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Indian Military Defence: प्रलय जैसी बैलिस्टिक मिसाइल से बढ़ेगी सुरक्षाबलों की ताकत, DRDO की भूमिका बेहद अहम
Sun, 05 Nov 2023 10:20 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sun, 05 Nov 2023 10:20 PM IST
सार
भारत की सुरक्षा के नजरिए से डीआरडीओ जैसे संगठन की भूमिका भी बेहद उल्लेखनीय है। ताजा घटनाक्रम में रक्षा मामलों से जुड़े सूत्रों ने बताया है कि डीआरडीओ के प्रलय मिसाइल के बाद मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का विकल्प चुनने पर मंथन हो रहा है।
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डीआरडीओ और भारतीय सुरक्षाबलों के पास रॉकेट (फाइल)
- फोटो : ANI
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विस्तार
भारत की सीमाओं की रक्षा करने में सैनिकों (थल, जल और वायुसेना) के अलावा रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की भूमिका भी बेहद अहम है। रक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों ने बताया है कि आने वाले समय में सेना की रॉकेट फोर्स के पास प्रलय जैली बैलिस्टिक मिसाइल के अलावा मध्यम दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों की ताकत भी होगी। प्रलय के बाद, सेना की रॉकेट बल यूनिट के लिए पारंपरिक भूमिकाओं में मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का विकल्प चुना जा सकता है।
सेना के रॉकेट बल में प्रलय को शामिल करने पर जोर
खबरों के अनुसार, हाल के दिनों में रक्षा बलों को डीआरडीओ के वैज्ञानिकों की तरफ से विकसित किए गए प्रलय बैलिस्टिक मिसाइलों को शामिल करने की मंजूरी मिली है। सूत्रों के मुताबिक सेना के रॉकेट बल में पारंपरिक भूमिकाओं में इस्तेमाल करने के लिए महत्वपूर्ण संख्या में प्रलय को शामिल किया जाएगा।
पारंपरिक भूमिकाओं में 1,500 किमी तक का लक्ष्य
सुरक्षा प्रतिष्ठान- डीआरडीओ से जुड़े सूत्रों के हवाले से एएनआई की रिपोर्ट में कहा गया, सुरक्षाबल गैर-परमाणु पारंपरिक भूमिकाओं में इन बैलिस्टिक मिसाइलों का उपयोग करके मध्यम दूरी पर हमला करने की क्षमता विकसित करने की दिशा में काम कर रही हैं। प्रलय मिसाइल की मारक क्षमता 150-500 किमी के बीच के लक्ष्य हैं। सूत्रों ने बताया कि सेनाएं लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के विकल्प पर विचार कर सकती हैं। केवल पारंपरिक भूमिकाओं में 1,500 किमी तक का लक्ष्य भेद सकती हैं।
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चीन और पाकिस्तान की रणनीति
मिसाइलें मध्यम दूरी की श्रेणी में हो सकती हैं। उनका अत्यधिक गतिशील होना आवश्यक होगा। गौरतलब है कि चीन और पाकिस्तान दोनों ने सामरिक उद्देश्यों के लिए बैलिस्टिक मिसाइलों को तैनात किया है। सूत्रों के मुताबिक डीआरडीओ द्वारा विकसित 'प्रलय' मिसाइलें, सैन्य जरूरतों के अनुसार सीमा में और वृद्धि के लिए तैयार हैं।
DRDO ने मिसाइलों के कई संस्करण विकसित किए
मध्यम दूरी की मारक क्षमता वाली मिसाइलें रणनीतिक बलों के शस्त्रागार में मिसाइलों की मौजूदा सूची से ही हो सकती हैं। बता दें कि भारत के सुरक्षाबलों के लिए डीआरडीओ अग्नि श्रृंखला की हथियार प्रणालियों सहित मध्यम से लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम मिसाइलों के कई संस्करण विकसित कर चुकी है।
मिसाइलों के लिए अलग यूनिट बनाने पर विचार
