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मोदी सरनेम केस: गुजरात हाईकोर्ट की जज ने राहुल की याचिका पर सुनवाई से खुद को किया अलग, जानें अब आगे क्या होगा

Wed, 26 Apr 2023 07:11 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Wed, 26 Apr 2023 07:11 PM IST
सार

कांग्रेस नेता की वकील चंपानेरी ने कहा कि अदालत ने पहले उन्हें मामले को बुधवार को सुनने के लिए अनुमति दी थी, लेकिन जब यह सुनवाई के लिए आया तो उन्होंने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।

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Defamation case: Gujarat HC judge recuses from hearing Rahul Gandhi appeal against sessions court order
राहुल गांधी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

गुजरात हाई कोर्ट की एक जज ने  मोदी सरनेम मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा सूरत सत्र न्यायालय के आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। जानकारी के मुताबिक, राहुल गांधी की वकील वकील पी एस चंपानेरी ने न्यायमूर्ति गीता गोपी की अदालत के समक्ष मामले का जिक्र करते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की थी। याचिका पर संक्षिप्त सुनवाई के बाद उन्होंने कहा, 'मेरे सामने नहीं'। जज द्वारा सुनवाई से खुद को अलग किए जाने के बाद इसे लेकर सियासत शुरू हो गई है। 

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गौरतलब है कि सत्र न्यायालय के आदेश के खिलाफ राहुल गांधी ने मंगलवार को गुजरात हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जज द्वारा खुद को सुनवाई से अलग किए जाने के बाद राहुल गांधी की वकील ने जानकारी दी। कांग्रेस नेता की वकील चंपानेरी ने कहा कि अदालत ने पहले उन्हें मामले को बुधवार को सुनने के लिए अनुमति दी थी, लेकिन जब यह सुनवाई के लिए आया तो उन्होंने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।
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अपने अगले कदम के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि अब मामले को किसी अन्य अदालत में रखने के लिए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के पास एक नोट भेजा जाएगा। चंपानेरी ने कहा कि इससे पहले, मामले को न्यायमूर्ति गीता गोपी की अदालत में ले जाने का अनुरोध किया गया था क्योंकि उनकी अदालत आपराधिक पुनरीक्षण के विषय से संबंधित है।
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किस मामले में हुई राहुल को सजा?
राहुल गांधी की ओर से 2019 में मोदी उपनाम को लेकर की गई टिप्पणी के मामले में 23 मार्च को सूरत की अदालत ने फैसला सुनाया था। कोर्ट ने उन्हें धारा 504 के तहत दो साल की सजा सुनाई थी। हालांकि, कोर्ट ने फैसले पर अमल के लिए कुछ दिन की मोहलत भी दी थी। इसके साथ ही उन्हें तुरंत जमानत भी दे दी थी। राहुल ने सूरत की कोर्ट में याचिकाएं भी दाखिल की थ्राीं, जिनमें एक को कोर्ट ने खारिज कर दिया था और दूसरी पर तीन मई को सुनवाई होनी है।

राहुल ने क्या कहा था?
दरअसल, 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान कर्नाटक के कोलार की एक रैली में राहुल गांधी ने कहा था, 'कैसे सभी चोरों का उपनाम मोदी है?' इसी को लेकर भाजपा विधायक और गुजरात के पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया था। उनका आरोप था कि राहुल ने अपनी इस टिप्पणी से समूचे मोदी समुदाय की मानहानि की है। राहुल के खिलाफ आईपीसी की धारा 499 और 500 (मानहानि) के तहत मामला दर्ज किया गया था।


राहत नहीं मिली तो राहुल के लिए आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद से किसी भी कोर्ट में दोषी ठहराए जाते ही नेता की विधायकी-सासंदी चली जाती है। इसके साथ ही अगले छह साल के लिए वह व्यक्ति चुनाव लड़ने के अयोग्य हो जाता है। राहुल की सांसदी चली गई है। अगर कोर्ट से भी उन्हें राहत नहीं मिलती है तो राहुल 2024 और 2029 का लोकसभा चुनाव भी नहीं लड़ सकेंगे।

नियम क्या कहते हैं?
दरअसल, 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने लोक-प्रतिनिधि अधिनियम 1951 को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। कोर्ट ने इस अधिनियम की धारा 8(4) को असंवैधानिक करार दे दिया था। इस प्रावधान के मुताबिक, आपराधिक मामले में (दो साल या उससे ज्यादा सजा के प्रावधान वाली धाराओं के तहत) दोषी करार किसी निर्वाचित प्रतिनिधि को उस सूरत में अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता था, अगर उसकी ओर से ऊपरी न्यायालय में अपील दायर कर दी गई हो। यानी धारा 8(4) दोषी सांसद, विधायक को अदालत के निर्णय के खिलाफ अपील लंबित होने के दौरान पद पर बने रहने की छूट प्रदान करती थी।

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