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Defence Export: मोरक्को को भारत ने सप्लाई किया छोटे हथियारों का गोला-बारूद, मेक इन इंडिया को मिलेगा बढ़ावा

Thu, 17 Oct 2024 07:29 PM IST
निर्मल कांत डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली।
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 17 Oct 2024 07:29 PM IST
सार

Defence Export: आयुध निर्माणी वरनगांव ने मोरक्को को छोटे हथियारों के गोला-बारूद की खेप भेजी है। इस खेप में 5.56x45 मिमी, 7.62x39 मिमी और 12.7x108 मिमी कैलिबर के राइफल चैंबर शामिल हैं। इन हथियारों में आयुध निर्माणी वारंगांव ने तीन तरह के छोटे गोलाबारूद शामिल हैं।

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Defence export india supplies small arms ammunition to Morocco make in india
अफ्रीकी देश मोरक्को ने WhAP के बाद भारत को दिया गोला-बारूद का ऑर्डर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

उत्तरी अफ्रीकी देश मोरक्को पिछले कुछ समय से भारत के बड़े रणनीतिक रक्षा साझीदार के तौर पर उभरा है। हाल ही में मोरक्को ने चीन के ZBL-08 की बजाय भारत के 150 व्हील आर्मर्ड प्लेटफॉर्म (WhAP) व्हीकल्स की खरीद का बड़ा ऑर्डर दिया था। वहीं, अब मोरक्को ने भारत से छोटे हथियारों के गोला-बारूद की भी खरीद की है। महाराष्ट्र स्थित आयुध निर्माणी फैक्टरी वारंगांव ने मोरक्को की सेना को छोटे हथियारों का निर्यात किया है।     
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जानकारी के मुताबिक आयुध निर्माणी वरनगांव ने मोरक्को को छोटे हथियारों के गोला-बारूद की खेप भेजी है। इस खेप में 5.56x45 मिमी, 7.62x39 मिमी और 12.7x108 मिमी कैलिबर के राइफल चैंबर शामिल हैं। इन हथियारों में आयुध निर्माणी वारंगांव ने तीन तरह के छोटे गोलाबारूद शामिल हैं। इनमें 12.7 x 108 मिमी की बड़े कैलिबर की गोलियां हैं, जो आमतौर पर भारी मशीनगनों और स्नाइपर राइफलों में उपयोग की जाती हैं। जबकि 5.56 x 45 मिमी कैलिबर का इस्तेमाल असॉल्ट राइफलों में किया जाता  है। वहीं, 7.62 x 39 मिमी कैलिबर गोलियों का इस्तेमाल आम मशीन गनों और असॉल्ट राइफलों में किया जाता है। 

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महाराष्ट्र स्थित आयुध निर्माणी फैक्टरी वारंगांव - फोटो : फेसबुक/आयुध निर्माणी फैक्टरी वारंगांव

वरनगांव फैक्टरी ने इन छोटे गोला बारूद को चार 20-20 फीट के कंटेनरों में भर कर मोरक्को को भेजा है। वहीं मोरक्को जैसे देशों से छोटे हथियारों का ऑर्डर मिलने से भारत के रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। यह न केवल विश्व स्तरीय हथियार बनाने की देश की क्षमता को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर इसकी रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूत करता है। बता दें कि इस साल अप्रैल में ही भारत सरकार ने कई अफ्रीकी देशों में डिफेंस अताशे की नियुक्तियां की थीं। इस पर सरकार का कहना था कि अफ्रीका में हथियारों की बिक्री की काफी संभावनाएं हैं और मेक इन इंडिया प्रोग्राम के तहत जिस तरह से भारत स्वेदशी हथियारों को विकसित कर रहा है, इससे भारत की लोकप्रियता दुनियाभर में बढ़ रही है। वहीं कई अफ्रीकी देश अपनी सेनाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं और अफ्रीकी देश भारत में बने हथियारों को इसलिए प्राथमिकता दे रहे हैं क्योंकि भारत के साथ कोई राजनीतिक विवाद जुड़ा नहीं होता है।

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इससे पहले मोरक्को ने भारतीय कंपनी टाटा को 150 व्हील आर्मर्ड प्लेटफॉर्म (WhAP) वाहनों के निर्माण का ऑर्डर दिया था। WhAP एक बख्तरबंद वाहन है, जिसे भारत के सरकारी रक्षा संस्थान डीआरडीओ और टाटा ने मिल कर विकसित किया है। खास बात यह है कि मोरक्को ने चीन में बने NORINCO Type 08 (ZBL-08 या VN-1) को नकार कर भारत के WhAP को चुना। मोरक्को की सेना को ये बख्तरबंद गाड़ियां अगले तीन साल में सप्लाई की जाएंगी। बख्तरबंद गाड़ियों का यह भारत को मिला सबसे बड़ा कॉन्ट्रैक्ट है। भारत की पैरामिलिट्री फोर्सेस ने भी इन बख्तरबंद गाड़ियों व्हैप का ऑर्डर दिया है। मोरक्को में व्हैप के परीक्षण बीते करीब सात माह चल रहे थे।

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