सूत्रों के अनुसार, विभिन्न बलों के पास मिसाइलों की अपनी सूची है। ये बैलिस्टिक मिसाइलें होंगी और एक बार प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद, इनका एकीकृत तरीके से उपयोग करने के लिए सुरक्षाबल एक अलग फोर्स यानी रॉकेट यूनिट बना सकते हैं।
क्रूज मिसाइलों का लंबी दूरी का परीक्षण
रक्षा बलों को ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलों की बढ़ी हुई रेंज के रूप में भी बड़ा हथियार मिला है। सुरक्षा मामलों से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक निकट भविष्य में क्रूज मिसाइलों का लंबी दूरी का परीक्षण भी होने वाला है।
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सेना के रॉकेट बल में प्रलय को शामिल करने पर जोर
खबरों के अनुसार, हाल के दिनों में रक्षा बलों को डीआरडीओ के वैज्ञानिकों की तरफ से विकसित किए गए प्रलय बैलिस्टिक मिसाइलों को शामिल करने की मंजूरी मिली है। सूत्रों के मुताबिक सेना के रॉकेट बल में पारंपरिक भूमिकाओं में इस्तेमाल करने के लिए महत्वपूर्ण संख्या में प्रलय को शामिल किया जाएगा।
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पारंपरिक भूमिकाओं में 1,500 किमी तक का लक्ष्य
सुरक्षा प्रतिष्ठान- डीआरडीओ से जुड़े सूत्रों के हवाले से एएनआई की रिपोर्ट में कहा गया, सुरक्षाबल गैर-परमाणु पारंपरिक भूमिकाओं में इन बैलिस्टिक मिसाइलों का उपयोग करके मध्यम दूरी पर हमला करने की क्षमता विकसित करने की दिशा में काम कर रही हैं। प्रलय मिसाइल की मारक क्षमता 150-500 किमी के बीच के लक्ष्य हैं। सूत्रों ने बताया कि सेनाएं लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के विकल्प पर विचार कर सकती हैं। केवल पारंपरिक भूमिकाओं में 1,500 किमी तक का लक्ष्य भेद सकती हैं।
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चीन और पाकिस्तान की रणनीति
मिसाइलें मध्यम दूरी की श्रेणी में हो सकती हैं। उनका अत्यधिक गतिशील होना आवश्यक होगा। गौरतलब है कि चीन और पाकिस्तान दोनों ने सामरिक उद्देश्यों के लिए बैलिस्टिक मिसाइलों को तैनात किया है। सूत्रों के मुताबिक डीआरडीओ द्वारा विकसित 'प्रलय' मिसाइलें, सैन्य जरूरतों के अनुसार सीमा में और वृद्धि के लिए तैयार हैं।
DRDO ने मिसाइलों के कई संस्करण विकसित किए
मध्यम दूरी की मारक क्षमता वाली मिसाइलें रणनीतिक बलों के शस्त्रागार में मिसाइलों की मौजूदा सूची से ही हो सकती हैं। बता दें कि भारत के सुरक्षाबलों के लिए डीआरडीओ अग्नि श्रृंखला की हथियार प्रणालियों सहित मध्यम से लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम मिसाइलों के कई संस्करण विकसित कर चुकी है।
मिसाइलों के लिए अलग यूनिट बनाने पर विचार
सूत्रों के अनुसार, विभिन्न बलों के पास मिसाइलों की अपनी सूची है। ये बैलिस्टिक मिसाइलें होंगी और एक बार प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद, इनका एकीकृत तरीके से उपयोग करने के लिए सुरक्षाबल एक अलग फोर्स यानी रॉकेट यूनिट बना सकते हैं।
क्रूज मिसाइलों का लंबी दूरी का परीक्षण
रक्षा बलों को ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलों की बढ़ी हुई रेंज के रूप में भी बड़ा हथियार मिला है। सुरक्षा मामलों से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक निकट भविष्य में क्रूज मिसाइलों का लंबी दूरी का परीक्षण भी होने वाला है।