मिस्त्री का आरोप, 'VVIP हेलीकॉप्टर घोटाले में टाटा सन्स निदेशक का हाथ'
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रतन टाटा और साइरस मिस्त्री के बीच जुबानी जंग की आंच अब टाटा सन्स के निदेशकों को भी झुलसाने लगी है। कंपनी के बर्खास्त चेयरमैन साइरस मिस्त्री ने निदेशक विजय सिंह पर अगस्तावेस्टलैंड घोटाले में शामिल होने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। मिस्त्री ने कहा है कि रक्षा सचिव रहे सिंह की 3600 करोड़ रुपये के वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे को अंजाम देने में अहम भूमिका रही है।
मिस्त्री के दफ्तर से जारी एक बयान में कहा गया है कि रक्षा सचिव के तौर पर 2010 में वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदा अगस्तावेस्टलैंड को दिलाने में विजय सिंह ने बड़ी भूमिका निभाई थी।
1 जनवरी, 2014 को भारत ने फिनमेकनिका की सब्सीडियरी कंपनी अगस्तावेस्टलैंड के साथ वीवीआई पी हेलीकॉप्टर सौदे को रद्द कर दिया था। इसमें सौदे से जुड़े कांट्रेक्ट का उल्लंघन और 423 करोड़ रुपये की रिश्वतखोरी का आरोप लगाया गया था।
मिस्त्री ने विजय सिंह को अपनी बर्खास्तगी के सिलसिले में भी कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा है कि सिंह टाटा सन्स से उन्हें हटाने में रतन टाटा की साजिश में अपनी भूमिका से इनकार करने के लिए कहानियां गढ़ रहे हैं। विजय सिंह टाटा सन्स के नॉमिनेशन औैर रेम्यूनरेशन कमेटी के सदस्य थे और उन्होंने 28 जून 2016 को मिस्त्री प्रदर्शन की जबरदस्त तारीफ की थी।
सिंह ने आरोपों का खंडन किया
पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह ने अगस्तावेस्टलैंड मामले में मिस्त्री की ओर से लगाए गए आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि वह 2007 से 2009 के बीच रक्षा सचिव थे जबकि सीबीआई जिस वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले की जांच कर रही है वह 2004-05 से जुड़ी है।
उन्होंने कहा कि मेरे रिटायर होने के बाद कैबिनेट ने वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे को मंजूरी दी थी। गौरतलब है कि साइरस मिस्त्री ने सिंह पर आरोप लगाते हुए कहा है कि 3600 करोड़ रुपये के विवादास्पद अगस्तावेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले में उनकी अहम भूमिका रही है।
मिस्त्री ने चेयरमैन बनने के लिए भरमाया, वादे से मुकरे : टाटा
देश के सबसे बड़े कारोबारी समूह टाटा सन्स और उसके पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। टाटा संस ने एक बार फिर आरोपों की झड़ी लगाई है। उसने कहा है कि साइस मिस्त्री ने समूह का चेयरमैन बनने के लिए गलत जानकारी दी, अपने वादे से मुकर गए, शक्तियों को खुद के पास रखने पर जोर दिया और उनको मिली छूट का इस्तेमाल प्रबंधन ढांचे को कमजोर करने के लिए किया।
मिस्त्री को समूह की प्रमुख कंपनियों के निदेशक मंडल से बाहर करने के लिए शेयरधारकों की होने वाली अहम बैठक से पहले टाटा सन्स ने कहा कि मिस्त्री में भरोसा खत्म होने के मुख्य कारणों को वह सार्वजनिक कर कर रहा है।
उसने कहा कि मिस्त्री ने 2011 में टाटा संस के चेयरमैन के चयन के लिए बनाई गई समिति को भरमाया। उन्होंने समूह के लिए लंबी चौड़ी योजनाएं गिनाईं और सबसे अहम चीज यह रही कि उन्होंने टाटा समूह के प्रबंधन के लिए एक व्यापक प्रबंधन ढांचे का संकेत दिया।
उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि प्रबंधन ढांचे को जिम्मेदारी और अधिकार के लिए जवाबदेह बनाया जाएगा। टाटा सन्स ने आगे कहा कि मिस्त्री के इन्हीं लंबे चौड़े वादों के आधार पर उनको चेयरमैन बनाया गया।
लेकिन चार साल तक इंतजार करने के बाद ऐसा पाया गया कि उन्होंने किसी भी अपने वादे को अमलीजामा नहीं पहनाया है। इसके अलावा उन्होंने अपने पारिवारिक कारोबार शपूरजी पालोनजी एंड कंपनी से दूरी बनाने का वादा किया था, लेकिन उन्होंने ऐसा न कर अनुचित व्यवहार किया। यह टाटा संस की ओर से अपनाए गए उच्च कॉरपोरेट गवर्नेंस के सिद्धांतों के खिलाफ है।