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सुप्रीम कोर्ट: उन्नाव में 17 साल के लड़के की मौत की जांच के तरीके पर अदालत नाखुश, मामला आईजी इंटेलिजेंस को सौंपा
Tue, 26 Apr 2022 03:43 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 26 Apr 2022 03:43 PM IST
सार
राज्य में कोरोना वायरस प्रतिबंधों का उल्लंघन करने के लिए लड़के के साथ पुलिस हिरासत में मारपीट की गई थी।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : social media
विस्तार
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में 17 साल के लड़के की मौत की जांच के तरीके पर नाखुशी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उसकी मां की शिकायत पर मामले की जांच पुलिस महानिरीक्षक को सौंप दी है। न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने कहा कि जांच अधिकारी द्वारा की गई जांच को निष्पक्ष नहीं कहा जा सकता।
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हिरासत में की गई थी मारपीट
राज्य में कोरोना वायरस प्रतिबंधों का उल्लंघन करने के लिए लड़के के साथ पुलिस हिरासत में मारपीट की गई थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि निष्पक्ष जांच आपराधिक न्याय प्रणाली की रीढ़ है और जांच का उद्देश्य सच्चाई की खोज करना है ताकि यह अदालत में निष्पक्ष सुनवाई के माध्यम से न्याय के लक्ष्य को पूरा करने में मदद कर सके।
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बेंच ने कहा, अपराध की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की आवश्यकता अनिवार्य है क्योंकि यह एक स्तर पर पीड़ित के अधिकारों और हर नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा करती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि अपराध की जांच की जाए और कानून के अनुसार निपटा जाए। शीर्ष अदालत ने कहा कि अभिलेखों का अध्ययन करने के बाद प्रथम दृष्टया यह माना जाता है कि याचिकाकर्ता की शिकायत इस अदालत में शामिल होने योग्य है।
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शीर्ष अदालत ने कहा कि इस अदालत को आठ सप्ताह की अवधि के भीतर रिपोर्ट पेश की जाए। राज्य सरकार को निर्देश दिया जाता है कि वह चार्जशीट और अन्य सामग्री सहित सभी कागजात अधिकारी को सात दिनों के भीतर सौंप दें और यदि जरूरी हो तो उसे सभी सहायता भी दे। मामले की अगली सुनवाई 19 जुलाई को होगी।