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आम बजट 2018: चौतरफा खतरों के बावजूद अछूता रहा रक्षा बजट, नहीं हुई आधुनिकीकरण की बात
शशिधर पाठक
Updated Fri, 02 Feb 2018 12:19 PM IST
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NIRMALA SITARAMAN
- फोटो : AMAR UJALA
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चीन पाकिस्तान से लगातार खतरा बढ़ रहा है। रक्षा मामलों के विशेषज्ञ मेजर जरनल अशोक मेहता (रिटायर) का कहना है कि जम्मू-कश्मीर से लगती पाकिस्तान सीमा पर लगातार स्थिति तनाव पूर्ण बनी है। चीन सीमा पर दोकलम में भी स्थिति नाजुक है, लेकिन सैन्य आधुनिकीकरण पर कोई बात नहीं करता। मेहता के अनुसार रक्षा बजट भी आम बजट 2018-19 में कहने के लिए बढ़ गया है, लेकिन इससे आप कोई नई योजना नहीं शुरू कर सकते। मेजर जनरल का कहना है कि विकास को लेकर सब बात कर रहे हैं लेकिन रक्षा में सुधार पर कोई फोकस नहीं दिखाई देता।
मेजर जनरल ने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री रक्षा उत्पादन कॉरिडोर समेत अन्य की बात कर रही हैं। वह कर्नाटक से तमिलनाडु को जोड़ने की बात कर रही हैं, लेकिन चीन और पाकिस्तान के फ्रंट पर खड़ी चुनौती, सैन्य आधुनिकीकरण, रक्षा बजट, सैन्य खर्च पर वह भी मौन हैं।
अपर्याप्त है बजट
वायुसेना की क्षमता 24 स्क्वॉड्रान पर आ गई है। शीर्ष स्तर की खामोशी देखकर रक्षा मामलों के विशेषज्ञ ने कहा कि मुझे नहीं लगता कोई इसे लेकर बहुत गंभीर है। कुछ साल पहले हम देश के रक्षा बजट को जीडीपा का 2.5 प्रतिशत तक ले जाने की बात कर रहे थे। यह भावी चुनौतियों को देखकर था। तब से अब तक रक्षा चुनौतियां और खतरे दोनों लगातार बढ़ रहे हैं। जीडीपी भी 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, लेकिन केन्द्र सरकार जीडीपी की दर के हिसाब से रक्षा बजट के आवंटन को घटा रही है। कुल जीडीपी का रक्षा बजट को 1.57 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। जबकि 2013-14 में जीडीपी के मुकाबले रक्षा खर्च 1.79 प्रतिशत था।
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यह भी पढ़ें: बजट 2018: शिवसेना का तंज- गुजरात ट्रेलर, उपचुनाव इंटरवल, 2019 में पूरी फिल्म बाकी
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मेजर जनरल ने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री रक्षा उत्पादन कॉरिडोर समेत अन्य की बात कर रही हैं। वह कर्नाटक से तमिलनाडु को जोड़ने की बात कर रही हैं, लेकिन चीन और पाकिस्तान के फ्रंट पर खड़ी चुनौती, सैन्य आधुनिकीकरण, रक्षा बजट, सैन्य खर्च पर वह भी मौन हैं।
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अपर्याप्त है बजट
वायुसेना की क्षमता 24 स्क्वॉड्रान पर आ गई है। शीर्ष स्तर की खामोशी देखकर रक्षा मामलों के विशेषज्ञ ने कहा कि मुझे नहीं लगता कोई इसे लेकर बहुत गंभीर है। कुछ साल पहले हम देश के रक्षा बजट को जीडीपा का 2.5 प्रतिशत तक ले जाने की बात कर रहे थे। यह भावी चुनौतियों को देखकर था। तब से अब तक रक्षा चुनौतियां और खतरे दोनों लगातार बढ़ रहे हैं। जीडीपी भी 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, लेकिन केन्द्र सरकार जीडीपी की दर के हिसाब से रक्षा बजट के आवंटन को घटा रही है। कुल जीडीपी का रक्षा बजट को 1.57 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। जबकि 2013-14 में जीडीपी के मुकाबले रक्षा खर्च 1.79 प्रतिशत था।
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चिंता जनक है सेना के हालत
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मेजर जनरल का कहना है कि इस साल केन्द्र सरकार ने रक्षा खर्च के मद में 2.95 हजार 511 करोड़ रुपये आवंटित किया है। पिछले बजट के अनुमान की तुलना में यह 7.8 प्रतिशत के करीब अधिक है। लेकिन इसी के साथ सैन्य बलों के पास पिछली लायबिलिटीज भी हैं। उन्हें उसको पूरा करना है।
मेजरल जनरल मेहता का कहना है कि सैन्य बलों को संसाधन की जरूरत है। तीनों सेनाओं को साजो-सामान देकर उन्नत बनाने की आवश्यकता है लेकिन इस पर कोई बात नहीं हो रही है। मेरा स्पष्ट तौर पर मानना है कि केन्द्र सरकार ने रक्षा बजट में जो बढ़ोत्तरी की है, उससे कोई नई योजना नहीं शुरू की जा सकती है।
पिछले साल सैन्य आधुनिकीकरण के मद में 86,488 करोड़ रुपये आवंटित थे। इसमें से कोई राशि वापस नहीं की गई। यह अच्छी बात है। इसकी तुलना में इस बार 99,563.86 करोड़ रुपये आवंटित हुए है। लेकिन इसे पर्याप्त नहीं कहा जा सकता।
मेजरल जनरल मेहता का कहना है कि सैन्य बलों को संसाधन की जरूरत है। तीनों सेनाओं को साजो-सामान देकर उन्नत बनाने की आवश्यकता है लेकिन इस पर कोई बात नहीं हो रही है। मेरा स्पष्ट तौर पर मानना है कि केन्द्र सरकार ने रक्षा बजट में जो बढ़ोत्तरी की है, उससे कोई नई योजना नहीं शुरू की जा सकती है।
पिछले साल सैन्य आधुनिकीकरण के मद में 86,488 करोड़ रुपये आवंटित थे। इसमें से कोई राशि वापस नहीं की गई। यह अच्छी बात है। इसकी तुलना में इस बार 99,563.86 करोड़ रुपये आवंटित हुए है। लेकिन इसे पर्याप्त नहीं कहा जा सकता।