{"_id":"619fa9b4f7564e68b165c5aa","slug":"cvc-increases-time-limit-for-reconsideration-of-its-advice-in-corruption-cases-to-2-months","type":"story","status":"publish","title_hn":"CVC: सीवीसी ने भ्रष्टाचार के मामलों में अपनी सलाह पर पुनर्विचार की समय सीमा बढ़ाकर दो महीने की","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
CVC: सीवीसी ने भ्रष्टाचार के मामलों में अपनी सलाह पर पुनर्विचार की समय सीमा बढ़ाकर दो महीने की
Thu, 25 Nov 2021 08:50 PM IST
Amit Mandal
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Thu, 25 Nov 2021 08:50 PM IST
सार
सतर्कता मामलों में या दो चरणों में अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए सीवीसी से परामर्श किया जाता है। पहले चरण के लिए समयसीमा बढ़ा दी गई है।
विज्ञापन
cvc
- फोटो : social media
विस्तार
केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने भ्रष्टाचार के मामलों में अपने पहले चरण की सलाह पर पुनर्विचार की समय सीमा मौजूदा एक महीने से बढ़ाकर दो महीने कर दी है। इस संबंध में गुरुवार को एक आधिकारिक आदेश जारी किया गया।
विज्ञापन
दुर्लभ मामलों में ही पुनर्विचार
सभी केंद्र सरकार के विभागों के सचिवों व मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और बीमा कंपनियों को इस संबंध में आदेश में जारी किया है। इसमें कहा गया है कि सलाह पर पुनर्विचार का प्रस्ताव केवल उन दुर्लभ मामलों में भेजा जाना चाहिए जहां कुछ अतिरिक्त या नए तथ्य सामने आए हैं, जिन पर पहले विचार नहीं किया जा सका था।
विज्ञापन
दो चरणों में कार्यवाही
सतर्कता मामलों में या दो चरणों में अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए सीवीसी से परामर्श किया जाता है। पहले जांच रिपोर्ट पर सलाह ली जाती है और फिर ऐसी कार्यवाही के समापन पर अंतिम निर्णय लेने से पहले सलाह मांगी जाती है। मौजूदा निर्देशों के अनुसार, संबंधित सरकारी संगठनों/प्राधिकरणों को सीवीसी की सलाह मिलने के एक महीने की अवधि के भीतर, अपने पहले चरण की सलाह पर पुनर्विचार के लिए आयोग से संपर्क करने की आवश्यकता है, यदि वे इससे अलग होने का प्रस्ताव करते हैं।
विज्ञापन
आदेश में कहा गया है- आयोग द्वारा इस मुद्दे पर विचार किया गया है और यह देखा गया है कि अवसरों पर, पहले चरण की सलाह पर पुनर्विचार का प्रस्ताव एक महीने की निर्धारित समय सीमा के बाद प्राप्त होता है और संबंधित अधिकारियों द्वारा बताई गई देरी के कारणों को तार्किक रूप से स्वीकार्य पाया जाता है।