाई में देरी का सामना करना पड़ रहा है। एचएएल को 83 तेजस मार्क-1A फाइटर जेट के निर्माण के लिए F404 सीरीज के इंजनों की डिलीवरी का बेसब्री से इंतजार है। उम्मीद जताई जा रही है कि जीई के तरफ ये इंजन सितंबर में सप्लाई किए जा सकते हैं। हालांकि इंजन सप्लाई में देरी की वजह से तेजस की डिलीवरी 10 माह लेट है। रक्षा मंत्रालय ने 48,000 करोड़ रुपये के अनुबंध के तहत एचएलएच को 83 तेजस मार्क-1A की डिलीवरी का ऑर्डर दिया था। इस सौदे पर फरवरी 2021 में हस्ताक्षर किए गए थे। एचएएल को पहले तेजस मार्क-1A की डिलीवरी 31 मार्च 2024 तक करनी थी, इसके बाद लगातार डेडलाइन बढ़ाई जाती रही। वहीं अब इसकी नई डेडलाइन नवंबर 2024 तय की गई है।
LCA-MK-II के इंजन पर भी होगी बात
रक्षा सूत्रों ने बताया कि भारत तेजस मार्क-2 वर्जन लाने की भी तैयारी कर रहा है। इसमें भी जीई F414 जेट इंजन लगाया जाना है। भारत की कोशिश रहेगी कि भारत-अमेरिका मिल कर इस इंजन का संयुक्त उत्पादन करें। साथ ही, भारत जीई के साथ कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर करने से पहले ही तेजस मार्क-2 के प्रोटोटाइप की फ्लाइट टेस्टिंग के लिए एडवांस में कुछ जीई एफ-414 इंजन देने की बात कही है। LCA-MK-II का प्रोटोटाइप 2025 की शुरुआत तक आना था, लेकिन उसमें एक साल की देरी हो रही है। सूत्रों का कहना है कि राजनाथ सिंह रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन के साथ इस मामले पर चर्चा करेंगे, ताकि इंजन की सप्लाई में तेजी लाई जा सके। इसके अलावा राजनाथ सिंह अमेरिका में डिफेंस कंपनियों के गढ़ टेनेसी भी जाएंगे। जहां नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन, एल3 हैरिस, कोलिन्स एयरोस्पेस, बोइंग, रेथियॉन और प्रैट एंड व्हिटनी जैसी कंपनियों की फैक्ट्रियां हैं।
एमक्यू-9बी प्रीडेटर ड्रोन डील को लेकर होगी चर्चा
रक्षा सूत्रों के मुताबिक तेजस इंजन मुद्दे के अलावा, इस दौरे में उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा होगी। दोनों देश जेवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल और स्ट्राइकर आर्मर्ड व्हीकल जैसे प्रमुख रक्षा प्लेटफार्मों के सह-उत्पादन को लेकर भी बात होगी। स्ट्राइकर के को-प्रोडक्शन में भारत की गहरी दिलचस्पी है, देश की सेनाओं की जमीनी लड़ाकू क्षमताओं में अहम बढ़ोतरी करेगी। सूत्रों ने बताया कि एमक्यू-9बी प्रीडेटर ड्रोन सौदे को लेकर भी इस दौरे में चर्चा होगी। हाल ही में 31 जुलाई को भारतीय डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) ने कुछ सशोधनों के साथ एमक्यू-9बी प्रीडेटर ड्रोन डील को मंजूरी दी है। सूत्रों के मुताबिक प्रीडेटर पर डीआरडीओ के बनाए एंटी-शिपिंग मिसाइल को लगाने की बात भी कही गई थी। लेकिन प्रीडेटर पर डीआरडीओ मिसाइल लगाने को लेकर जनरल एटॉमिक्स ने अड़ंगा लगाते हुए इसे लगाने के बदले मोटी रकम की मांग की। प्रिडेटर डील के अलावा, 3.9 बिलियन डॉलर की कामत वाले मिसाइलों और गाइडेड बमों के साथ 31 यूएवी की खरीद को लेकर भी बातचीत हो सकती है।
क्या है हॉकआई 360?
सूत्रों ने बताया कि मोदी सरकार ने भारतीय नौसेना को इंडो-पैसिफिक पार्टनरशिप ऑफ मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस (IPMDA) में शामिल होने की मंजूरी दे दी है, जिसका एलान मई 2022 में क्वाड देशों ने किया था। इसके तहत हॉकआई 360 के साथ गठजोड़ किया जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि भारतीय नौसेना सैटेलाइट के जरिए क्वाड देशों के साथ हिंद महासागर क्षेत्र में हॉकआई 360 कॉमर्शियल ऑपरेटर के साथ मिल कर काम करेगी। हॉकआई के पास 36 सैटेलाइट हैं और यह क्वाड देशों को डार्क शिपिंग, आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी, हथियारों की तस्करी और उन विरोधियों के बारे में पूरी जानकारी प्रदान करेगा, जिनके जहाज इंडो-पैसिफिक में गुप्त निगरानी करते समय अपने ट्रांसपोंडर बंद कर देते हैं। हॉकआई 360 सैटेलाइट किसी भी ऐसे जहाज से निकलने वाली रेडियो फ्रिक्वेंसी को पकड़ लेते हैं, जिसने जानबूझकर अपने ट्रांसपोंडर बंद कर दिए हों। अदन की खाड़ी के आसपास जहाजों पर हमला करने वाले समुद्री डाकुओं और अरब सागर में पश्चिमी युद्धपोतों को निशाना बनाने के लिए नावों का प्रयोग करने वाले ज्यादातर आतंकी गुट अपने जहाजों को किसी की नजर से छिपाने के लिए इन्हीं तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं।