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Dearness Allowance: केंद्रीय कर्मियों-पेंशनरों के लिए पटरी पर नहीं अर्थव्यवस्था! दिल्ली में जुटेंगे खफा कर्मी

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 15 Dec 2022 01:43 PM IST
सार

Dearness Allowance: 'एआईडीईएफ' महासचिव सी. श्रीकुमार ने बताया, देखिये सरकार के मन में खोट आ चुका है। केंद्र ने 2020 के प्रारंभ में कोविड-19 की आड़ लेकर सरकारी कर्मियों और पेंशनरों के डीए/डीआर पर रोक लगा दी थी। उस वक्त कर्मियों के 11 फीसदी डीए का भुगतान रोक कर केंद्र सरकार ने 40000 करोड़ रुपये बचा लिए थे...

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Dearness Allowance: Employees Organization will hold an important meeting in Delhi on January 7
dearness allowance - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

केंद्र सरकार के एक करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों और पेंशनरों को झटका लगा है। राज्यसभा में वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने साफ कर दिया है कि कोरोना काल में रोकी गई महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की बकाया किस्त जारी करना व्यावहारिक नहीं है। खास बात है कि केंद्र सरकार ने 2020 में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में कैलेंडर व डायरी छापने पर रोक लगा दी थी। अब 13 दिसंबर को वित्त मंत्रालय ने अपने एक आदेश में कैलेंडर छपाई पर लगी रोक हटा ली है।

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अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ 'एआईडीईएफ' के महासचिव और 'स्टाफ साइड' की राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) के सदस्य सी. श्रीकुमार का कहना है कि वित्त मंत्री, देश की अर्थव्यवस्था के बेहतर स्थिति में होने का दावा करती हैं। इस स्थिति में क्या यह मान लिया जाए कि एक करोड़ से ज्यादा केंद्रीय कर्मियों/पेंशनरों के लिए ही अर्थव्यवस्था पटरी पर नहीं लौटी है। 18 माह के डीए/डीआर का एरियर रोके जाने के खिलाफ केंद्रीय कर्मचारी संगठन सात जनवरी को दिल्ली में एक अहम बैठक करेंगे, जिसमें आंदोलन की रणनीति तय होगी।

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राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) के सचिव ने लिखा था पत्र

बता दें कि कोरोना काल में 48 लाख केंद्रीय कर्मचारियों व 64 लाख पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते/महंगाई राहत पर रोक लगा दी गई थी। केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर, 18 महीने के डीए/डीआर के बकाया भुगतान को लेकर लंबे समय से मांग उठा रहे थे। कर्मियों को उम्मीद थी कि उन्हें बकाया राशि मिल जाएगी। मंगलवार को संसद में सरकार ने साफ कर दिया है कि महंगाई भत्ते के 18 महीने का एरियर जारी करना व्यावहारिक नहीं है। कर्मचारियों की 'स्टाफ साइड' की राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने इस बाबत कैबिनेट सेक्रेटरी को पत्र लिखा था। वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में बताया, केंद्र सरकार के विभिन्न कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के संगठनों की ओर से 18 महीने के डीए/डीआर का एरियर जारी करने की मांग को लेकर कई आवेदन आए थे।

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एरियर देने की बात पर अर्थव्यवस्था बिगड़ जाती है

'एआईडीईएफ' महासचिव सी. श्रीकुमार ने बताया, देखिये सरकार के मन में खोट आ चुका है। केंद्र ने 2020 के प्रारंभ में कोविड-19 की आड़ लेकर सरकारी कर्मियों और पेंशनरों के डीए/डीआर पर रोक लगा दी थी। उस वक्त कर्मियों के 11 फीसदी डीए का भुगतान रोक कर केंद्र सरकार ने 40000 करोड़ रुपये बचा लिए थे। इस साल केंद्रीय कर्मचारियों के 18 माह के एरियर के भुगतान को लेकर कर्मचारी संगठनों ने सरकार को कई तरह के विकल्प सुझाए थे। इनमें एरियर का एकमुश्त भुगतान करना भी शामिल था। स्टाफ साइड के सचिव शिव गोपाल मिश्रा व अन्य सदस्यों ने एरियर जारी करने को लेकर सरकार से यह भी कहा था कि अगर वह किसी दूसरे तरीके पर चर्चा करना चाहती है, तो कर्मचारी संगठन उसके लिए भी तैयार हैं। केंद्र सरकार ने कोरोनाकाल के बाद जब डीए देने की घोषणा की थी तो इस बात का उल्लेख किया था कि एक जनवरी 2020 से 30 जून 2021 तक डीए व डीआर की दर 17 फीसदी ही मानी जाएगी। केंद्र सरकार, अर्थव्यवस्था के रफ्तार पकड़ने का कई बार दम भर चुकी है, लेकिन जब एरियर देने की बात आती है, तो अर्थव्यवस्था बिगड़ जाती है। सात जनवरी की बैठक के लिए भारतीय मजदूर संघ सहित सभी कर्मचारी संगठनों को न्योता भेजा गया है। 

डीए में एकाएक 11 फीसदी वृद्धि हो गई

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कोरोनाकाल के बाद यह घोषणा की थी कि कर्मचारियों को 28 फीसदी के हिसाब से महंगाई भत्ता मिलेगा। उस वक्त उन्होंने एरियर को लेकर कोई बात नहीं कही थी। केंद्रीय मंत्री की घोषणा का अर्थ यह था कि बढ़े हुए डीए की दर एक जुलाई 2021 से 28 फीसदी मान ली जाए। इसके अनुसार जून 2021 और जुलाई 2021 के बीच डीए में एकाएक 11 फीसदी वृद्धि हो गई, जबकि डेढ़ साल की अवधि में डीए की दरों में कोई वृद्धि दर्ज नहीं की गई। एक जनवरी 2020 से लेकर एक जुलाई 2021 तक डीए/डीआर फ्रीज कर दिया गया था। कोरोना संक्रमण काल में डीए की तीन किस्त (1 जनवरी 2020, 1 जुलाई 2020, 1 जनवरी 2021) रोक दी गई थी। इसके बाद सरकार ने जुलाई 2021 में महंगाई भत्ते को बहाल कर दिया था। तब 18 महीने की बकाया तीन किस्तों का पैसा देने का कोई जिक्र नहीं किया गया। अब वित्त मंत्रालय ने कहा है कि केंद्रीय कर्मियों और पेंशनरों को 18 माह के महंगाई भत्ते एवं महंगाई राहत की बकाया राशि देना व्यावहारिक नहीं है।

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