नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक ऑपरेशन जल्द: जंगल में पत्ते गिरते ही होगा बड़ा प्रहार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्र सरकार ने नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई की तैयारी कर ली है। इस बार जो प्रहार होगा, वह नक्सलवाद के ताबूत में अंतिम कील साबित हो सकता है। कुछ समय बाद जंगल में पेड़ों के पत्ते गिरने लगेंगे और नक्सलियों के छिपने के ठिकाने नजर आ जाएंगे, तभी सुरक्षा बलों का खास ऑपरेशन शुरु हो जाएगा।
छग में अतिरिक्त बटालियनें तैनात
अभियान के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नक्सल प्रभावित इलाकों में अतिरिक्त बटालियनों की तैनाती को मंजूरी दे दी है। इन बटालियनों को छत्तीसगढ़ में तैनात किया जा रहा है। केंद्र सरकार के विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि निर्णायक लड़ाई के लिए सीआरपीएफ के पूर्व डीजी और केंद्रीय गृह मंत्रालय में वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार के पद पर कार्यरत के. विजय कुमार व सुरक्षा सलाहकार कर्नल हरजोत सिंह को खास जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा सीआरपीएफ की कोबरा इकाई और छत्तीसगढ़ पुलिस के विशेष दस्ते 'डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड' के अधिकारी भी ऑपरेशन की तैयारियों में जुटे हैं। अब केवल इंतजार पत्तों के झड़ने का है। मार्च और अप्रैल में जब पेड़ों के पत्ते नीचे गिर जाएंगे, तभी यह ऑपरेशन शुरु कर दिया जाएगा।
दो साल में 460 मार गिराए
केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक, पिछले दो साल में सुरक्षा बलों ने 460 नक्सलियों को ढेर किया है। सुरक्षा बलों ने पिछले दो तीन वर्षों के दौरान भारी संख्या में नक्सली मारे हैं। मारे गए नक्सलियों की संख्या करीब 460 बताई गई है। इसके अलावा भारी संख्या में नक्सलियों ने सरेंडर भी किया है। सीआरपीएफ ने पिछले साल 32 नक्सली मारे थे। इनमें 15 लाख रुपये का इनामी नक्सली जिडान गुरिया भी शामिल था।
देश के 46 जिलों में सिमटी नक्सली हिंसा
अब देश के केवल 46 जिलों से ही नक्सली हिंसा की खबरें आ रही हैं। नक्सलियों के खिलाफ लगातार जारी ऑपरेशन में मिल रही सफलता से केंद्र सरकार जोश में है। यही वजह है कि अब केंद्र सरकार ने नक्सल पर निर्णायक चोट करने का फैसला किया है। सूत्रों का कहना है, केंद्र सरकार अब नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे की तरफ बढ़ रही है। ऑपरेशन की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। जवानों को आईईडी ब्लास्ट से बचाने की योजना पर भी काम हो रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय का प्रयास है कि इस निर्णायक लड़ाई में सुरक्षा बलों को कम से कम हानि पहुंचे। इसके लिए कई तरह के नए उपकरण खरीदे जा रहे हैं।
नक्सली कैडर समस्याओं से घिरा
सुरक्षा बलों के पास वह जानकारी है कि जिसमें नक्सलियों के सामने आ रही कई दिक्कतों का खुलासा हुआ है। नक्सल कैडर के सामने केवल वित्तीय समस्या ही नहीं है, बल्कि नई भर्ती का संकट भी खड़ा हो गया है।